महाशिवरात्रि हिन्दूओं का प्रमुख्य त्यौहार है जो कि बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है| इस दिन सभी शिवालयों में शिव भक्तों की लंबी सी कतारें लगी होती है और चारों ओर बम-बम भोले के स्वर गूंजते है ,जैसे पूरी प्रकृति शिव की भक्ति के रंग में डूब गई हो|

इस दिन भगवान शिव का दूध और गंगाजल से अभिषेक करके बेलपत्र ,बेर ,धतूरा और भांग चढ़ाई जाती है| जो भी इस दिन व्रत करता है उस पर भगवान शिव अपनी कृपा दृष्टि बरसाते है और उसे मोक्ष की प्राप्ति भी होती है| इस व्रत को रखने वाले मनुष्य की सभी मनोकामनाये पूरी होती है|

कहते है जो भी मनुष्य इस व्रत को रखता है उसे इस दिन रात्रि जागरण करके चारों पहर की पूजा करनी चाहिए| क्योंकि इस दिन शास्त्रों में चार पहर की पूजा का विधान है , तभी इस व्रत का पूरा फल मिलता है और आपका व्रत सही मायने में पूरा होता है| लेकिन बहुत से लोग केवल दिन भर उपवास रखकर शाम को आरती करके फलाहार करके सो जाते है| वे रात्रि का जागरण नहीं करते है| क्योंकि उन्हें रात्रि के जागरण का महत्व पता नहीं होता है|

तो चलिए आज हम आपको इस लेख के माध्यम से यह बताते है कि महाशिवरात्रि का जागरण क्यों करते है? इसका महत्व क्या है?

Maha Shivratri का Jagran कब है?

लेकिन इससे पहले आपको यह बता देते है कि इस बार महाशिवरात्रि का त्यौहार 21 फरवरी 2020 को शुक्रवार के दिन मनाया जा रहा है| हर साल यह त्यौहार फागुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है| महाशिवरात्रि के दिन शिव भगवान और माता पार्वती का विवाह (Parvati Vivah) हुआ था|

MahaShivratri Jagran Bhajan कीर्तन कब और क्यों करना चाहिए?

इस दिन शिव व पार्वती का विवाह हुआ था| जैसे हमारे घर में जब विवाह होता है तब उस दिन घर के सभी लोग रातभर जागते है ठीक उसी प्रकार शिव व पर्वती के विवाह में भी हमें रातभर जागना चाहिए|

मान्यता तो यह भी है कि इस दिन रात्रि को शिव-पार्वती विचरण करने के लिए निकलते है| इसलिए लोग उनके दर्शन पाने की अभिलाषा में रातभर जागते है|

मान्यता तो यह भी है कि भगवान शिव ज्योर्तिलिंग के रूप में रात्रि में ही प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना गया है|

लेकिन कहते है जब सभी प्राणी अचेत होकर सो जाते है तब संयमी जागकर अपने कार्य को पूरा करता है क्योंकि साधना व सिध्दि के लिए रात्रि का समय सबसे अनुकूल होता है| भगवान शिव एक सन्यासी है इसलिए उन्हें रात्रि अधिक प्रिय है| जब कोई भक्त रात्रि के समय उनकी पूजा करता है तो वे अधिक प्रसन्न होते है| यही कारण है कि भगवान शिव की पूजा प्रदोषकाल में भी की जाती है|

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इसलिए दोस्तों आप जब भी महाशिवरात्रि का व्रत रखे तो रात्रि जागरण करके चारों पहर की पूजा जरुर करे| ताकि आपको इस व्रत का पूरा फल मिल सके और भगवान भोलेनाथ की आप पर विशेष कृपा हो|