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तुलसी का पौधा–
हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को एक तरह से लक्ष्मी का रूप माना गया है। कहते है की जिस घर में तुलसी की पूजा अर्चना होती है उस घर पर भगवान श्री विष्णु की सदैव कृपा दृष्टि बनी रहती है । आपके घर में यदि किसी भी तरह की निगेटिव एनर्जी मौजूद है तो यह पौधा उसे नष्ट करने की ताकत रखता है। हां, ध्यान रखें कि तुलसी का पौधा घर के दक्षिणी भाग में नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि यह आपको फायदे के बदले काफी नुकसान पहुंचा सकता है।

आंवले का पेड़–

यह आपके कष्टों का निवारण करता है। आंवले के पौधे की पूजा करने से मनौती पूरी होती हैं। इसकी नित्य पूजा-अर्चना करने से भी समस्त पापों का शमन हो जाता है।

कार्तिक शुक्ल नवमी के दिन अक्षय नवमी का पर्व मनाया जाता है। हालांकि यह भारत भर में मनाया जाता है, लेकिन बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अधिक प्रचलित है। इस दिन पश्चिम बंगाल में देवी जगद्धात्री की पूजा की जाती है।
अक्षय का अर्थ होता है-जिस चीज का नाश न हो। पुराणों के अनुसार, आंवला और तुलसी के वृक्ष में विष्णु भगवान का वास होता है, इसलिए इनका कभी नाश नहीं होता है। आंवला ब्रह्मा का वृक्ष भी कहलाता है। मान्यता है कि ब्रह्मा ने इस वृक्ष को वरदान दिया था कि जो भी इस वृक्ष के नीचे भोजन करेगा, दीर्घ आयु वाला होगा। भारत के प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता में भी आंवले का उल्लेख है। आंवला खाने से शरीर निरोगी रहता है और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
महिलाएं इस दिन जल, फूल और दूध से आंवले के वृक्ष की पूजा करती हैं। कच्चे सूत को इसके तने में लपेटती हैं। अंत में घी और कर्पूर से वृक्ष की आरती कर परिक्रमा करती हैं। संध्या समय वे इसी पेड़ के पास भोजन बनाती हैं और परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों को खिलाती हैं।

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