आज में बहुत ही जरुरी बात ब्लॉग के जरिये ऑनलाइन रखना चाहता हु उनके लिए जो हमेशा रिव्यु (Sometimes may be fake reviews) देखकर ही किसी कंपनी के प्रोडक्ट खरीदते है। वैसे देखा जाए तो ये बहुत अच्छी बात है की कोई भी चीज़ खरीदने से पहले या कोई खबर पढ़ने से पहले उसके यूजर रिव्यु पढ़े जाए ताकि हम सही चुनाव कर सके।

पर सावधान, आप फेक रिव्यु (FAKE REVIEWS) का शिकार हो सकते है। आज फेक रिव्यु (FAKE REVIEWS) की मात्रा हर जगह देखने को मिल रही है चाहे वो न्यूज़ वेबसाइट हो। चाहे वो सोशल मीडिया का ऑफिसियल पेज हो। चाहे वो शॉपिंग वेबसाइट इत्यादि हो।

FAKE REVIEWS क्यों होती है और इसे किसको Benefits होता है ?  

में इस प्रश्न का उत्तर फायदे से देना चाहुगा की –

Fake Reviews ka Fayada किसे होता है

  • फेक रिव्यु (FAKE REVIEWS) का सहारा आज वो कंपनियां लेने की कोशिश कर रही है जो किसी भी तरह से पॉपुलर होना चाहती है चाहे उनके प्रोडक्ट या सर्विसेज में दम हो या नहीं. जैसे की टीवी पर टेलीशॉप के रूप में दिखने वाले अजीबो गरीब प्रोडक्ट्स लाने वाले कंपनियां खुद को ब्रांड साबित कर – बेंचो और निकालो की नीति अपनाने के समय करती है।
  • ऐसी ही कंपनियां या लोग इन फेक रिव्यु (FAKE REVIEWS) का ही सहारा लेकर अपने पेज को पॉपुलर करते है और अपनी हर बात (पोस्ट या लिस्टिंग को ) को फेक रिव्यु (FAKE REVIEWS) और फेक लाइक के द्वारा ही वायरल करवाते है।
  • आजकल प्रसिद्द से प्रसिद्द ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटस पर कस्टमर रिव्युस की भरमार देखने को मिलती है जिसमे फायदे या उस प्रोडक्ट के नुक्सान तक लिखे होते है।
  • आज किसी भी नेता को अगर अपने आप को प्रसिद्द करवाना है तो ये काम चुटकी में हो जायेगा. तो बस उस नेता को एक मार्केटिंग कंपनी ढूढ़नी होगी। जो आसानी से फ्रीलांसिंग वेबसाइट पर मिल जाती है।

FAKE REVIEWS Kya Hai?

  • एक ब्रांड को जिसे कल तक कोई नहीं जानता था और धीरे धीरे सुपरस्टार बन जाता है। कुछ कंपनियां या उनके प्रोडक्ट सर्च करने पर सबसे ऊपर आते है पर उनके प्रोडक्ट या कंपनी में दम नहीं होता। ये कंपनियां affiliate Marketing का सहारा लेती है।
  • लोग ज्यादातर खरीदारी रिव्यु देखकर ही करते है। तो उस वेबसाइट पर भी ज्यादा से ज्यादा कस्टमर इसलिए आते है क्युकी वो उनके रिव्यु से प्रभावित होते है या लोगो का ट्रेंड देखना चाहते है। मतलब फेक रिव्यु (FAKE REVIEWS) का फायदा उस वेबसाइट को भी होता है और उसके सेलर को भी।
  • अब डिजिटिज़ेशन हुआ है तो नेता जी भी कैसे पीछे रहेंगे। ये इंटरनेट पर भी रुपये का सहारा लेकर फेक रिव्यु (FAKE REVIEWS) और लाइक करवाना इनका प्रमुख उदेश्य बन गया है, और वो भी वास्तविक उद्देश्य भूलकर। ताकि लोगो के लगे ये नेता बहुत ज्यादा बड़े वाले नेता है।

FAKE REVIEWS का नुक्सान किसे-किसे होता है।

Fake Reviews सबसे बड़ा नुक्सान दूसरे Brand या कंपनी को होता है –

आज कल फेक रिव्यु (FAKE REVIEWS) का इस्तेमाल किसी ब्रांड को बदनाम या नीचे दिखाने के लिए भी किया जाता है। आप खुद सोचिये किसी अच्छे ब्रांडेड प्रोडक्ट के नीचे नेगेटिव रिव्यु लिखे हो तो क्या आप वो प्रोडक्ट खरीदेंगे ? नहीं न। आप वही खरीदेंगे जिसमे फ़र्ज़ी कमैंट्स पढ़े होंगे। लेकिन जब आपको सामान मिलता है तब पता चलता है की वो फेक रिव्यु (FAKE REVIEWS) है।

दूसरा नुक्सान कस्टमर को होता है –

और दूसरा बड़ा नुक्सान कस्टमर को होता है क्योंकी उसे उसकी कीमत के हिसाब से क्वालिटी प्रोडक्ट नहीं मिलता। वो सोचता है रिव्यु तो काफी अच्छे थे पर प्रोडक्ट की क्वालिटी उस हिसाब से ठीक नहीं है.

