क्या आपको हार्ट प्रॉब्लम्स हैं? क्या आपका कोलेस्ट्रॉल या वजन बढ़ा हुआ है?,  यदि आपका जवाब हां में है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। अलसी के औषधीय गुण करेंगे चमत्कार, अलसी हमारी जिंदगी को आसान बनाने में अहम किरदार निभाती है। इसके छोटे से बीजों में सेहत के लिए फायदेमंद हजारों गुण होते हैं।

अलसी का स्वाद –

अलसी का स्वाद अखरोट जैसा लगता है, कुछ लोग इसको भून कर, काला नमक मिलाकर भी सेवन करते है. पेट, दिल और रक्‍त आदि सभी के सुचारू रूप से काम करने में अलसी बेहद मददगार होती है। आइए जानते हैं अलसी किन-किन तकलीफों से आपको बचा सकती है।

अलसी के गुण –

अलसी वास्‍तव में गुणों की खान है। यह बात अलग हैं कि लोग इसके प्रति अधिक सजग नहीं होते। अलसी का नियमित सेवन हमें कई प्रकार के रोगों से छुटकारा दिला सकता है। अलसी में ओमेगा 3 (Omega-3 Acid) फैटी एसिड होता है, जो हमें कई रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। ओमेगा 3 हमारे शरीर के अंदर नहीं बनता इसे भोजन द्वारा ही ग्रहण किया जा सकता है।

शाकाहारियों के लिए अलसी ओमेगा-3 (Omega 3)  फैटी एसिड का इससे अच्‍छा और कोई स्रोत नहीं है। मांसाहारियों को तो यह मछली से मिल जाता है। अगर आप स्वयं को निरोग और चुस्त-दुरुस्त रखना चाहते हैं, तो रोज कम से कम एक दो चम्मच अलसी को अपने आहार में शामिल करिए।

Alsi खाने के Fayade :

  • अलसी शरीर को ऊर्जा व स्फूर्ति प्रदान करती है।
  • कैंसररोधी हार्मोन्स की सक्रियता बढ़ाती है। रक्त में शर्करा तथा कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करती है। अलसी में ओमेगा-3 भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो रक्त का थक्का बनने या उसे जमने से रोेकता है। क्याेंकि रक्त का थक्का बनने से रक्त के प्रवाह में बाधा आती है और अटैक की संभवना बनती है । अलसी इस संभावन काे समाप्त करती है। यह शरीर के अतिरिक्त वसा को भी कम करती है, जिसे आपका वजन कम होने में सहायता मिलती है। यह रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक है।  सीमित मात्रा में अलसी का सेवन, खून में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है। इससे शरीर के आंतरिक भाग स्वस्थ रहते हैं, और बेहतर कार्य करते हैं।
  • जोड़ों के दर्द में राहत दिलाती है।
  • पेट साफ रखने का घरेलू व आसान नुस्खा है।
  • हृदय संबंधी रोगों के खतरे को कम करती है। भूरे-काले रंग के यह छोटे छोटे बीज, हृदय रोगों से आपकी रक्षा करते हैं। इसमें उपस्थित घुलनशील फाइबर्स, प्राकृतिक रूप से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम करता है। इससे हृदय की धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल घटने लगता है, और रक्त प्रवाह बेहतर होता है, अलसी में अल्फा लाइनोइक एसिड पाया जाता है, जो ऑथ्राईटिस, अस्थमा, डाइबिटीज और कैंसर से लड़ने में मदद करता है। खास तौर से कोलोन कैंसर से लड़ने में यह सहायक होता है।  नतीजतन हार्ट अटैक की संभावना नहीं के बराबर होती है ।
  • हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करती है।
  • त्वचा को स्वस्थ रखता है एवं सूखापन दूर कर एग्जिमा आदि से बचाती है। अलसी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और फाइटोकैमिकल्स, बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करती है, जिससे त्वचा पर झुर्रियां नहीं होती और कसाव बना रहता है। इससे त्वचा स्वस्थ व चमकदार बनती है।
  • यह शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रोल को बढ़ाती है और खराब कोलेस्ट्रोल को कम करती है।
  • इसका नियमित सेवन रजोनिवृत्ति संबंधी परेशानियां दूर करता है। इसमें उपस्थित लाइगन नामक तत्व, आंतों में सक्रिय होकर, ऐसे तत्व का निर्माण करता है, जो फीमेल हार्मोन्स के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  इसमें उपस्थित लाइगन नामक तत्व, आंतों में सक्रिय होकर, ऐसे तत्व का निर्माण करता है, जो फीमेल हार्मोन्स के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • लीवर को स्वस्थ रखती है। इसमें उपस्थित लाइगन नामक तत्व, आंतों में सक्रिय होकर, ऐसे तत्व का निर्माण करता है, जो फीमेल हार्मोन्स के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • खांसी में अलसी के बीज का पाउडर बनाकर उसकी चाय पीने से लाभ होता है। इसका सेवन दिन में दो तीन बार करें।
    एक चम्मच अलसी पाउडर को आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगोकर रखें। दिन में दो बार इसका सेवन करें। पीने से पहले इसे छान लें।

