भारत की प्रथम महिला रिकॉर्डिंग गायक (On Record Singer)- गौहर जान

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बिलकुल आज हम फिर से एक पहेली या एक पहले के अंतर्गत – एक ऐसी सख्स्यित से मिलवाले जा रहे है जो आपके ज्ञानकोष को तो बढेयेगा ही साथ ही साथ आपको 19वी शताव्दी के इतिहास की सैर भी कराएगा.

आज हम बात कर रहे है भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की पहेली मतलब प्रथम महिला रिकॉर्डिंग सिंगर गौहर जान के बारे में. जिन्हें समय के साथ साथ भारत की फिल्म या म्यूजिक इंडस्ट्री ने शायद ही कभी याद किया हो या वो जगह दी हो जहाँ उन्हें होना चाहिए था.
गौहर जान के बारे में जितना कहेंगे वो बहुत ही कम होगा. क्युकी ये ही भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार थी. या यु कहे की आज भी पहेली है और पहेली ही रहेगी. आप चाहे तो इनकी रिकार्डेड आवाज़ को इन्टरनेट से सुन सकते है. जिन्हें एक ग्रामोफ़ोन कंपनी ने पहली बार लांच किया था.

गौहर जान को अपने गायन एवं नृत्य दोनों योगदान के लिए जाना जाता है. गौहर जान रिकॉर्डिंग से पहले तवायफ के तौर पर अपने संगीत से लोगो को मन मोहित कर देती थी. लेकिन ये वो दौर था जब पुरानी रीति रिवाज़ अब एक नयी टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर लोगो का मनोरंजन या मन मोहने वाली थी. ग्रामोफोन से ही उन्होंने अपनी आवाज़ को एक शहर से निकालकर पूरे भारतवर्ष में पहुचाया.

सबसे पहले जानते है कौन थी गौहर जान?
गौहर जान जन्म आजमगढ़ में २६ जून 1873 को 19वी शताब्दी में हुआ था. वो आर्मीनियाई वंश से थी और उनके पिता का नाम विलियम रोवर्ट और उनकी माँ का नाम विक्टोरिया हेमिंग्स था. लेकिन गौहर जान जन्म से भारतीय थी, क्युकी उनका जन्म भारत में हुआ था और वो पहले यहूदी थी और उनका नाम अंजेलिना योवर्ड था. लेकिन बाद में आगे चलकर उनकी माँ ने इस्लाम धर्म अपना लिया. जिससे उनका नाम गौहर जान में बदल गया.

इतिहासकारों के अनुसार उनकी माँ (विलिअम और विक्ट्रोरिया) की शादी टूट गयी थी जिससे उनकी माँ के ऊपर मुसिवतो का पहाड़ टूट पड़ा. उसके बाद ही उनकी माँ की मुलाक़ात एक मुस्लिम “खुर्शीद” से हुयी जिसने इन्हें सहारा दिया और इनके संगीत और कला को आगे बढाने में मदद की. और फिर विक्टोरिया हेमिंग्स का नाम “मलका -इ-जान” और उनकी बेटी अंजेलिना से गौहर जान में बदल गयी.

गौहर जान ने ये कलाए (न्रत्य एवं गाना) कहा से सीखा?
समय के साथ साथ उनकी माँ के करियर और जीवन में अच्छे दिनों की आहट हुयी. जहाँ उन्होंने अपनी माँ के साथ गायन एवं न्रत्य कला को सीखा. ये कलाए उन्होंने बहुत ही महान गुरुयो और व्यक्तियों के द्वारा सीखी जिनमे है – रामपुर के उस्ताद वजीर खान, कलकत्ता के प्यारे साहिब, लखनऊ (कथक) के महान महाराज बिंदड़िन, धृपद, धमार, चरण दास.

अब किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति के निजी जीवन की जांच करना हमेशा कठिन होता है, लेकिन शायद एक तावैफ़ का निजी जीवन जानना और भी मुश्किल है। हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि तीन पुरुष थे जो उनके निजी जीवन में “महत्वपूर्ण” थे। इनमें से एक ज़मीनदार निमाई सेन था। इसके लिए निमाई सेन के उन दिए गए भौतिक उपहारों के द्वारा समझा जा सकता है जिसे उसने उसे दिया था। यद्यपि उपहारों का मिलना तावैफ़ की जीवन में आम बात होती थी। एक और महत्वपूर्ण संबंध था सैयद गुलाम अबास, जो कि उनके पूर्वी तबला साथी और व्यक्तिगत सहायक होने के लिए प्रतिष्ठित थे। गौहर जान ने उनके साथ विवाह भी किया था, भले ही वह उनसे दस साल से छोटी थी। इस रिश्ते को जब वह अपने वैवाहिक नास्तिकता के बारे में पता चला तो वो भी टूट गया। बाद में, उन्होंने गुजराती मंच के एक प्रसिद्ध अभिनेता अमृत वागल नायक के साथ रहना शुरू कर दिया। ऐसा कहा जाता है कि यह रिश्ते 3-4 साल तक चले। यद्यपि रिश्ते को स्थिर और सामंजस्यपूर्ण बनाने के लिए समय के साथ मेल जोल न होना भी कहा गया उसके बाद के वर्षों में वह एक बिट के आसपास चले गए वह धारभंगा के अदालत में अदालत गायक के रूप में सेवा की, वह रामपुर चले गए और वहाँ एक अदालत गायक बन गया। वह रामपुर छोड़ दी और छोटी अवधि के लिए बॉम्बे चले गए।

