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विज्ञान की प्रगति के साथ एक के बाद एक देश अंतरिक्ष में अपने उपग्रह भेजने लगे हैं. इसके साथ ही वहां कूड़ा कचरा भी बढ़ने लगा है. अब यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कचरे को साफ करने की अपील की है.
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 10 सेंटीमीटर से बड़े 29,000 टुकड़े पृथ्वी का चक्कर काट रहे हैं. ये टुकड़े 25,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की कक्षा में घूम रहे हैं जो यात्री विमानों की रफ्तार से 40 गुना ज्यादा है. इस रफ्तार पर छोटे से छोटा टुकड़ा भी विमान या उपग्रह जैसी चीज को नष्ट कर सकता है. स्पेस में एक साल बिताने वाले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री स्कॉट केली का कहना है कि वह भारत और चीन में प्रदूषण के स्तर से हैरान थे।
अंतरिक्ष में कृत्रिम उपग्रह भेजने एवं उसे वहाँ पर स्थापित करने हेतु दो प्रकार की कक्षाएँ होती हैं –
(1) भू – स्थैतिक कक्षा ( Geo – stationary orbit ) और
(2) ध्रुवीय कक्षा ( Polar orbit )
1 . भू – स्थैतिक कक्षा
पृथ्वी के ऊपर भूमध्य रेखा के परितः 36,000 किलोमीटर ऊँचाई पर पश्चिम से पूर्व ( अक्षांशीय मार्ग पर ) दिशा में एक ऐसी कक्षा जिसमें स्थापित उपग्रह पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर प्रतीत होता है ; भूस्थैतिक कक्षा कहलाती है । इस कक्षा में स्थापित कृत्रिम उपग्रह का आवर्त काल ( पृथ्वी का एक चक्कर लगाने में लगा समय ) 24 घंटे होता है इसलिए यह हर समय पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर दिखाई देता है ।
2 . ध्रुवीय कक्षा
ध्रुवीय कक्षा सूर्य की तुल्यकालिक कक्षा होती है जो उत्तर – दक्षिण ( देशांतरीय मार्ग पर ) ध्रुवीय दिशा में पृथ्वी से लगभग 700 से 800 किलोमीटर ऊँचाई पर ध्रुवों के परितः तथा सूर्य के साथ हमेशा निश्चित कोण पर स्थिर होती है । अंतरिक्ष में अवांछित तत्वों की उपस्थिति प्रदूषण कहलाती है जो दो कारणों से फैलता है –
मानवीय और प्राकृतिक ।
(1) मानव के द्वारा प्रदूषण
इनमें मृत स्पेस क्राफ्ट , उपग्रह प्रक्षेपण यानों के अवशेष , राॅकेट , मिसाइल शार्पेनल , इलैक्ट्राॅनिक उपकरण , निष्क्रिय कृत्रिम उपग्रह इत्यादि होते हैं । वर्तमान में सक्रिय उपग्रहों से भी ज्यादा संख्या निष्क्रिय उपग्रहों की है । ये सर्वाधिक खतरनाक प्रदूषक हैं जो सक्रिय उपग्रह से टकराकर उन्हें हानि पहुँचा सकते हैं ।
(2) प्राकृतिक घटनायों के दवारा प्रदूषण :
इनमें काॅस्मिक विकिरण , उल्का पिण्ड एवं उनके टुकड़े होते हैं ।