Alsi Khane का Tareeka –

  • डायबिटीज के मरीज को 25 ग्राम अलसी खाना चाहिए। उन्हें पीसी अलसी को आटे में मिलाकर रोटी बनाकर खाना चाहिए।
  • कैंसर रोगियों को 3 चम्मच अलसी का तेल पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर देने चाहिए।
  • अलसी सेवन के दौरान खूब पानी पीना चाहिए। इसमें अधिक फाइबर होता है, जिससे प्यास ज्यादा लगती है।
  • अगर आप स्वस्थ हैं तो व्यक्ति को रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ, सब्जी, दाल या सलाद में मिलाकर लें।
  • अलसी का तेल भी गुणों से भरपूर है। अगर त्वचा जल जाये, तो अलसी का तेल लगाने से दर्द व जलन से राहत मिलती है। इसमें विटामिन ई होता है।
  • इसका कुष्ठ रोगियों को सेवन करना चाहिए। त्वचा पर लाभ होगा।
  • कुछ लोगों का मानना है कि अलसी गर्म होती है इसलिए गर्मी के मौसम में इसका सेवन नहीं करना चाहिए। कुछ लोगों का मानना है कि अलसी का सेवन किसी भी मौसम में किया जा सकता है।

फिर भी आपको चाहिए कि किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। वरना कई बार असंतुलित मात्रा आपकी सेहत के लिए कुछ परेशानियां भी पैदा कर सकती हैं।

अलसी भूनने का तरीका –

सबसे पहले गैस जलाये और रोटी बनाने वाले तबे को हलकी आंच पर रखे। हल्का गर्म होने के बाद उस पर अलसी डाले धीरे धीरे चमच्च से चलाये। हल्का हल्का सेकने या भूनने के बाद गैस बंद कर ले। अगर जला नहीं है तो तब पर 2 मिनट तक चलाते रहे। फिर निकाल कर काला नमक जीरे वाला मिलाकर खा सकते है।

Alsi खाने के Nuksaan –

पेट की समस्याएं – अलसी में मौजूद लैक्सेटिव (laxative) दस्त, सीने में जलन और बदहज़मी जैसी पेट की समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
ज़ख्म भरने की प्रक्रिया धीमी करे – ये बात ठीक है कि फ्लैक्सीड्स में मौजूद ओमेगा फैटी-3 एसिड्स सूजन और जलन को कम करते हैं लेकिन इसमें कुछ ऐसे तत्व भी मौजूद होते हैं जो खून के जमने की प्रक्रिया को धीमी कर देते हैं, जिससे ज़ख्म होने पर खून बहना रूक नहीं पाता।
पेट में गैस की समस्या को बढ़ाए – हाई फाइबर होने की वजह से फ्लैक्सीड्स खाने से कई बार गैस और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं भी हो जाती हैं। कई बार तो इसे बिना लिक्विड के साथ लेने से कब्ज़ भी हो जाता है।
दवाइयों के साथ मिलकर पहुंचाए नुकसान – फ्लैक्सीड्स आपकी दवाओं के साथ मिलकर आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए अगर आप किसी तरह की दवाइयां ले रहे हैं तो फ्लैक्सीड्स खाने से पहले एक बार डॉक्टर से परामर्श ज़रूर ले लें।
एलर्जी का कारण बने – अधिक मात्रा में सेवन किये जाने से अलसी एलर्जिक रिऐक्शन का कारण भी बन सकते हैं। इसकी वजह से पेट दर्द, मतली और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे सांस लेने में समस्या और लो ब्लड प्रेशर की शिकायत हो सकती है।
पीरियड्स में गड़बड़ी – अलसी का सेवन कर रही महिलाओं को उसके एस्ट्रोजन जैसे प्रभावों के कारण कई बार अनियमित पीरियड्स का सामना करना पड़ता है। अगर आपको इस तरह की समस्या पहले हो चुकी है, या अभी है तो अलसी न खाएं। साथ ही, गर्भवती और स्तनपान करवाने वाले महिलाओं को भी इसे न खाने की सलाह दी जाती है।