जरूर जानिये भारत की 10 मार्शल आर्ट्स कलाएँ – Know Indian Martial Arts

जरूर जानिये भारत की 10 मार्शल आर्ट्स कलाएँ – Know Indian Martial Arts

भारत का इतिहास बहुत ही पुराना और विविधिताओं से भरा है, भारत दुनिया को सीखने और सीखने की कलाये प्रदान करता है. ऐसे ही भारत में कुछ महान कलाएं है जिन्हे जानकार आज भी लोग अपने दांतो तले उंगलिया दवा लेते है. आज हम बात करेंगे मार्शल आर्ट्स के बारे में जो भारत में प्राचीन काल से इस्तेमाल होता रहा है. मार्शल आर्ट्स व्यक्ति को आत्म रक्षा के साथ साथ जीवन सयम और नियम सीखाता है. आजकल इन कला रूपों का उपयोग आत्मरक्षा के रूप में अनुष्ठानों, समारोहों, खेलों में, शारीरिक फिटनेस के साधनों में किया जाता है, लेकिन पहले इसका इस्तेमाल युद्ध के लिए किया जाता है। कई कलाएं नृत्य, योग आदि से संबंधित हैं।

चलिए जानते है आज भारत के प्राचीन मार्शल आर्ट्स के बारे में.

1. कलरीपायट्टु (कलारी) मार्शल आर्ट्स (Kalaripayattu Martial Art):

ये कला या मार्शल आर्ट्स भारत के सबसे प्राचीन मार्शल आर्ट्स माना जाता है जिसकी उत्पति दक्षिणी भारत के केरल राज्य में चौथी शताब्दी में मानी जाती है. ये केरल में और तमिलनाडु व कर्नाटक[ से सटे भागों में साथ ही पूर्वोत्तर श्रीलंका और मलेशिया के मलयाली समुदाय के बीच ज्यादा प्रचलित है इस मार्शल आर्ट्स का अभ्यास मुख्य रूप से केरल की योद्धा जातियों जैसे नायर, एज्हावा द्वारा, किया जाता था

कलारीपयट्टू की तकनीक और पहलू:
कलारी पयट में हमले, पैर से मारना, मल्लयुद्ध, पूर्व निर्धारित तरीके, हथियारों के जखीरें, शरीर के व्यायाम, पुलियांकम या तलवार की लड़ाई, वरुमकई या नंगे हाथों की लड़ाई और उपचार के तरीके शामिल हैं

पुराने समय में :
कलारीपयट्टु को एक पौराणिक कथा, ऋषि परशुराम द्वारा मार्शल आर्ट के रूप में पेश किया गया था, जिन्होंने मंदिरों का निर्माण किया था। इस कला का उपयोग निहत्थे आत्मरक्षा के साधन के रूप में किया जाता है और आज शारीरिक दक्षता प्राप्त करने का एक तरीका है। महिलाओं ने भी इस कला का अभ्यास किया, अन्नियार्चा; एक महान नायिका ने इस मार्शल आर्ट का उपयोग करके कई युद्ध जीते।

आज के समय :
पारंपरिक अनुष्ठानों और समारोहों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

2. सिलंबम मार्शल आर्ट्स (Silambam Martial Art)

सिलंबम भारत का प्राचीन मार्शल आर्ट है, जो विशेष रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में तमिलनाडु से आता है, जहाँ इसकी उत्पत्ति लगभग 1000 ईसा पूर्व हुई थी, इस प्राचीन लड़ाई शैली का उल्लेख तमिल संगम साहित्य 400 BCE में किया गया है
सिलंबम की तकनीक और पहलू:
तमिलनाडु में, एक आधुनिक और वैज्ञानिक मार्शल आर्ट।

पुराने समय में :
भगवान मुरुगा (तमिल पौराणिक कथाओं में) और ऋषि अगस्त्य को सिलंबम के निर्माण का श्रेय दिया जाता है। वैदिक युग में भी, युवकों को संस्कार के रूप में और आपातकाल के लिए प्रशिक्षण दिया गया था

आज के समय :
इस कला ने मलेशिया की यात्रा भी की, जहाँ यह एक आत्मरक्षा तकनीक के अलावा एक प्रसिद्ध खेल है। मॉक फाइटिंग और सेल्फ डिफेंस के लिए लॉन्ग-स्टाफ तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

3. ह्येन लैंग्लोन मार्शल आर्ट्स [Thang Ta and Sarit Sarak (Huyen langlon)]

