नाग पंचमी का त्यौहार हर साल बड़ी श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाया जाता है| इस दिन सभी लोग नाग देवता के दर्शन करके उनकी पूजा करते है| उन्हें दूध पिलाते है| नाग पंचमी के दिन सपेरे गली-गली में सांप लेकर घूमते है| इस दिन सपेरों की अच्छी कमाई हो जाती है क्योंकि जिस गली से भी सपेरे निकलते है ,वहाँ पर लोग सांप के दर्शन करके पैसे चढ़ाते है|

लेकिन आपने कभी ये सोचा है कि आखिर नाग पंचमी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है| इसे मनाने के पीछे क्या वजह है| तो चलिए आज हम जानते है ,नाग पंचमी कब ,कैसे और क्यों मनाई जाती है|

कब आती है नाग पंचमी ?

नाग पंचमी का त्यौहार हर साल श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को आता है| इस दिन नाग देवता की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है| कहा जाता है कि इस दिन जो भी भक्त सच्चे मन से नाग देवता की पूजा करता है ,उन्हें दूध पिलाता है तो उसकी सभी मनोकामनाये पूरी हो जाती है| भगवान भोलेनाथ की भी उन पर विशेष कृपा होती है|

नाग पंचमी कितने तारीख को है या नाग पंचमी कब है 2020 में

Saturday, 25 July, Naga Panchami 2020


Nag Panchami क्यों मनाते हैं बताइए? –

नाग पंचमी मनाने के पीछे हम अलग-अलग लोगों से अलग-अलग कथाए सुनते है| लेकिन इसे मनाने के पीछे जो पौराणिक कथा है| वह इस प्रकार है-

नाग पंचमी Story –

प्राचीनकाल में एक सेठजी थे| जिनके सात  पुत्र थे| सातों पुत्रों के विवाह हो गये थे| सेठजी के सबसे छोटे पुत्र की पत्नी के कोई भाई नहीं था| जिस कारण वह बहुत दुखी रहती थी|

एक दिन सेठजी की बड़ी बहू ने सभी बहुओं से कहाँ- ‘चलो घर लीपने के लिए मिट्टी लेकर आते है|’ तो सभी मिट्टी लेने के लिए गई|

जब सभी मिट्टी खोद रही थी ,तभी मिट्टी में से एक सर्प निकला जिसे देखकर सभी डर गई| जब बड़ी बहू ने खुरपी से सर्प को मरना चाहा तो सबसे छोटी बहू ने ऐसा करने से उसे रोका| कहाँ – दीदी इसे मत मरो ,यह विचारा एक बेजुबान जानवर है|

तो बड़ी बहू ने उसे छोड़ दिया और वह सर्प एक ओर जाकर बैठ गया| तो छोटी बहू ने कहाँ- ‘तुम यही पर बैठे रहना , मैं थोड़ी देर में आती हूँ|’ इतना कहकर छोटी बहू वहाँ से मिट्टी लेकर चली जाती है और वह सर्प से किया हुआ वादा भूल जाती है| जब दुसरे दिन उसे याद आता है कि मैं उस सर्प को वहाँ बैठाकर आई हूँ ,तो वह उससे मिलने के लिए जाती है|

वहाँ जाकर वह देखती है कि सर्प अब भी वही पर बैठा है ,तो वह सर्प से क्षमा मांगती है कि भईया मुझे माफ कर देना| मैं आपको आने का बोलकर गई थी और आना भूल गई|

तो सर्प बोला – तुमने मुझे भईया बोला और मेरी जान बचाई, इसलिए मै क्षमा करता हूँ नही तो मैं तुम्हे डस लेता| सर्प छोटी बहू का विनम्र स्वभाव देखकर बहुत प्रसन्न होता है ,और कहता है कि मांगो तुम्हे क्या चाहिए|

तो छोटी बहू कहती है कि मेरा कोई भाई नहीं है क्या आप मेरे भाई बनोगे|

तो सर्प कहता है कि आज से मैं तुम्हारा भाई और तुम मेरी बहन हो| ऐसा बोलकर सर्प वहाँ से चला जाता है|

कुछ समय बाद वही सर्प इंसान का रूप धारण करके ,उस सेठजी के घर छोटी बहू से मिलने के लिए आता है| वहाँ आकर कहता है कि मेरी बहन को भेज दो ,मैं उसे लेने आया हूँ| तो घर वाले हैरान हो जाते है कि इसका तो कोई भाई नहीं था ,तो फिर ये कौन है? तो सर्प कहता है – मैं उसका दूर का भाई हूँ ,आप लोग मुझे जानते नहीं है, लेकिन मेरी बहन जानती है ,उसे बुलाओं|

छोटी बहू जब आती है तो वह बोलता है कि मै वही सर्प हूँ जिसे तुमने भईया बनाया है| मैं तुम्हे अपने घर ले जाने आया हूँ| तो छोटी बहू उसके साथ खुशी-खुशी चली जाती है|

जब वह सर्प के घर पहुँचती है ,तो उसके धन-एश्वर्य को देखकर आश्चर्य चकित हो जाती है| लेकिन बहुत खुश होती है कि मेरा भाई कितना धनवान है| वह अपने भाई के घर कुछ दिन खुशी से व्यतीत करती है|