तीसरा नुक्सान उस मार्केटप्लेस को भी होता है –

जी हाँ। ऊपर मेने मार्केटप्लेस को फायदा बताया था। लेकिन कुछ नुक्सान भी है जैसे ईमानदार कस्टमर का इन वेबसाइट से भरोसा उठना जो भविष्य के लिए नुकसान-देह ही शाबित होगा।आज ऐसे कई मार्केटप्लेस है जो घाटे में चल रहे है जो एक समय पर टॉप की पोजीशन के आस पास थे क्युकी लोगो ने विश्वास के साथ खरीददारी चालु की, जैसे जैसे विश्वास टुटा लोगो उस पोर्टल पर लॉगिन करना ही बंद कर दिया।

चौथा नुक्सान किसी सोशल मीडिया के पेज के बारे में है –

इसका सबसे बड़ा नुक्सान उन लोगो पर पढता है जो सोशल मीडिया पर डाली गयी हर जानकारी को सच मानते है। गलत पेज लिखे और सब्सक्राइब करने से आपके पास गलत और भड़कायु जानकारियों की बाढ़ सी आ जाती है। जो जिन्हे सच समझते है वो हाई ब्लड प्रेसर , गुस्सा, और डिप्रेस्शन का शिकार जल्दी हो जाते है। क्युकी आप इस छलावे में आ जाते है की इस पेज के बहुत ज्यादा फॉलोवर्स और सब्सक्राइबर है तो ये सही पेज ही होगा और जानकारियां भी सही दे रहा होगा।

क्या सबूत है की FAKE REVIEWS वास्तव में होता है ?

में कौन होता हु सबूत देने वाला। आप खुद सर्च इंजन में “Social Media Marketing ” या ” Business Promotion ” करने वाली कंपनियों को कॉल कीजिये और बात कीजिये। वो खुद बताएँगे आपको।
ये वही लोग है जो ऑनलाइन ठगी के कॉल सेंटर चलाते थे पर आप इस तरह के काम करके अच्छे ब्रांड को बदनाम कर रहे है और बुरे ब्रांड को प्रमोट कर रहे है सिर्फ और सिर्फ पैसो के लिए। सिर्फ उन्ही को कॉल करे जो जिन्होंने एक या दो साल के भीतर नया काम चालू किया हो ।

क्या नकली समीक्षा / Fake Reviews लिखना illegal  है?

अगर ये कोई सिद्ध कर दे की दिया गया रिव्यु ऐसे व्यक्ति ने दिया जिसने वो प्रोडक्ट कभी खरीदा ही नहीं तो कुछ किया जा सकता है। कानून के सलाहकार इस बात को अच्छे से बता सकते है।

कैसे बचे फेक रिव्यु (FAKE REVIEWS) के जाल से ? How to survive Fake REVIEWS?

कस्टमर के लिए

कभी भी एक वेबसाइट के रिव्यु पर भरोसा न करे, अलग वेबसाइट पर उसके रिव्यु चेक करे। वीडियो देखे और कंपनी की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर डिटेल चेक करे। और है सामान खरीदने के बाद उस प्रोडक्ट का रिव्यु जरूर पोस्ट करे। इससे ईमानदार रिव्यु की संख्या बढ़ेगी।

ब्रांड के लिए

अगर आपके प्रोडक्ट में नेगेटिव फीडबैक क्वालिटी होने के बाद बुरे कमैंट्स आ रहे है तो उन कस्टमर से बात करे और समस्या हल करे। समस्या हल हो जाने के बाद रिव्यु को बदलने के लिए कहे।
अगर रिव्यु देने वाला आपको जवाब नहीं दे रहा है तो समझे दाल में कुछ काला है। ऐसे लोगो के रिव्यु की लिस्ट बनाये, उनकी इमेल्स को ब्लॉक लिस्ट में डाले। उसे फ्लैग करे या आगे शिकायत करे। समाधान न मिलने की स्थिति में अपने प्रोडक्ट को उस मार्केटप्लेस से हटा ले ये अंतिम उपचार है।

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सोशल मीडिया पर

कभी भी किसी भी वायरल पोस्ट या पेज पर ज्यादा लाइक या कमैंट्स देखकर भी उसे सच न माने। सोशल मीडिया सिर्फ एक मनोरंजन का साधन है। वो न्यूज़ एजेंसी नहीं है। वहां दी जाने वाली जानकारियां सच कभी होती है कभी नहीं भी।

नेताओ या बुद्धिजीवियों के सोशल मीडिया के लिए

कभी भी किसी की बातो पर विश्वास न करे जब तक की वो धरातल पर अपने किये गए कार्य को सावित न करे। जैसे किसी बुद्धिजीवी ने बोला की सबको पेड़ लगाने चाहिए। ..तो क्या वो अपना वीडियो बनाकर डाला जिसमे उसने खुद पेड़ लगाए हो ? या वो कहता है की कोई भी सरकार अच्छी या बुरी है, कोई रिपोर्टर बुरा या अच्छा है , या कोई नेता बुरा या अच्छा है । ये उसका अपना विचार है जिससे हमेशा सहमत नहीं होना चाहिए जब तक की आपके पास खुद का कोई रीज़न न हो. आपका फालतू का एक लाइक या कमेंट करने का मतलब है आप उस बुद्धिजीवी की बातो का समर्थन कर रहे है जिसकी डिटेल आपको पता भी नहीं है. जिसकी जानकारी नहीं उसके बारे में भी कमेंट करना दूसरे लोगो के लिए फेक रिव्यु (FAKE REVIEWS) से ज्यादा कुछ नहीं है।

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जरुरी सूचना

 अगर किसी को सच जानना है तो खुद प्रेक्टिकल करके सच बाहर निकाले। जैसे की मार्केटिंग कंपनियों को कॉल करके उनसे अपने पेज को सुपरहिट, अपने प्रोडक्ट को सुपरहिट करवाने के लिए कहे। आशा है कोई कोई जरूर मिलेगा।
वैसे मेने पूरी कोशिश की है किसी ब्रांड या कंपनी का नाम लू। पर अगर कही आया है तो बस उदहारण मात्र के लिए है। टाइपिंग गलती के द्वारा वाक्य का कुछ का कुछ मतलब निकलना, सुधारने योग्य होगा।