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मृदा परीक्षण केंद्र या प्रयोगशाला के लिए मिट्टी की कैसे ले, जाने जाँच की विधि या प्रक्रिया

(How to take soil for soil testing center or laboratory, check the method or process)

मृदा परीक्षण का मतलब होता है “भूमि की जाँच” या मृदा की रासायनिक जाँच| इस जाँच से मृदा में उपस्थित पोषक तत्वों का पता लगाया जाता है| क्योंकि मृदा में पोषक तत्वों का भंडार होता है जो कि पेड़-पौधों को अपना जीवनचक्र पूरा करने के लिए उपयोगी होते है| मृदा में लगभग 16 पोषक तत्व उपस्थित होते है जैसे – ऑक्सीजन ,कार्बन ,नाइट्रोजन ,फास्फोरस ,कैल्शियम ,लोह ,तांबा आदि| इन सभी तत्वों का मृदा के अन्दर पर्याप्त मात्रा में होना बहुत जरुरी होता है तभी किसान एक उत्तम फसल प्राप्त कर सकता है| इसलिए किसानों को अपने खेतों की मिट्टी का परीक्षण कराते रहना चाहिए ताकि उन्हें अपने खेतों की मिट्टी में उपस्थित पोषक तत्वों की मात्रा के बारे में जानकारी मिलती रहे| और अगर किसी भी पोषक तत्व की कमी मिट्टी में हो जाये तो किसान सही समय पर उस कमी को दूर कर सके| जिससे भूमि की उर्वरक क्षमता बनी रहे और किसानों को एक अच्छी फसल प्राप्त हो सके|

मृदा परीक्षण के लिए नमूना कैसे ले –

  • सबसे पहले जिस जमीन या खेत का नमूना लेना है उस पर 10 से 15 जगह पर निशान लगा दे|
  • अब जहाँ निशान लगाये है उस जगह को अच्छे से साफ कर दे ताकि वहाँ किसी भी प्रकार का कूड़ा करकट या घास- फूस न हो|
  • अब जहाँ-जहाँ पर अपने निशान लगाये है उन सभी जगह को खोदकर थोड़ी-थोड़ी मिट्टी निकाल ले तथा एक बर्तन में रख ले|
  • इसके बाद पूरी मिट्टी को मिला ले|
  • अब इसमें से केवल आधा किलो मिट्टी ही परीक्षण के लिए निकाले| क्योंकि ये नमूना पुरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगा|
  • अब इस नमूने को किसी साफ प्लास्टिक की थैली में रख दे|
  • ध्यान रहे अगर मिट्टी गीली हो तो उसे धूप में सुखा ले तभी परीक्षण के लिए भेजे|
  • इस नमूने के साथ किसान एक सुचना पत्र भेजे| जिसके अंतर्गत निम्नलिखित सूचनाये हो जैसे – किसान का नाम और पूरा पता ,खेत की स्थिति ,नमूना एकत्रित करने की तिथि ,मिट्टी की किस्म ,सिंचाई की सुविधा कैसी है ,कौन सी फसल लगाना है ,खेत में 3 वर्षों में कौन सी खाद डाली और कितनी मात्रा में|
  • इस प्रकार सारी जानकारी लिखकर उसे नमूने के साथ भेजे|

नमूना लेते समय सावधानी – मिट्टी का नमूना लेते समय हमें अनेक बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे –

  • मिट्टी का नमूना कभी भी सिंचाई की जगह ,दलदली जगह ,खाद के ढेर से नहीं लेना चाहिए|
  • अगर फसल लगी हो तो मिट्टी का नमूना क्यारियों के बीच से ले लेना चाहिए|
  • कभी भी मिट्टी का नमूना खाद डालने के तुरंत बाद नहीं लेना चाहिए|
  • मृदा की जाँच 3 या 4 साल में एक बार जरुर कराना चाहिए|
  • नमूने को हमेशा बिल्कुल साफ थैली में ही रखना चाहिए|
  • गीली मिट्टी का नमूना न ले|
  • और जो भी सूचनापत्र भेजे उसकी एक नकल अपने पास रखे|

इस प्रकार कोई भी किसान अपने खेत की मिट्टी का नमूना लेकर उसे परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेज सकता है| और ये परीक्षण किसानों को 3 साल के अंतराल में कराते रहना चाहिए| ताकि किसानों को मृदा की उर्वरा शक्ति की जानकारी मिलाती रहे और वह मृदा में होने वाले पोषक तत्वों की कमी को पूरा कर सके|

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