आज हम आपको राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक गांव में स्थित करणी माता के मंदिर (Karni Mata Temple) में चूहे होने के रहस्य को बताने जा रहे है| इस मंदिर में हजारों की संख्या में काले व सफेद चूहे है| इनकी संख्या इतनी है कि वह पर जाने वाले भक्त अपने पैरों को उठाकर नहीं चल सकते है| उन्हें पैरों को घिसकर चलना पड़ता है| क्योंकि अगर वे पैर उठाकर चलेंगे तो चूहा उनके पैरों के नीचे आ जायेंगे ,जो कि अशुभ माना जाता है| इस मंदिर में चूहों को पूजा जाता है, उन्हें प्रसाद खिलाया जाता है और उनके झूठे प्रसाद को ही भक्तों को दिया जाता है| इसलिए इस मंदिर को ‘चूहों का मंदिर ‘ या ‘मूषक मंदिर’ भी कहते है| इस मंदिर में चूहों को ‘काबा’ कहकर बुलाते है| अगर किसी भक्त को मंदिर में सफेद चूहा दिख जाये तो ऐसा माना जाता है कि उसकी सभी मनोकामना पूरी हो जाएगी| क्योंकि इस मंदिर में सफेद चूहे बहुत कम दिखाई देते है|

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करणी माता जन्म कथा–

करणी माता का जन्म 1387 के समय मारवाड़ के सुवाप गांव में मेहाजी चारण के घर छठी बेटी के रूप में हुआ था| बचपन में उनका नाम रिध्दाबाई था| जब करणी माता किशोरावस्था में थी तो उन्होंने अपनी बुआ की टेढ़ी उंगली को स्पर्श करके सीधा कर दिया था ,तभी से उनकी बुआ ने उनका नाम करणी रख दिया|

करणी माता की शादी उनके पिता ने साठिका गांव के दीपोजी चारण से कराई| लेकिन उनका मन घर गृहस्थी में न होकर भक्ति में ज्यादा था ,इसलिए करणी माता ने अपने पति की शादी अपनी ही छोटी बहन गुलाब से करा दी| और वे अपनी ईष्ट देवी की पूजा करने लगी| करणी माता में बचपन से ही चमत्कारी शक्तियां थी जिससे वे जनकल्याण करती थी| इस कारण वे वहा के लोगों द्वारा कुल देवी के रूप में पूजी जाने लगी| उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक चमत्कार किये तथा 1538 में वे ज्योतिर्लिन हो गई| उनके जाने के बाद उनके भक्तों ने उनकी मूर्ति स्थापित की ,और उसकी पूजा करने लगे| इसके बाद उनके नाम से एक भव्य मंदिर बीकानेर के महाराज गंगा सिंह ने बनवाया जो आज करणी माता के मंदिर के नाम से जाना जाता है|

मंदिर में (Karni Mata Temple) चूहों का रहस्य –

करणी माता के मंदिर में अनगिनित चूहे होने के पीछे एक कथा है- करणी माता की बहन व उनके पति के चार पुत्र थे| जिन्हें करणी माता अपने पुत्रों के समान ही प्यार करती थी| ये चारों पुत्र करणी माता के साथ रहकर उनकी सेवा करते है| एक दिन चारों पुत्रों में से एक पुत्र सरोवर में डूब कर मर जाता है| जब इस बात का पता करणी माता को चलता है तो वे यमराज से अपने बेटे को जीवनदान देने की विनती करती है| लेकिन यमराज ऐसा करने से माना कर देते है ,परन्तु बाद में करणी माता की भक्ति के सामने विवश होकर वे उनके बेटे को चूहे के रूप में जीवित कर देते है| तभी से उस मंदिर में चूहे रहने लगे|

तभी से यह मान्यता है कि करणी माता के परिवार का अगर कोई भी सदस्य मरता है तो वह उस मंदिर में चूहे का जन्म लेकर पैदा होता है| इसलिए इन सभी चूहों को करणी माता के पुत्र कहते है|

करणी माता का चमत्कार –

आपने देखा होगा कि अगर हमारे घर में 8-10 चूहे हो जाये तो अजीब सी बदबू आने लगती है और चूहों की झूठी चीज खाने के कारण प्लेग जैसी बीमारी भी हो जाती है| लेकिन करणी माता के मंदिर में हजारों चूहे है फिर भी वहा पर बिल्कुल भी बदबू नहीं आती है| इस मंदिर में जो प्रसाद मिलता है वो पहले चूहों को खिलाया जाता है| उसके बाद चूहों का झूठा प्रसाद ही भक्तों को दिया जाता है| लेकिन आज तक एक भी भक्त या उस मंदिर में रहने वाले लोग बीमार नहीं हुए है| यह सब करणी माता की महिमा व चमत्कार का प्रभाव है|

इस मंदिर में चूहों के रहने के पीछे अनेक ओर भी कथाए प्रचलित है लेकिन फिर भी यह बात रहस्य बनी हुई है कि आखिर क्या वजह है जो इस मंदिर में इतने चूहे है| फिर भी यहाँ पर किसी प्रकार की बीमारी नहीं पनपती है| इसका पता आजतक कोई नहीं लगा पाया है| लोग इसे करणी माता का चमत्कार ही मानते है|

इस रहस्यमय मंदिर को देखने हजारों की संख्या में भक्त आते है| और करणी माता अपने भक्तों की सभी मनोकामनाये पूरी करती है|