जाने हरतालिका तीज (Hartalika Teej क्या है?) व्रत का महत्व

जाने हरतालिका तीज व्रत कब है जाने हरतालिका तीज कब मनाई जाती है? Hariyali teej ki katha in hindi, Jaane hartalika upvas Ke bare Kya hai aur Kab karte hai.

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हरतालिका तीज (Hartalika Teej) का इंतजार हर साल सभी सुहागन व कुंवारी लड़की को रहता है| इस दिन ये सभी व्रत रखकर भगवान गोरी-शंकर की पूजा करती है| सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु व कुवांरी लड़कियां मनवांछित वर पाने के लिए यह व्रत करती है| हरतालिका तीज के व्रत में पानी नहीं पिया जाता है ,दुसरे दिन पूजा करने के बाद ही व्रत तोड़कर पानी पीते है| अत: यह व्रत निर्जला किया जाता है|

इस व्रत (Hartalika Teej) को करने वाली सभी महिलाएं व लड़कियां सोलह-श्रंगार करके पूरे मन से गोरी-शंकर की पूजा करती है| रात भर जागरण करके भजन-कीर्तन करती है ,और इस त्यौहार को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाती है|

लेकिन आप ने कभी सोचा है कि इस व्रत की परम्परा कैसे शुरू हुई और इसे सबसे पहले किसने किया था| इस व्रत की शुरुआत कैसे हुई ,यह जानने से पहले यह जानते है कि यह कब आता है?

यहाँ आप जानेंगे - hide

हरतालिका तीज (Hartalika Teej Kab Hai) कब आती है?

हरतालिका तीज हर साल भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को हस्त नक्षत्र के दिन मनाई जाती है| इस बार यह त्यौहार 21st August 2020, Friday को मनाया जा रहा है|

हरतालिका तीज (Hartalika Teej Kyu Manate hai?) मनाने के पीछे कारण?

हर व्रत व त्यौहार को मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा जरुर होती है| उसी प्रकार इस व्रत के पीछे भी एक पौराणिक कथा है जो इस प्रकार है –

जब माता सती ने पार्वती के रूप में राजा हिमालय के यहा जन्म लिया ,तो वे बचपन से ही भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाना चाहती थी|

लेकिन जब माता पार्वती विवाह के योग्य हुई तो एक दिन नारदजी राजा हिमालय के पास भगवान विष्णु व माता पार्वती के विवाह का प्रस्ताव लेकर आये| जिसे सुनकर राजा हिमालय बहुत प्रसन्न हुए क्योंकि वे पार्वती के लिए ऐसा ही तेजस्वी वर चाहते थे| उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया|

लेकिन जब इस बात का पता माता पार्वती को चला तो वे बहुत दुखी हुई| जब उनकी सखियों ने उनके दुःख का कारण पूछा तो पार्वती ने कहा – कि मैं केवल भगवान शंकर को अपने पति के रूप में पाना चाहती हूँ ,इसके अलावा मैं किसी ओर से विवाह करने की सोच भी नहीं सकती हूँ| तब एक सखी ने माता पार्वती को भगवान शिव की तपस्या करने के लिए कहा ,तो माता पार्वती बिना किसी को बताए अपनी सखी के साथ तपस्या करने को वन चली गई|

माता पार्वती ने गंगा नदी के किनारे भगवान शिव की बालू की प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा-अर्चना करके जागरण किया और बिना खाए पिए कठोर तपस्या की| उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहाँ – तब माता पार्वती ने शिव से यह वर माँगा की वे उन्हें पति के रूप में प्राप्त हो तो भगवान ने उन्हें यह वरदान दे दिया|

तब वरदान के अनुसार माता पार्वती व भगवान शिव का बड़ी धूमधाम से विवाह होता है| तभी से महिलाएं व लड़कियां इस व्रत को करने लगी ,ताकि सुहागनों का सुहाग अमर रहे और लड़कियों को इच्छा के अनुसार वर मिले|

हरतालिका तीज (Hartalika Teej Pooja) की पूजा कैसे करे?

इस दिन व्रत करने वाली सभी महिलाये व लड़कियां सूर्य उदय होने से पहले ही उठकर स्नान कर ले| इसके बाद सज-सवरकर पूजा के स्थान को केले के पत्ते व फूलों से सजाए ,और चौकी रखकर उस पर माता पार्वती ,भगवान शिव व गणेश की काली मिट्टी या बालू से बनी प्रतिमा रखते है| इसके बाद पूरी विधिविधान के साथ इनकी पूजा करते है| पूजा करने के बाद माता पार्वती को सुहाग का पूरा सामान चढ़ाया जाता है और हरतालिका तीज की कथा सुनाई जाती है| सुहागन महिलाये माता पार्वती पर चढ़ाया गया सिंदूर अपनी मांग में लगाती है और अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती है| पूरी रात जागरण करके भजन-कीर्तन करती है और प्रत्येक पहर में भगवान शिव की पूजा व आरती करती है| अगले दिन सुबह पूरी विधिविधान से पूजा करने के बाद ही अपना व्रत तोडती है| व्रत तोड़ने से पहले सुहाग का सामान ,फल ,मिठाइयाँ आदि चीजे दूसरी महिलाओं को दान करती है|

हरतालिका  (Hartalika Teej Vrat) का व्रत करते समय किन नियमों का पालन करना जरुरी है?

