Contributed by: पं. जीवन शास्त्री : प्रिय मित्रो, आज में आपसे एक जानकारी बताना चाहता हु जो आपके लिए बहुत ही जरुरी है. वैसे तो हर घर में लोग मंदिर किसी न किसी रूप में रखते है, क्योंकि ऐसा मानना है जिस घर में भगवान् का वास नहीं है वो घर कभी घर नहीं बन सकता वो केवल एक मकान रहेगा.

घर में मंदिर की स्थापना –

लेकिन हमें मंदिर घर में बनाने से पहले कुछ बातें जरूर पता होनी चाहिए, नहीं तो आपके घर में शांति और सुख कोसो दूर रहेगा. हर किसी के घर में भगवान की मूर्तियां और तस्वीर होती ही हैं, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि सभी मूर्तियां शुभ प्रभाव देने वाली नहीं होती। कई मूर्तियां ऐसी भी होती हैं, जिनके दर्शन करना मनुष्य के लिए अशुभ प्रभावों का कारण भी बन सकता है। आज हम आपको भगवान के ऐसे ही कुछ स्वरूप और मूर्तियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके दर्शन करना अच्छा नहीं माना जाता।

घर का मंदिर कैसा हो? –

1. भगवान की मूर्ति घर में इस तरह रखनी चाहिए कि इनके पीछे का भाग यानि पीठ दिखाई नहीं दे। भगवान की पीठ का दिखना शुभ नहीं माना जाता।

2. पूजा स्थल में एक ही भगवान की दो मूर्तियां रखना भी अच्छा नहीं होता है। खासतौर पर अगर दोनों मूर्तियां आस-पास या आमने-सामने हो। ऐसी मूर्तियों के दर्शन करने से बार-बार लड़ाई होती है।

3. भले ही किसी मूर्ति से कितनी ही गहरी आस्था जुडी हो, लेकिन मूर्ति खंडित हो जाए तो उसके दर्शन करना अच्छा नहीं होता है। ऐसी मूर्ति के दर्शन या पूजा करना अशुभ फलों का कारण बनता है।

4. मंदिर में भगवान की ऐसी मूर्ति रखनी चाहिए, जिसमें उनका मुंह सौम्य और हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में हो। रौद्र और उदास मूर्ति के दर्शन करने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

5. भगवान की ऐसी किसी मूर्ति के दर्शन नहीं करने चाहिए, जिसमे वे युद्ध करते या किसी का विनाश करते नज़र आए। ऐसी मूर्ति के दर्शन करना भी दुःखों का कारण बन सकता है।

6. वास्तु विज्ञान के अनुसार घर में शिवलिंग की स्‍थापना नहीं करनी चाहिए क्योंकि शिवलिंग शून्य और वैराग्य का प्रतीक है। इसलिए इसे घर में नहीं रखना चाहिए। अगर आप शिवलिंग रखना चाहते हैं तो पारद का या फिर अंगूठे के आकार का शिवलिंग घर में रख सकते हैं।

7. भगवान शिव के ही एक अन्य रूप हैं भैरव। इनकी मूर्ति भी घर में नहीं रखनी चाहिए। इसका कारण यह है कि भैरव एक तामसिक देवता हैं। तंत्र मंत्र द्वारा इनकी साधना की जाती है। जबकि पारिवारिक जीवन में सुख शांति और प्रेम की अपेक्षा की जाती है। इसलिए घर में भैरव की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए।

8. भगवान शिव का एक रूप नटराज का है। वास्तुविज्ञान के अनुसार नटराज रूप वाली शिव प्रतिमा घर में नहीं होनी चाहिए। इसका कारण यह है कि भगवान शिव जब तांडव नृत्य करते हैं तो विनाश होता है। नटराज रूप में शिव तांडव करते इसलिए इन्हें घर में नहीं लाएं।

9. शनि ग्रह की शांति के लिए शनि की पूजा आराधना की सलाह ज्योतिषशास्‍त्र देता है लेकिन इन्हें घर में लाने की सलाह ज्योतिषशास्‍त्र भी नहीं देता है। शनि महाराज एकांत, विरह, उदासीनता और वैराग के देवता माने जाते हैं। जबकि गृहस्‍थी को चलाने के लिए राग, प्रेम एवं भौतिक चीजों की जरुरत होती है। इसलिए शनि महाराज की मूर्तियों को घर में नहीं लाना चाहिए

10. राहु की शांति के लिए ज्योतिषशास्‍त्र में राहु की पूजा करने की सलाह दी जाती है। लेकिन राहु की मूर्ति घर में लाने की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि राहु एक छाया ग्रह होने के साथ ही साथ पाप ग्रह भी है। यह मूल रूप से एक असुर है।

11. केतु भी उसी प्रकार का ग्रह है जैसा राहु क्योंकि दोनों ही एक असुर के शरीर से उत्पन्न हुए हैं। इसे भी छाया ग्रह और पाप ग्रह के रूप में बताया गया है। इसलिए केतु की प्रतिमा भी घर में नहीं लानी चाहिए।

12. घर के मंदिर में लोग श्री गणेश की मूर्ति जरूर रखते है और रखना भी चाहिए पर ध्यान रहे की गणेश जी की केवल एक ही मूर्ति हो.

13. इसी तरह से अपने घर के मंदिर में कभी भी दो शंख नहीं रखे, आप चाहे तो पुराने शंख को नदी में विसर्जित करके नया रख सकते है.
14. शास्त्रो के अनुसार खंडित मूर्तियों का पूजन करना सख्त मना है, और वो विपरीत परिणाम दे सकती है. जब भी कोई मूर्ति खंडित हो जाये उसे नदी में श्रद्धा के साथ विसर्जित कर दे.
15. पूजन करते समय ध्यान रखना चाहिए की आपका दीपक बुझे नहीं, नहीं तो पूजा फल पूरा नहीं मिलता है

घर के मंदिर का मुख किस दिशा में होना चाहिए? –

मंदिर में पूजा आरती करें तो अपना मुख उत्तर दिशा की ओर रखें और भगवान का मुख पूरब दिशा की ओर रखें. आपका घर चाहे किसी भी दिशा में हो, पर पूजाघर के लिए सबसे बढ़िया स्थान ईशान कोण ही है।