गौहर जान ग्रामोफ़ोन के साथ

अंततः, वह राजा कृष्ण राजा वाडीयार चतुर्थ के निमंत्रण पर मैसूर में शाही अदालत में चले गए। वहां उन्हें 1 अगस्त 1928 को अदालत संगीतकार नियुक्त किया गया था। हालांकि यह नियुक्ति केवल 18 महीने तक चली। वह 17 जनवरी, 1930 को मृत्यु हो गई.

 

गौहर जान का रिकॉर्डिंग करियर की शुरुआत:

गौहर जान की रिकॉर्डिंग 1902 में भारतीय संगीत के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ। इस वर्ष में गौहर जान को “ग्रामोफोन कंपनी” ने उनके लिए कई गाने रिकॉर्ड करने के लिए कहा था। कई वर्षों तक रिकॉर्डिंग का यह अंग अपने व्यवसाय के लिए एक आधारशिला बन गया। उन्हें प्रति रिकॉर्डिंग के लिए 3,000 रूपये का भुगतान किया गया था, जिसे उन दिनों में काफी पैसा माना जाता था। लोगो ने कहा की इन रिकॉर्डिंग का ऐतिहासिक मूल्य अनमोल होगा, और बिलकुल वैसा ही हुआ, आज भी इन रिकॉर्डिंग को संभल कर डिजिटल एवं ओरिजिनल रूप में सहेज कर रखा गया है। 1902 से 1920 तक उन्होंने 10 से अधिक भाषाओं में 600 से ज्यादा गाने गाए। गौहर जान भारत का पहला “रिकॉर्डिंग स्टार” बन गया, जिन्होंने अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए रिकॉर्डिंग उद्योग को और खुद को बुलंदी पर पहुचाया.

ग्रामोफ़ोन कैसेट

गौहर जान के पास प्रसिद्दी ज्यादा थी या पैसा? ये थी एक पहेली?

ये समय सिर्फ और सिर्फ गौहर जान का था, क्युकी उनकी जीवनशैली और रहन शहन अच्छे ज़मीदार, सेठो, और धनवान व्यक्तियों से कही ज्यादा थी.
उसी ग्रामोफोन कंपनी के श्री एफ.डब्ल्यू गेसबर्ग ने कहा कि जब भी गौहर खान रिकॉर्डिंग के लिए आती थी वह हमेशा ही बहुत ही अच्छा गाउन और बेहतरीन आभूषण पहनती थी। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि शायद वह कभी भी एक ही गहने को दो बार नहीं पहनती थी, हर बार कुछ नया ही लगता था. गौहर जान को उनकी महँगी महँगी कारों और शाही गाड़ियों के लिए जाना जाता था कलकत्ता में अपने स्वर्गीय दिनों के दौरान यह कहा जाता है कि उनकी नज़र (बैठने की फीस) 1000-3000 रुपए थीं; यह उन दिनों में बिल्कुल एक अदभुत राशि थी कुछ लोगों ने अनुमान लगाया है कि वह 20 वीं शताब्दी में एक करोड़ रुपये की मालकिन बन गई थी, हालांकि उनके धन की सटीक सीमा कभी भी ज्ञात नहीं हो सकती।

कुछ लोगो ने उनकी कला के अदृभुत स्वरों को सुना और नृत्य को देखा तो कुछ लोगो ने इसी कला के द्वारा जरुरत से ज्यादा पैसा कमाने वाली महिला के रूप में देखा. शायद उनकी उस दौर की संपत्ति उनके उस दौर के प्रदर्शन से ही मेल खाती थी। क्युकी आज भी उनकी ग्रामोफ़ोन रिकॉर्डिंग का कोई मूल्य नहीं दे सकता.
ये थी भारत की एक पहेली अर्थात भारत की पहली महिला रिकॉर्डिंग सिंगर – सम्मानीय गौहर जान

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