अगर इस व्रत को हम पूरे नियम के साथ करते है तो इसका फल हमें जरुर मिलता है और हमारी सभी मनोकामनाये पूरी होती है| लेकिन इसके लिए हमें इन नियमो की जानकारी होना चाहिए ,तो आइए जानते है वे नियम कौन से है –

  • इस व्रत को एक बार उठाने के बाद कभी छोड़ा नहीं जाता है चाहे कुछ भी हो|
  • हरतालिका तीज प्रदोषकाल में किया जाता है|
  • हरतालिका पूजन के लिए शिव ,पार्वती व गणेश की प्रतिमा काली मिट्टी या बालू रेत से अपने हाथों से ही बनाए|
  • पूजा की जगह को केले के पत्ते व फूलों से जरुर सजाये|
  • माता पार्वती को जो सुहाग चढ़ाये उसमे सुहाग का पूरा सामान होना चाहिए|
  • रात्रि जागरण करके तीनों पहर की पूजा अवश्य करे तभी व्रत पूरा होगा|
  • हरतालिका की व्रत कथा जरुर सुने|
  • भगवान शिव पर बेलपत्र जरुर चढ़ाये|
  • हरतालिका तीज के अगले दिन सुबह की पूजा करने के बाद ब्राह्मण या ब्राह्मणी को दान देना न भूले ,इसके बाद ही व्रत का समापन करे|

संबंधित प्रश्न -:

हरतालिका तीज व्रत का शुभ मुहूर्त्त कब है?

इस बार हरतालिका तीज 21 August 2020, Friday को मनाई का रही है| इसका सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त 5:27 बजे से 7:52 बजे तक तथा प्रदोषकाल का शुभ मुहूर्त शाम 5:50 बजे से 8:10 बजे तक का है|

हरतालिका तीज का व्रत क्यों नहीं छोड़ते है?

मान्यता है कि इस व्रत को एक बार करने के बाद जीवनभर करना पड़ता है| इसे कभी भी छोड़ नहीं सकते है यह इस व्रत का नियम है जो व्रत करने वाले को पूरा करना ही पड़ता है| अगर व्रत करने वाला बहुत बीमार है या किसी बीमारी से ग्रसित हो गया है तो उसके बदले इस व्रत को किसी दुसरे इंसान को करना पड़ता है लेकिन छोड़ नहीं सकते है|

प्रदोषकाल क्या है?

सूर्यास्त के बाद के तीन पहर या मुहूर्त को प्रदोषकाल कहते है| यह दिन व रात के मिलन का समय होता है|

हरतालिका का व्रत क्या फल देता है?

इस व्रत को करने वाली महिलाओं व लड़कियों की सभी मनोकामनाये पूरी होती है| सुहागनों का सुहाग अमर रहता है और लड़कियों को मनवांछित वर मिलता है|

इस व्रत का नाम हरतालिका तीज कैसे पड़ा?

इस व्रत को हरतालिका इसलिए कहा जाता है क्योंकि माता पार्वती की सखी ,पार्वती के परिजनों को बताए बिना उन्हें हरण करके तपस्या के लिए वन ले गई थी|

क्योंकि हर का मतलब हरण से है और तालिका का मतलब सखी से है जो मिलकर हरतालिका बनता है| तीज इसलिए कहते है क्योंकि यह भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की तृतीय तिथि को आता है|

इस व्रत को करते समय क्या नहीं करना चाहिए?

इस व्रत को करने वाली महिला या लड़की को प्रदोषकाल के तीनों पहर की पूजा करना नहीं भूलना चाहिए तथा रात्रि को सोना नहीं चाहिए|

हरतालिका तीज व्रत का किन-किन प्रदेशों में ज्यादा महत्व है?

इस व्रत का मध्यप्रदेश ,उत्तरप्रदेश ,राजस्थान ,बिहार जैसे प्रदेशों में ज्यादा महत्व है|

इस व्रत का समापन कैसे किया जाता है?

रात्रि जागरण करने के बाद सुबह स्नान करके पूजा करने के बाद सुहागिन महिला को सुहाग का सामान ,वस्त्र ,फल ,मिठाई व इच्छानुसार आभूषण देने के बाद ही व्रत का समापन करना चाहिए|

हरतालिका के व्रत में पूजा की कौन-कौन सी सामग्री होना चाहिए?

पूजा की सामग्री में बेलपत्र ,बेलफल ,केले का पत्ता ,धतूरे का फूल ,तुलसी के पत्ते ,कलावा ,नारियल ,अबीर ,चंदन ,सिंदूर ,कपूर ,घी का दीपक ,2-3 प्रकार के फल ,सुहाग का पूरा सामान ,जनैव ,वस्त्र आदि होना जरुरी है|

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