आज हम आपको एक ऐसी जड़ी-बूटी के बारे में बताने जा रहे है जो हमारे स्वस्थ के लिए बहुत ही फायदेमंद है| इसका उपयोग औषधि के रूप में प्राचीनकाल से ही होता आ रहा है उस औषधि का नाम पुनर्नवा है|
पुनर्नवा में ऐसे बहुत से औषधीय गुण होते है जो हमारी सेहत में सुधार करके हमें हर बीमारी से बचाते है| यह उर्जा देने वाली और सुरक्षा प्रदान करने वाली जड़ी-बूटी है|

तो आइए जानते है कि punrnava kya hota hai? और punrnava ki pehchan कैसे कर सकते है? और दवाई के रूप में punrnava ka use कैसे किया जाता है?

यहाँ आप जानेंगे - hide

Punrnava क्या है?

इसकी यह खासियत होती है कि यह हर वर्ष फिर से नया हो जाता है अर्थात यह गर्मी के मौसम में सूख जाता है तथा बारिस के मौसम में फिर से फलने-फूलने लगता है| इसलिए इसे पुनर्नवा कहते है|
इसकी दो जातिया होती है –
• लाल पुनर्नवा
• सफेद पुनर्नवा
इन दोनों में से लाल पुनर्नवा का प्रयोग औषधि के लिए अधिक किया जाता है|

पुनर्नवा का पौधा (Punarnava plant) कैसा होता है?

जैसा कि हमने देखा पुनर्नवा दो प्रकार के होते है और punarnava ki pahchan करना बहुत आसान होता है| लाल पुनर्नवा के पत्ते ,तने और फूल सभी लाल रंग के होते है जबकि सफेद पुनर्नवा के नहीं होते है|

इसके पत्ते कोमल गोल या अंडाकार होते है तथा पत्तों का निचला तला सफेद होता है| इसके फूल सफेद या गुलाबी रंग के छोटे-छोटे छतरीनुमा होते है| इसके फल छोटे चिपचिपे बीजों से युक्त पांच धारियों वाले होते है|

इसकी जड़े मोटी ,गुद्देदार ,अनेक शाखाओं से युक्त ,तेजगंध वाली ,स्वाद में तीखी होती है तथा इसे तोड़ने पर इसमें से दूध जैसा तरल पदार्थ निकलने लगता है|

लाल पुनर्नवा स्वाद में कड़वा तथा सफेद पुनर्नवा स्वाद में मीठा होता है| यह खाने में ठंडी ,सुखी और हल्की होती है|

पुनर्नवा कहाँ पाया जाता है?(Punarnava kaha paya jata hai) –

यह दक्षिण-उत्तर अमेरिका ,भारत के कई स्थानों ,अफ्रीका ,म्यामांर ,चीन आदि जगह पर पाया जाता है|

पुनर्नवा के विभिन्न नाम (Punarnava other names) –

Punarnava ka botanical name बोरहाविया डिफ्यूजा है इसके अलावा इसे Hogweed ,विशाख ,दीर्घपत्रिका ,राती साटोडी ,अतिकामामिदी श्वेत पुनर्नवा ,थाजुथमा ,सबाका ,हांडा कुकी ,देवासापात ,बाषखीरा आदि|

पुनर्नवा में उपस्थित पोषक तत्व –

पोटेशियम नाइट्रेट ,क्लोरायडाम नाइट्रेट ,क्लोरेट ,चरपरा क्षाराभ ,आयरन ,विटामिन –c ,प्रोटीन ,सोडियम आदि|

पुनर्नवा के गुण-धर्म –

यह वातकारक ,पाचनशक्ति वर्धक ,रक्तवर्धक ,शुलहर ,मूत्रल ,शीतल ,रसायन दीपन ,मेदोहर तथा शोफ ,पांडू ,क्षत ,कास ,शूल ,कंडू ,रक्तपित्त ,अतिसार ,रक्तविकार ,उदररोग ,विष ,नेत्ररोग ,हदयरोग नाशक होता है|

पुनर्नवा जड़ी-बूटी के फायदे (Punarnava jadi-buti ke fayde) क्या-क्या है?