जब वह अपने ससुराल वापस जाती है तो वह सर्प उसे बहुत सारे धन व आभूषण के साथ उसे बिदा करता है| छोटी बहू के घर वाले जब इतना सारा धन देखते है तो उनके मन में लालच आ जाता है|

वे बहू से कहते है कि अपने भाई के घर से ओर अधिक धन लेकर आती| यह बात सर्प सुन लेता है तो वह अपनी बहन के घर ओर धन व आभूषण पहुँच देता है| सर्प छोटी बहू को एक बहुत ही अद्भुत हीरा-मणि का हार देता है| जिसकी प्रशंसा हर कोई करता है|

जब इस बात की खबर उस राज्य की रानी को होती है तो वे राजा से उस हार को लाने के लिए कहती है| रानी के कहने पर राजा अपने सैनिकों को सेठजी के यहाँ से उस हार को लाने के लिए कहता है|

जब सेठजी राजा के सैनिकों को देखते है तो डर के मारे वह हार दे देते है| लेकिन छोटी बहू अपने भाई को यह बात बता देती है| वह अपने सर्प भाई से कहती है कि आप कुछ ऐसा करो कि वह हार मेरे अलावा ओर कोई पहने तो वह सर्प बन जाये| तो सर्प ऐसा ही करता है|

जब इस हार को वह रानी पहनती है तो वह सर्पों का हार बन जाता है| इसे देखकर रानी डर जाती है और राजा के पास जाकर बताती है| तो राजा सेठजी की छोटी बहू को बुलाते है और कहते है बताओं तुमने क्या जादू किया है| यह हार सर्प कैसे बन जाता है|

तो छोटी बहू कहती है कि यह हार ऐसा ही है| इसे मेरे अलावा कोई ओर पहनता है तो यह सर्प बन जाता है| राजा को उसकी बात पर भरोसा नहीं हुआ ,और उसने कहा –तुम इसे मेरे सामने पहनकर दिखाओ ,ऐसा कैसे हो सकता है| जब छोटी बहू इस को पहनती है तो वह वापस हीरा-मणि का हार बन जाता है| यह देखकर राजा उस हार को वापस दे देता है| छोटी बहू उसे खुशी-खुशी घर लेकर आती है|

छोटी बहू की धन-संपत्ति को देखकर बड़ी बहू को जलन होती है और वह छोटी बहू के पति के मन में गलत बाते डाल देती है| तो उसका पति उससे गुस्से में कहता है कि बताओं ये धन तुम्हे किसने दिया है ,तुम्हारा तो कोई भाई नहीं था फिर यह कौन है?

अपने पति की संदेहजनक बाते सुनकर छोटी बहू बहुत दुखी होती है और अपने भाई को बुलाती है| तो सर्प अपनी बहन की पुकार सुनकर घर वालों के सामने प्रकट होता है|

सर्प कहता है -कि यह मेरी धर्म बहन है| अगर किसी ने मेरी बहन के चरित्र पर संदेह किया तो मैं उसे दंड दूंगा| यह सुनकर उसका पति बहुत खुश हुआ और उसने सर्प देवता का बहुत ही आदर-सत्कार किया|

कहा जाता है कि उसी दिन से नाग पंचमी का त्यौहार मनाया जाने लगा है| तभी से इस दिन लोग नाग देवता की पुरे विधिविधान के साथ पूजा करते है|

Nag Panchami कैसे होती है? कैसे करे Pooja –

नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करे| उसके बाद अपने घर के बाहर दरवाजे के दोनों तरफ नाग देवता ही प्रतिमा बनाए| प्रतिमा में दरवाजे के दोनों तरफ 5-5 सर्प बनाने चाहिए| यह प्रतिमा हम घी से या फिर काले या सफेद रंग से बना सकते है|

उसके बाद अपने घर में नाग देवता को भोग लगाने के लिए सेवई की खीर बनाए| पहले नाग देव की प्रतिमा की धूप ,हल्दी-कुमकुम से पूजा करनी चाहिए| उसके बाद खीर का भोग चढ़ाना चाहिए|

इस दिन आप चाहे तो एक ब्राह्मण को भोजन करके उसे दक्षिणा भी दे सकते है| ऐसा करने से बहुत पूण्य मिलता है|

Nag Panchami का Mahatv क्या है? पर्व से जुड़ी मान्यताएं  –

  • लोगों का यह मानना है कि इस दिन चावल की खीर नहीं बनाना चाहिए क्योंकि चावल सर्प के दांत होते है और तवा नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि वह सर्प की पीठ होती है| इसलिए इस दिन पका भोजन ही बनाया जाता है| इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो कोई नहीं जानता लेकिन हम पीढ़ी दर पीढ़ी ऐसे ही नाग पंचमी का पर्व मानते आ रहे है|
  • इस दिन लोग नाग देवता को दूध भी पिलाते है क्योंकि दूध पिलाने से नाग देवता अधिक प्रसन्न होते है| लेकिन इस बात को हमारा साइंस मिथ्या बताता है| उसके अनुसार सांप दूध नहीं पीते है क्योंकि सांप की दूध पीने से मृत्यु हो सकती है|
  • एक मान्यता यह भी है कि अगर किसी व्यक्ति के घर में किसी सदस्य की सांप के काटने से मृत्यु हो जाये तो उस व्यक्ति को एक साल तक पंचमी का व्रत करना चाहिए| ऐसा करने से उस व्यक्ति के घर में सांप का भय नहीं होता है|