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मुलेठी के नाम से तो आप सब परिचित ही होंगे| इसका उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है| यह एक प्रकार की सुखी लकड़ी होती है| और इसका स्वाद मीठा होता है| मुलेठी के अन्दर बहुत सारे आयुर्वेदिक गुण होते है इसलिए इसका उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है| मुलेठी के एक गुण के बारे में तो सभी जानते है कि ये गले की खराश को दूर करती है तथा खांसी में भी आराम देती है| लेकिन हम आपकी जानकारी के लिए बता दे कि मुलेठी में केवल यही गुण नहीं होता है ,इनके अलावा भी इसमें बहुत सारे गुण होते है| तो आज हम आपको इस लेख के माध्यम से मुलेठी व उसके आयुर्वेदिक गुण तथा उसके दोषों के बारे में बताने जा रहे है|

मुलेठी के पौधे की बनावट –

मुलेठी का पौधा 1 या 2 मीटर लम्बा झाड़ीनुमा होता है| इसकी पत्तियाँ सयुंक्त ,अंडाकार व आगे से नुकीली होती है| इसके फूल हल्के गुलाबी रंग के होते है| तथा इसमें फलियाँ लगती है जो कि चपटी व दबी होती है और इसके अंदर ही बीज होते है| इसकी जड़े लंबी ,गोल तथा भूमिगत होती है| इसकी जड़ो व भूमिगत तनों से कई शाखाएं निकली होती है| मुलेठी की जड़ व तनों को ही सुखाकर औषधि के रूप में उपयोग करते है|

मुलेठी के फायदे व चमत्कारिक औषधीय प्रयोग और नुकसान - Mulethi Benefits

मुलेठी में उपस्थित तत्व –

ग्लाइकोसाइड, कुमेरिन, अम्बलीफीरोन, लिक्विरीस्ट्रोसाइड्स, आइसोलिक्विरीस्ट्रोसाइड, ग्लुकोज, सुक्रोज़, रेसिन, स्टार्च, उड़नशील तेल प्रोटीन और रंजक आदि|

पैदावारी का स्थान –

जम्मू-कश्मीर, सहारनपुर, देहरादून, हिमालय के तराई वाले खुश्क भागों में, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, इन्दौर (म.प्र.), कर्नाटक, फारस की खाड़ी प्रधानत: स्पेन, ईरान, साइबेरिय आदि|

मुलेठी के विभिन्न नाम –

मधुयष्ट, यष्टिमधु, मुलहठी, जयेष्ठमधु, यष्टिमधु, किलोरिस रूट, ग्लिसराइज़ा ग्लेब्रा आदि|

मुलेठी से होने वाले फायदे –

  • मुलेठी की लकड़ी को चूसने से गले की खराश ठीक हो जाती है|
  • अगर सुखी खांसी आ रही हो तो मुलेठी का सेवन करे ,जिससे खांसी ठीक हो जाएगी|
  • अधिक मुंह सूखने पर मुलेठी की लकड़ी को बार-बार चूसे क्योंकि इसमें 50 प्रतिशत जल होता है जो कि प्यास को शांत करती है|
  • गले में सूजन होने पर भी इसका सेवन करना चाहिए|
  • अधिक हिचकी आने पर मुलेठी के चूर्ण को शहद के साथ खाने से हिचकी बंद हो जाती है|
  • आंतो की टीबी के लिए भी मुलेठी बहुत फायदेमंद है|
  • खुनी उल्टी होने पर दूध के साथ मुलेठी के चूर्ण का सेवन करे तो उल्टी बंद हो जाती है|
  • अगर मुंह व पेट में छले हो जाये तो मुलेठी के चूर्ण या जड़ का सेवन करना चाहिए|
  • मुलेठी नेत्र के विकारों को भी दूर करती है|
  • पेट दर्द होने पर मुलेठी के चूर्ण को शहद के साथ दिन में 2-3 बार ले तो आराम मिलता है|
  • मुलेठी बलवर्धन हेतु भी फायदेमंद होती है|
  • हाथ-पैर में जलन पड़ने पर मुलेठी की जड़ व चंदन का लेप लगाने से आराम मिलता है|
  • मुलेठी की जड़ें पेट और पाचन समस्याओं को दूर करती है|
  • मुलेठी की जड़ों का रस लिम्फोसाइट्स और मैक्रोफेज के उत्पादन में वृद्धि करने में मदद करता है जिससे आपकी रक्षा तंत्रिका में सुधार होता है|
  • मुलेठी शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेटिंग गुण के कारण पेट, आंत और मुंह के अल्सर के इलाज के लिए सबसे अच्छी प्राकृतिक औषधि है|
  • मुलेठी की जड़ें वायरस, बैक्टीरिया और कवक से हमारे शरीर की रक्षा करती है, क्योंकि वह ग्लिसराहिजिन की मौजूदगी के कारण माइक्रोबियल वृद्धि को रोकती हैं|
  • मुलेठी का सेवन करने से स्मरण शक्ति भी तेज होती है|

मुलेठी से होने वाले नुकसान –

  • जो लोग हाइपोथायरायडिज्म सेग्रस्त है उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए|
  • जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह, एस्ट्रोजेन-संवेदनशील विकार, गुर्दा, हृदयरोग की बीमारी है उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए|
  • उचित मात्रा में ही इसका उपयोग किया जाना चाहिए, नहीं तो फाइब्रोसिस्टिक स्तन, स्तन कैंसर या गर्भाशय कैंसर, क्रोनिक थकान, सिरदर्द, सूजन, एडिमा, छद्म डोल्दोनिस्म, श्वास की कमी, जोड़ों की कठोरता जैसी बीमारियों के शिकार हो सकते है|
  • ज्यादा लंबे समय तक भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए|

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