Punarnava aushadhi बहुत महत्त्वपूर्ण है इसलिए punarnava ke fayde भी अनगिनित है| तो आइए जानते है इसके फायदों के बारे में –

• त्वचा के लिए (punrnava for skin) –

त्वचा की एलर्जी ,खुजली ,चकत्ते आदि होने पर इसकी जड़ो को तेल में गर्म करके लगाए| ऐसा करने से त्वचा से संबंधित रोग ठीक होते है तथा चमक भी आती है|

• किडनी के लिए (punrnava for kidney) –

किडनी से संबंधित विकार होने पर इसके पौधे का काढ़ा बनाकर पीने से किडनी की सफाई हो जाती है|

• आंखों के लिए (punrnava for eyes) –

आंखों से सम्बन्धित रोग जैसे – नेत्रशुक्र ,नेत्रशुल ,नेत्रकंडू आदि होने पर punrnava root को नारी के दूध में घिसकर आंखों में लगाने से आराम मिलता है|

• अनिद्रा के लिए (punrnava for insomnia) –

नींद न आने की बीमारी होने पर punrnava ark का सेवन करे तो नींद आसानी से आने लगेगी|

• लीवर के लिए (punrnava for liver) –

अगर लीवर में सूजन हो तो पुनर्नवा की जड़ और सहजन की छाल को पानी में एक साथ उबालकर ,उस पानी को पीने से सूजन कम हो जाती है| इसके साथ-साथ पुनर्नवा का use लीवर को साफ करने के लिए भी किया जाता है|

• हदय के लिए (punrnava for heart) –

पुनर्नवा के पत्तों का ark (रस) सुबह-शाम पीने से हदय रोग से छुटकारा मिलता है तथा हदय स्वस्थ रहता है|

• कैंसर के लिए (punrnava for cancer) –

पुनर्नवा प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाता तथा मेलेनोमा कोशिकाओं की मेटास्टैटिक प्रगति को रोकता है इसलिए punrnava ka upyog कैंसर के इलाज में भी किया जाता है|

• बालों के लिए (punrnava for hair) –

अधिकतर बाल ज्यादा तनाव होने के कारण झड़ते है लेकिन पुनर्नवा की जड़ो या इसकी जड़ो से बने चूर्ण का सेवन करने से तनाव कम होता है क्योंकि इसके अन्दर तनाव को कम करने का गुण पाया जाता है|

• सर्दी-जुखाम और खांसी के लिए –

अगर बच्चों को जुकाम ,खांसी हो जाए तो पुनर्नवा के पत्तों का रस ,मिश्री और पीपल का चूर्ण मिलाकर उसकी गाढ़ी सी चाशनी बना ले और उसे दिन में दो या तीन बार चटाए| ऐसा करने से बच्चों को सर्दी-जुखाम और खांसी में आराम मिलेगा|

• मूत्ररोग के लिए –

अगर पेशाब में जलन ,पेशाब का रुक-रुक कर होना या किसी भी प्रकार का संक्रमण हो तो punrnava churna (जड़ का चूर्ण) को शहद के साथ मिलाकर दिन में 2 या 3 बार सेवन करने से आराम मिलता है|

• स्तनों के फोड़े के लिए –

स्तनों में फोड़ा या फुंसी होने पर पुनर्नवा की जड़ को छाछ के साथ पीसकर उसका लेप लगाए तो वह ठीक हो जायेगा|

• विष विकार के लिए –

पुनर्नवा के पत्ते ,जड़ व बीज का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से शरीर में चढ़ा हुआ जहर उतर जाता है|

• उदररोग के लिए –

पुनर्नवा की जड़ का गोमूत्र के साथ सेवन करने से सभी प्रकार के उदररोग ठीक हो जाते है|

• मुहं के छालों के लिए –

इसके लिए पुनर्नवा की जड़ को दूध में घिसकर उसका लेप छालों पर लगाए तो छाले ठीक हो जायेंगे|

इसके अलावा ,अस्थमा ,गठिया रोग ,सूजन ,पीलिया रोग ,डायबिटीज ,जलोदर ,कुष्ठरोग ,वीर्य विकार ,खून की कमी आदि बीमारियों में इसका सेवन करना फायदेमंद है|

पुनर्नवा जड़ी-बूटी (Punarnava jadi-buti) के नुकसान –

अपने punarnava jadi-buti ke baare mein यह तो जान लिया कि इसके कितने फायदे होते है| लेकिन क्या आप जानते है कि इसके कुछ नुकसान भी है जैसे –

• गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए|
• हाई बल्ड-प्रेशर वाले लोगों को इसके सेवन से बचना चाहिए|
• गुर्दे की बीमारी वाले लोगों को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए|
• खाली पेट सेवन करने से पेट में जलन होने लगती है|
• 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए|

तो आप लोगों ने देखा punrnava jadi-buti हमें कितने सारे रोगों से बचाती है| केवल हमें इसका सेवन करते समय एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि इसका सेवन उचित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह लेकर ही करे|