वैसे तो हमारे देश में बहुत सी नृत्य शैली है| लेकिन आज हम आपको जिस नृत्य शैली के बारे में बताने जा रहे है| उसका नाम कथकली नृत्य शैली है| कथकली एक शास्त्रीय नृत्य शैली है जिसका मतलब होता है ‘नृत्य नाटिका’ अर्थात किसी भी नाटक या कहानी को प्रस्तुत करते हुए नृत्य करना| यह नृत्य शैली महाभारत ,रामायण व धार्मिक ग्रंथो पर आधारित है| यह नृत्य आमतौर पुरुषों के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है| लेकिन आजकल महिलाएं भी इस नृत्य शैली को प्रस्तुत करने लगी है|

कथकली शास्त्रीय नृत्य से संबंधित जानकारी –

कथकली केरल का बहुत ही प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य है| कहा जाता है कि 17वी शताब्दी में इस नृत्य शैली का जन्म हुआ था| यह भारत की बहुत ही प्राचीन नृत्य कला है| इस नृत्य कला से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी निम्नानुसार है –

  • इस नृत्य के माध्यम से अभिनय ,संगीत तथा नृत्य तीन कलाओं को प्रदर्शित किया जाता है|
  • इस नृत्य को प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति बोलता नहीं है| वह केवल चेहरे के भाव व हाथों की मुद्राओ से नृत्य को प्रस्तुत करता है|
  • यह नृत्य रात को प्रस्तुत किया जाता है जो कि सूरज के उगने के पहले तक चलता है|
  • इस नृत्य में 24 मुद्राओ को प्रस्तुत करते है|
  • इस नृत्य को प्रस्तुत करने वाला नर्तक विशेष तरह का परिधान व वेशभूषा धारण करता है|
  • कथकली में दो गायक होते है एक गाने के लिए व दूसरा उस गाने को दोहराने के लिए| गाने वाले को पोन्नानी और दोहराने वाले को शिंकिटी कहते है|
  • कथकली करने वाले नर्तक के चेहरे को हरे रंग से रंगा जाता है| और चेहरे का मेकअप भी बहुत विशेष तरह का होता है|
  • नर्तक का मुकुट बहुत ही आकर्षक व भारी होता है|
  • नर्तक सफेद रंग का लाल बोडर वाला स्कर्ट पहनता है जो गुब्बारे की तरह फुला हुआ होता है| इसके साथ लाल रंग का टॉप पहनता है|
  • इस नृत्य को प्रस्तुत करने वाला नर्तक अपने पैर के अंगूठे को नृत्य के दौरान जमीन पर नहीं रखता है|
  • इस नृत्य के गानों में मणिप्रवालम भाषा का प्रयोग किया जाता है|

कथकली नृत्य को प्रस्तुत करने वाले प्रसिद्ध कलाकार –

कृष्णन नायर ,गुरु गोपीनाथ ,टी चंदू पणिक्कर ,टी रामननी नायर ,एम विष्णु नम्बूदरी के चातुन्नी ,कलामंडलम शिवदास आदि|