ह्येन लैंग्लोन मणिपुर की एक भारतीय मार्शल आर्ट है। मेइती भाषा में, हुयेन का अर्थ युद्ध है जबकि लैंग्लोन या लैंगलोंग का अर्थ नेट, ज्ञान या कला हो सकता है। Huyen langlon में दो मुख्य घटक होते हैं: thang-ta (सशस्त्र मुकाबला) और Sarit Sarak सरित सारक (निहत्थे लड़ना)। यह कला मणिपुर के मेइती लोगों द्वारा बनाई गई थी।
यह 3 अलग-अलग तरीकों से अभ्यास किया जाता है: सबसे पहले, तांत्रिक प्रथाओं के साथ जुड़ा हुआ प्रकृति में कर्मकांड, दूसरा, तलवार और तलवार के नृत्य का मंत्रमुग्ध प्रदर्शन और तीसरा, लड़ाई की वास्तविक तकनीक है।

पुराने समय में :
17 वीं शताब्दी में इस कला का उपयोग ब्रिटिशों के खिलाफ मणिपुरी राजाओं द्वारा किया गया था जब अंग्रेजों ने इस तकनीक पर प्रतिबंध लगा दिया था।

आज के समय :
थांग-ता को हुइनलॉन्ग के रूप में भी जाना जाता है, जो एक लोकप्रिय प्राचीन मार्शल आर्ट है जो कुल्हाड़ी और एक ढाल सहित अन्य हथियारों का उपयोग करता है।

4. थोदा मार्शल आर्ट्स (Thoda Martial Art)

थोडा, हिमाचल प्रदेश का प्रभावशाली मार्शल आर्ट रूप है। इस मार्शल आर्ट की उत्पत्ति कुल्लू से है। थोडा, यह नाम व्युत्पन्न है, लकड़ी के गोल टुकड़े से लेकर तीर के सिर तक, जिसका उपयोग इसकी घायल क्षमता को कुंद करने के लिए किया जाता है।

पुराने समय में :
थोडा, तीरंदाजी पर निर्भर करता है, महाभारत के दिनों में, जब पांडवों और कौरवों के समय आज्ञातवास के दौरान, कुल्लू और मनाली के सुरम्य घाटियों में रहते हुए धनुष और तीर का इस्तेमाल किया गया था।

आज के समय :
वर्तमान में, खेल एक चिह्नित क्षेत्र में खेला जाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि थोदा में अनुशासन का एक निश्चित स्तर बनाए रखे जा सके, यह कला, संस्कृति और खेल का एक सुखद मिश्रण है। यह खेल ठियोग डिवीजन (शिमला जिला), नारकंडा ब्लॉक, चौपाल डिवीजन, जिला सिरमौर और सोलन में लोकप्रिय है

5. गतका मार्शल आर्ट्स (Gatka Martial Art)

गतका एक भारतीय मार्शल आर्ट का नाम है जो पंजाब क्षेत्र के सिखों से जुड़ा है, और तानोली और गुर्जर समुदायों के साथ जो उत्तरी पाकिस्तान के पहाड़ी क्षेत्रों में रहते हैं, जो मार्शल आर्ट के शुरुआती संस्करण का अभ्यास करते हैं। यह छड़ी की लड़ाई की एक शैली है, जिसमें लकड़ी की छड़ें होती हैं, जो तलवारों का अनुकरण करने के लिए होती हैं. यह कला किरपान, तलवार और कटार जैसे हथियारों का उपयोग करती है।

पुराने समय में :
गतका का अर्थ होता है, जिसकी स्वतंत्रता अनुग्रह से है। दूसरों का कहना है कि ‘गतका’ संस्कृत शब्द ‘गदा’ से आता है जिसका अर्थ है गदा।

आज के समय :
यह मेले सहित राज्य में विभिन्न अवसरों, समारोहों में प्रदर्शित किया जाता है।

6. लाठी कला मार्शल आर्ट्स (Lathi Martial Art)

लाठी मार्शल आर्ट्स में इस्तेमाल होने वाले सबसे पुराने हथियारों में से एक है। यह कला आज भी उत्तरी भारत के गाँवो में देखी जाती है जहाँ के लोग अपने साथ हमेशा लाठी रखते है. लाठी वाँस की मजबूत लकड़ी से बनी होती है जिसे सरसो के तेल में डुबो कर रखकर तैयार किया जाता था. जिससे ये चिकनी और मजबूत हो जाती है.

पुराने समय में :
लाठी कला को बांग्ला देश में जन्मा जाना जाता है जो पहले भारत का अंग था.

आज के समय :
आज भी गांव में लोग लाठी युद्ध में भाग लेते है। पर ये कला अब गिने चुने लोगो तक ही सीमित है.

