2019

पहली बार असली ब्लैक होल (Black Hole) की तस्वीर अब दुनियाँ के सामने

पहली बार असली ब्लैक होल (Black Hole) की तस्वीर अब दुनियाँ के सामने आपको जानकार बहुत ख़ुशी होगी और आश्चर्य होगा की अब वैज्ञानिको ने ब्लैक हॉल की असली तस्वीर ले ली है। पर सबसे आश्चर्य की बात यह है की ब्लैक व्होल की तस्वीर कुछ वैसी ही आयी है जैसी की हमने हॉलीवुड फिल्मो और Discovery Science आदि चैनलो पर देखी है। इसे हम कल्पना का सच में परवर्तित

अशोक के पेड़ के अनगिनत लाभ

अशोक का पेड़ आमतौर पर सभी जगह देखा जा सकता है| लेकिन क्या आपको मालूम है कि यह पेड़ कितना गुणकारी होता है| इसका प्रत्येक भाग किसी न किसी रूप में ओषधि के काम आता है| अशोक के पेड़ से बनने वाली ओषधि महिलाओं के लिए तो जैसे वरदान है| लेकिन बहुत से लोग केवल इसे एक साधारण सा पेड़ ही समझते है क्योंकि उन्हें इस पेड़ की उपयोगिता पता

जाने मार्शल आर्ट को लोकप्रिय किसने बनाया ? - Martial Arts

Know Who made popular martial arts? मार्शल आर्ट एक प्राचीनकाल की युद्ध कला है जिसमे हम बिना शस्त्र के अपने विरोधी से लड़ाई लड़ते है| यह कला आत्मरक्षा के लिए सीखी जाती है| मार्शल आर्ट की शुरुआत भारत देश से ही हुई थी| कहा जाता है कि भगवान परशुराम व ऋषि अगस्त्य इस कला को भारत देश के दक्षिण भाग से लेकर आये थे| पहले इसे कलरीपायट्टू अर्थात बिना शस्त्र

जानिये 9 करोड़ रुपये से ज्यादा की कीमत के इन कबूतरों को  - Racing Pigeon

Know about these pigeons worth more than 9 crores – Racing Pigeon क्या आप चौंक गए? बिलकुल बात ही कुछ ऐसी है, इन कबूतरों की कीमत 900 रुपये नहीं बल्कि 9 करोड़ रुपये (1.4M$) के आस पास है. ये जानकारी है बेल्जियम की, जहाँ लोगो को कबूतरवाजी करने का बहुत बड़ा शौक है. कबूतरबाजी से मतलब कबूतरों की रेसिंग से है. और जो कबूतर अपनी रेस में प्रथम आते है

जरूर जानिये  भारत की  10 मार्शल आर्ट्स कलाएँ - Know Indian Martial Arts

जरूर जानिये भारत की 10 मार्शल आर्ट्स कलाएँ – Know Indian Martial Arts भारत का इतिहास बहुत ही पुराना और विविधिताओं से भरा है, भारत दुनिया को सीखने और सीखने की कलाये प्रदान करता है. ऐसे ही भारत में कुछ महान कलाएं है जिन्हे जानकार आज भी लोग अपने दांतो तले उंगलिया दवा लेते है. आज हम बात करेंगे मार्शल आर्ट्स के बारे में जो भारत में प्राचीन काल से

दूधी का प्रयोग, छोटी दूधी का उपयोग, बड़ी दूधी का उपयोग, छोटी दूधी के फायदे, छोटी दूधी का पौधा, छोटी दुद्धी, दूधी घास के गुण, दूधी के औषधीय गुण,

जाने दूधी (दूधिया घास) से होने वाले फायदे – Euphorbia Hirta – Milk Hedge दूधी एक प्रकार की घास है| जिसे आप अपने खेतों ,बगीचों या आसपास के मैदानों में आसानी से देख सकते है| दूधी को हम साधारण सी घास समझकर उखाड़कर फेंक देते है क्योंकि हमें उसके औषधीय गुणों की जानकारी नहीं होती है| लेकिन हम जिसे साधारण सी घास समझते है वास्तव में वह अनेक रोगों की

जाने भीमाशंकर ज्योर्तिलिंग का महत्व व इतिहास - 6th Jyotirlinga

जाने भीमाशंकर ज्योर्तिलिंग का महत्व व इतिहास भीमाशंकर 12 ज्योर्तिलिंग में से छठा ज्योर्तिलिंग है| यह ज्योर्तिलिंग महाराष्ट्र के पुणे से लगभग 110 किमी की दुरी पर सहाद्री नामक पर्वत पर स्थित है| इस पर्वत से होकर भीमा नदी है जो कृष्णा नदी में जाकर मिल जाती है| भीमाशंकर मंदिर का शिवलिंग बाकी सभी शिवलिंग की तुलना में काफी मोटा है इसलिए इसे मोटेश्वर शिवलिंग भी कहा जाता है| भीमाशंकर

जानिये विधुत बल्ब के अविष्कार के बारे में - Bulb Invention

यह तो आप सब लोगों को पता ही है कि बल्ब का उपयोग रोशनी के लिए किया जाता है| यह एक प्रकार का इलेक्ट्रोनिक यंत्र है| जो बिजली से चलता है| आजकल तो बाजार में बहुत प्रकार के बल्ब देखने को मिलते है| जो बिजली की खपत कम करते है जैसे –LED बल्ब ,CFL बल्ब आदि| लेकिन अपने कभी यह सोचा है कि इस बल्ब को बनाया किसने होगा| अगर

जानिये जायफल / जावित्री के गुणकारी लाभ - Health Benefits of Nutmeg (Jaiphal / Jayfal)

आयुर्वेद में जायफल को बहुत ही गुणकारी बताया गया है| क्योंकि इसका प्रयोग बहुत सारी बीमारियों को दूर करने में किया जाता है| इसके अलावा यह मसाले के रूप में भी इस्तमाल किया जाता है| जब हम घर में घूटी बनाकर बच्चों को देते है तो उसमे भी जायफल शामिल होता है क्योंकि जायफल बच्चों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है| जायफल का पेड़ बहुत बड़ा होता है| पूरी

जानिये भगवान शिव के स्वरूप श्री  केदारनाथ मंदिर के बारे में

केदारनाथ ज्योर्तिलिंग 12 ज्योर्तिलिंगो में से पांचवे नंबर का पवित्र ज्योर्तिलिंग है| केदारनाथ ज्योर्तिलिंग उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है तथा रुद्रप्रयाग हिमालय पर्वत के गढ़वाल क्षेत्र में आता है| सभी 12 ज्योर्तिलिंगो में से यह सबसे ऊँचा ज्योर्तिलिंग है| इस ज्योर्तिलिंग के मंदिर के पास में मन्दाकिनी नदी बहती है| यह तीर्थस्थल चारधाम के अंतर्गत आता है क्योंकि उत्तराखंड में गंगोत्री ,यमनोत्री ,केदारनाथ व बद्रीनाथ चारों धाम पाए