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जैसा कि हम जानते है ,हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है|  जहाँ ज्यादातर लोग खेती करके अपनी आजीविका चलाते हैं। लेकिन किसान जितनी मेहनत करते हैं, उन्हें उतना मुनाफा नहीं मिलता है। क्योंकि पर्यावरण असंतुलित रहता है जैसे कभी बहुत बारिस होती है तो कभी कम बारिस होती हैं। जिसकी वजह से किसानों की फसल नष्ट हो जाती है। उनकी सालभर की मेहनत व्यर्थ हो जाती है| जिसके कारण वे कर्जे में चले जाते है| कई किसान तो कर्जे में इतने डूबे जाते है कि वे आत्महत्या तक कर लेते है| क्योंकि किसान बार-बार प्रकृति की मर को सह नहीं पाता  है और हार कर मौत को गले लगा लेता है|

जानिये पॉली हाउस लगाने की कीमत, कैसे करे पॉलीहाउस में खेती, कैसे पॉलीहाउस खेती सब्सिडी पाए , इन सबसे पहले जाने पॉलीहाउस के लाभ,

किसानों की इस दुर्दशा को सुधारने के लिए सरकार और कृषि विशेषज्ञों ने खेती करने के बहुत से आधुनिक तरीकों को खोज निकाला है| जो कम लागात में ज्यादा मुनाफा देती है और जिन पर प्रकृति के असंतुलन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है|

आज हम आपको एक इसी प्रकार की आधुनिक विधि के बारे में बताने जा रहे है जो कम लागात में ज्यादा मुनाफा देती है| उस विधि का नाम पॉली हाउस है| जो धीरे-धीरे हमारे देश में प्रचलित होती जा रही है| तो आइए जानते है कि पॉली हाउस क्या है? ,और इस विधि से खेती करने से किसानों को कैसे लाभ होता हो?

पॉली हाउस क्या है? What is a poly house?

पॉली हाउस का मतलब होता है ‘चादर या आवरण से ढका हुआ घर। जिस पर बाहरी मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। या दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि हल्के हरे रंग के जाल से ढके घर को पॉली हाउस कहा जाता है। हम पॉली हाउस को ग्रीन हाउस या नालीदार सुरंग भी कहते हैं।

पॉली हाउस विधि का उपयोग संरक्षित खेती के लिए किया जाता है क्योंकि इस विधि के द्वारा पर्यावरण की जलवायु को नियंत्रित करके किसी भी मौसम में कोई भी फसल उगाई जा सकती है| इसलिए आजकल बाजार में हर मौसम की सब्जी आसानी से मिल जाती है|

पॉली हाउस का निर्माण कैसे करे? How to build a poly house?

अगर आप भी पॉली हाउस विधि से खेती करना चाहते है तो इसके लिए पॉली हाउस स्थापित करना होता हैं| इसके लिए सरकार 50 प्रतिशत सब्सिडी भी देती है| और पॉली हाउस का निर्माण करने के लिए प्रशिक्षित कारीगरों को भी भेजती है जो आपके पॉली हाउस को फसल के अनुरूप निर्मित करते है| पॉली हाउस को स्थापित करने के लिए आपके पास कम से कम 1 एकड़ जमीन होनी चाहिए। पॉली हाउस बनाने के लिए लकड़ी, बांस या स्टील की छड़ की जरूरत होती है, क्योंकि पॉली हाउस का ढांचा उसके प्रतीक चिन्ह से बनाया जाता है। यह संरचना गुंबददार, गृहिणी या गुफा हो सकती है। इस संरचना को ढंकने के लिए 600 से 800 गज की मोटी पराबैंगनी प्रकाश प्रतिरोधी प्लास्टिक शीट की जरूरत होती है। यह शीट पारदर्शी होती है ताकि सूरज की रोशनी पॉली हाउस तक आसानी से पहुंच सके।

जिस जगह पर पॉली हाउस बनाया गया है, वहां जैविक खाद डालें, ताकि भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ाई जा सके। अब पॉली हाउस में पौधा रोपण के लिए क्यारी तैयार की जाती हैं। इन क्यारियों को इस तरह से तैयार किया जाता है ताकि सूरज की रोशनी और हवा आसानी से पौधों तक पहुंच सके। इसके अलावा क्यारियों के बीच इतना स्थान छोड़ा जाता है कि पौधों को आसानी से काटा जा सके।

इसके बाद पॉली हाउस की मिट्टी की 2 से 3 दिन तक सिचाई करते है ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे| फिर पॉली हाउस की क्यारियों में पौधा रोपण किया जाता हैं। इस प्रकार आप पॉली हाउस विधि से खेती कर सकते हैं।

आप अपनी लागात के हिसाब से सस्ते से सस्ता व मंहगे से महंगा पॉली हाउस का निर्माण कर सकते है|

पॉली हाउस लगाने के फायदे Advantages of installing poly house –

  • पॉली हाउस के माध्यम से कम लागात लगाकर अधिकतम लाभ कमा सकते हैं।
  • बिना मौसम के फल और सब्जियों की खेती पॉली हाउस में भी की जा सकती है।
  • बाहरी मौसम का इस खेती पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • भारत सरकार पॉली-हाउस धारकों को सब्सिडी भी देती है।
  • पॉली हाउस में जानवर भी फसल को नष्ट नहीं कर सकते।
  • इस विधि से खेती करके कम पानी में अधिक से अधिक फसल उगा सकते हैं।
  • इसमें फसल की सिचाई बार-बार नहीं करनी पड़ती है|
  • इसमें किसी भी मौसम की फसल को उगाया जा सकता है|
  • जिन जगहों पर परंपरागत खेती नहीं की जा सकती ,वहाँ पर पॉली हाउस विधि से खेती की जा सकती है|
  • जो लोग पॉली हाउस विधि से खेती करने का प्रशिक्षण लेते है वे लोग इससे सबसे अधिक मुनाफा कमाते है|
  • इसके द्वारा प्रशिक्षित युवकों को रोजगार के अवसर भी मिलते है|

पॉली हाउस का रख-रखाव कैसे करे? How to maintain poly house? –

पॉली हाउस को लगाने के बाद इसकी देख-रेख करना बहुत जरुरी होता है ताकि यह अधिक समय तक चल सके| तो आइए जानते है कि इसका रख-रखाव कैसे करना चाहिए?

  • पॉली हाउस के अगर नट-बुल्ट ढीले हो जाये तो उन्हें तुरंत कस देना चाहिए|
  • इस पर चढ़ाये गये आवरण की साफ-सफाई नियमित रूप से करते रहना ताकि अन्दर सूर्य की किरणों की रोशनी बराबर पड़ती रहे|
  • पॉली हाउस के आवरण को तीन साल के अंतराल में बदल देना चाहिए|
  • पॉली हाउस में इस्तमाल किये गये उपकरणों की समय समय पर मरम्मत करवाते रहना चाहिए|
  • पॉली हाउस का दरवाजा आसानी से खुलना व बंद होना चाहिए|
  • पॉली हाउस का बीमा जरुर करवाना चाहिए|

तो आप लोगों ने देखा कि पॉली हाउस के माध्यम से खेती करना कितना आसान और फायदेमंद है। इसलिए, हमारे देश के किसानों से अनुरोध है कि वे इस आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करें, ताकि हमारे देश का किसान उन्नति कर सके और उसे कर्ज व गरीबी से मुक्ति मिल सके|

 

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