7. इन्बुआन : मिजोरम की मल्लयुद्ध कला (Inbuan Wrestling Martial Art)

इन्बुआन द्वन्द्व कला (inbuan wrestling) वास्तव में भारत के मिज़ोरम प्रदेश से जुड़ी एक प्राचीन द्वन्द्व कला है। ये कुश्ती या मल्लयुद्ध का ही एक रूप कही जा सकती है। इस कला का जन्म मिज़ोरम के ‘डुंगटलांग’ नामक गाँव में सन 1750 में हुआ था।

पुराने समय में :
मिज़ोरम के लोग बहुत मेहनती, साहसी और शिकार करने के शौक़ीन होते थे। उन्हें व्यायाम एवं शारीरिक बल को बनाये रखने का शौक बचपन से ही होता था। मिज़ोरम के युवा अक्सर इस प्रकार की कलाओं को सीखने के शौक़ीन होते थे। ऐसे ही समय में हुआ इस कला का जन्म 1750 में सनलैंड गांव में ।

आज के समय :
यह खेल 15-16 फ़ीट के व्यास के एक गोले में खेला जाता है। इस गोले में घास या कारपेट होता है। इसमें 2 प्रतिद्वंद्वी होते हैं। जिन्हें एक दूसरे को अपने दोनों हाथों से उठाना होता है। अपने प्रतिद्वंद्वी के पैरों की ज़मीन पर पकड़ ढीली करनी होती है। जो दूसरे को उठा लेता है वो विजेता मान लिया जाता है। इसके लिए उसे अपनी ताक़त, कुशलता और तेज़ी की ज़रुरत होती है। इसमें अपने हाथों पैरों का इस्तेमाल तो करना होता है लेकिन प्रहार नहीं कर सकते। मात्र एक दूसरे को ज़मीन से ऊपर उठाने की ही प्रतियोगिता होती है।

8. कुट्टू वारिसै मार्शल आर्ट्स  (Kuttu Varisai Martial Art)

यह कला पहली या दूसरी शताब्दी ई.पू. में संगम साहित्य में उल्लिखित थी। कुट्टू वारिसै का अर्थ है ‘खाली हाथ का मुकाबला’।
यह एक निहत्थे हाथो से आत्म रक्षा का मार्शल आर्ट है, जिसका उपयोग योग, व्यायाम शास्त्र, श्वास-प्रश्वास आदि के माध्यम से एथलेटिक्स और फुटवर्क को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इसमें सांप, चील, बाघ, हाथी और बंदर सहित पशु आधारित कलाओं का भी उपयोग किया जाता है।

पुराने समय में :
यह मुख्य रूप से दक्षिण भारत में प्रचलित है

आज के समय :
यह श्रीलंका और मलेशिया के उत्तर-पूर्वी भाग में भी लोकप्रिय है।

9. मुष्टि युद्ध मार्शल आर्ट्स (Musti Yuddha Martial Art)

इस कला को हिन्दू धर्म में चार श्रेणियों विभाजित किया गया। पहले को जम्बुवंती के रूप में जाना जाता है जो विरोधी को लॉकिंग और होल्डिंग के माध्यम से मजबूर करता है। दूसरी है हनुमंती, जो तकनीकी श्रेष्ठता के लिए है। तीसरा भीमसेनी को संदर्भित करता है, जो सरासर ताकत पर केंद्रित है और चौथे को जरासंधी कहा जाता है जो अंग को जोड़ने तोड़ने पर केंद्रित है।

पुराने समय में :
मुष्टि युद्ध का वर्णन महाभारत में भीम जरासंध युद्ध और भीम दुर्योधन युद्ध के समय मिलता है.

आज के समय :
मुष्टि युद्ध भारतीय उपमहाद्वीप से शुरू होने वाली मुक्केबाजी का पारंपरिक रूप है।

10. परी-खंड मार्शल आर्ट्स (Pari-Khanda Martial Art)

परी ‘का अर्थ ढाल है जबकि’ खंड ‘तलवार को संदर्भित करता है। इसलिए, इस कला में ढाल और तलवार दोनों का उपयोग किया जाता है। इसमें Sword और Shield का उपयोग करके लड़ाई करना शामिल है। इसके चरणों और तकनीकों का उपयोग बिहार के छऊ नृत्य में किया जाता है।

पुराने समय में :
परी-खंड राजपूतों द्वारा बनाया गया एक लड़ाई का रूप है

आज के समय :
परी-खंड Martial Art का उपयोग बिहार के छऊ नृत्य में किया जाता है।

 

जाने मार्शल आर्ट को लोकप्रिय किसने बनाया ? – Martial Arts

 

 

 

Sponsored Links

Sponsored

Subscribe Us

नयी और पुरानी जानकारियाँ अपनी ईमेल बॉक्स में पाए, अपनी ईमेल ID नीचे भरे.:

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.