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Know India’s first train female driver: Surekha Yadav

आज हम जिस महिला के बारे में आपको बताने जा रहे है ,उस महिला का नाम सुरेखा यादव है| यह भारत की पहली रेलगाड़ी चालक महिला है| जिन्होंने रेलगाड़ी को चलाकर यह बता दिया कि एक महिला चाहे तो कुछ भी कर सकती है| केवल उसके अन्दर उस काम को करने की मजबूत इच्छाशक्ति होनी चाहिए|

Know About India’s first female Train Loco Pilot.
Surekha Shankar Yadav (born 2 September 1965) is a India’s first female Train loco pilot (train driver) of the Indian Railways in India,. Surekha Yadav became India’s first female train driver in 1988.

सुरेखा यादव का जन्म 2 सितंबर 1965 में सतारा (महाराष्ट्र) में हुआ था| उनके पिता का नाम रामचंद्र भोंसले और माता का नाम सोनाबाई था| सुरेखा अपने सभी भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं| उन्होंने अपनी प्रारम्भिक पढाई कान्वेंट स्कूल से की| इसके बाद उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया|

सुरेखा गणित से बीएससी व बीएड करके एक शिक्षक बनना चाहती थी| परन्तु रेलवे में असिसटेंट ड्राईवर में खाली पदों पर भर्ती निकली ,और उन्होंने इसमें आवेदन डाल दिया| क्योंकि सुरेखा ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था इसलिए वे इस भर्ती के योग्य थी| तथा वे इस भर्ती की परीक्षा की तैयारी करने लगी|

जब सुरेखा इस भर्ती की परीक्षा देने पहुची तो उन्होंने देखा कि परीक्षा देने केवल लड़के ही आये थे उसमे कोई लड़की नहीं थी| क्योंकि इस क्षेत्र में केवल लड़के ही नौकरी करते थे| लेकिन यह सब देखकर भी वे पीछे नहीं हटी और उन्होंने परीक्षा दी|

परीक्षा देने के बाद सुरेखा इस परीक्षा में पास हो गई और इसके बाद साक्षात्कार की परीक्षा में भी वे पास हो गई| जिसके बाद उन्हें असिसटेंट ड्राईवर की ट्रेनिंग के लिए भेज दिया गया| लेकिन उनके शिक्षक बनने का सपना अधुरा ही रह गया| उनकी यह ट्रेनिंग 6 महीने तक कल्याण ट्रेनिंग स्कूल में चली| ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें 1988  में असिसटेंट ड्राईवर के पद पर नियुक्त कर दिया गया| इस प्रकार सुरेखा भारत की पहली महिला रेलगाड़ी चालक बन  गई| सुरेखा ने पहली बार देवियो स्पेशल स्थानीय ट्रेन को चलाया था|

सुरेखा ने 1990 में महाराष्ट्र पुलिस निरीक्षक शंकर यादव से शादी कर ली| सुरेखा को 1998 में माल गाड़ी का ड्राइवर बना दिया गया| इसके बाद सुरेखा ने कभी भी पीछे पलटकर नहीं देखा| वे एक के बाद एक सफलता हासिल करती ही चली गई| उनके लिए सबसे सुनहरा दिन वो था जब 2011 में महिला दिवस के दिन उन्हें एशिया की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर की उपाधि मिली ,इसके साथ ही वे न केवल भारत की बल्कि एशिया की पहली महिला रेलगाड़ी चालक बन गई|

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