अंतरिक्ष में घूमते हुए ये छोटे एवं बड़े टुकड़े 25, 000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पृथ्वी के चक्कर काट रहे हैं । इनकी गति यात्री विमानों की गति से 40 गुणा ज्यादा होती है । इतने तीव्र वेग से गतिशील ये टुकड़े अंतरिक्ष यान से , कृत्रिम उपग्रह से अथवा पृथ्वी की निचली कक्षा में भ्रमणशील होने की स्थिति में यात्री विमान से भी टकरा कर उन्हें ध्वस्त कर सकते हैं । यदि विमान से टक्कर हुई तो बहुत सारी निर्दोष जानें जा सकती हैं जबकि कृत्रिम उपग्रह के नष्ट होने से मोबाइल फोन , संचार तंत्र एवं जी पी एस का संतुलन ध्वस्त होकर उनका कार्य ठप्प हो जाएगा जिसकी भरपाई करने में अरबों मुद्रा खर्च होगी ।
अंतरिक्ष में फैला कचरा आपस में टकराकर वहाँ आणविक अभिक्रिया करते हैं जो पृथ्वी की संचार व्यवस्था को खराब कर सकते हैं ।
एक सच्ची घटना है, जिसमें यूरोपीय स्पेस एजेंसी या ईएसएद्वारा संचालितएक प्रेक्षण उपग्रहकोपर्निकस सेंटीनेल-1 एके सौर पैनल मेंइसी अंतरिक्ष मलबे के एक छोटे टुकड़े के कारण छेद हो गया था। इसी तरह की एक घटना 1993 की भी है, जब हबल टेलीस्कोप सेएक सौर ऐरे वापस लाया गया था, जिसमें धूल के आकार के अंतरिक्ष मलबे के कारण सैकड़ों छोटे छेद पाए गए थे।
निराकरण के उपाय (how does space junk affect the environment?)
1 . यदि इस कचरे को तत्काल नहीं हटाया जाता है तो पृथ्वी पर एवं समुद्र तट पर विभिन्न वैश्विक देशों की सीमा निर्धारण के समान ही अंतरिक्ष में भी सीमा निर्धारण करना पड़ेगा ।
2 . पुनर्उपयोगी उपग्रह प्रक्षेपण यान का विकास करके उसका उपयोग किया जाना चाहिए ।
3 . कृत्रिम उपग्रहों में ऐसा यंत्र लगा होना चाहिए जिससे उपग्रह का जीवन काल समाप्त होने के बाद वह स्वयं ही जलकर नष्ट हो जाए ।
4 . नैनो तकनीक का उपयोग करके छोटे एवं कम वजनदार कृत्रिम उपग्रहों का निर्माण एवं प्रक्षेपण करना चाहिए ।
5 . शक्तिशाली लेजर तकनीक के द्वारा इस कचरे को अंतरिक्ष में ही नष्ट कर देना चाहिए ।
6 . रोबोटिक हाथयुक्त नैनो उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजकर बड़े आकार के कचरे को समुद्र में गिरा देना चाहिए ।
7 . पृथ्वी की निचली कक्षा में भ्रमणशील अंतरिक्षीय कचरे को एकत्रित करने के लिए दो नैनो उपग्रहों को एक साथ इस प्रकार से अंतरिक्ष में भेजा जाए कि उन पर 5 × 5 मीटर लंबे पंख लगाए जाएँ । उन दोनों के बीच के स्थान में एक विशाल इलैक्ट्रिक जाल बुना जाए जो कचरे से भर जाने पर विद्युत आवेशित होकर चुंबकत्व से पृथ्वी की ओर आकर्षित होगा । उसके पार्थिव वायुमंडल में प्रवेश करते ही संपूर्ण कचरा घर्षण से जलकर नष्ट हो जाएगा ।
8 . इसके लिए सभी देशों को मिलकर वैश्विक स्तर पर स्थाई नियम बनाने चाहिए एवं उनका पालन करने की कानूनी बाध्यता होनी चाहिए ।

हांलाकि “क्लीन स्पेस”मिशन जैसी कुछ पहलों की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें यह गम्भीरता से सोचा जा रहा है कि अंतरिक्ष मलबे के कचरे सेके साथ क्या करना है। ऐसा माना जा रहा है कि इस मिशन के तहत मलबे के एक बहुत बड़े टुकड़े को नीचे पृथ्वी पर लाने का काम किया जा रहा है।यह एक बहुत ही जटिल ऑपरेशन है जिसे हरहाल में कोई भी विफल नहीं होने देना चाहता है।

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