2.5
(10)

शंखपुष्पी का आयुर्वेद में अपना एक अलग और विशेष स्थान हैं क्योंकि शंखपुष्पी शांतिदायक और बुद्धिवर्धक वनस्पति होती हैं| यह मानसिक रोगों को दूर करने , मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करने वाली उत्तम औषधि है| ज्वर तथा अनिद्रा रोग में इसका प्रयोग बहुत लाभदायक होता है शंखपुष्पी के इन सभी गुणों के कारण आयुर्वेद में उसे एक औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है|
शंखपुष्पी को संस्कृत में शंखपुष्पी, क्षीरपुष्पी, शंखमालिनी आदि कहते हैं| और इसका वैज्ञानिक नाम कोनोवुल्लूस प्लूरिकालिस हैं| शंखपुष्पी पर शंख के समान आकृति वाले सफ़ेद रंग के पुष्प आते है, इसी कारण इसे शंखपुष्पी कहा जाता हैं| इसे क्षीर पुष्पी (दूध के समान श्वेत रंग के पुष्प लगने के कारण), मांगल्य कुसुमा (जिसके दर्शन करने से सदैव मंगल हो) भी कहा जाता है| इसके अलावा भी इसे अनेक प्रकार के नामों से पुकारा जाता हैं|
शंखपुष्पी इस प्रकार की वनस्पति हैं जो भारत के समस्त पथरीली भूमि वाले जंगलों में पायी जाती है| यह वर्षा ऋतू में अपनी जड़ से पुनः उगने लगती है और शरद ऋतू में द्रवीभूत भूमि में घास के साथ फैल जाती है| इसके तने प्रायः एक से डेढ़ फ़ीट की लम्बाई तक फैलते हैं| इसकी जड़ अंगुली जितनी मोटी, और 1 से 2 इंच तक लम्बी होती है और ये सिरे पर चौड़ी व् नीचे संकरी होती जाती है| इसकी छाल मोटी होती है, जो बाहर से भूरे रंग की व् खुरदुरी होती है| अंदर की छाल और काष्ठ के बीच से दूध जैसा एक स्त्राव निकलता है जिसकी गंध ताजे तेल जैसी दाहक व् चरपरी जैसी होती है| इसका तना व् उसकी अग्रशाखाएं सूतली जैसी पतली और सफ़ेद रोम कूपों से भरी रहती हैं| इसके पत्ते आधे से एक इंच लम्बे, चौथाई इंच चौड़े, तीन शिराओं युक्त गहरे हरे रंग के होते हैं| इसकी पत्तियों को मसलने पर मूली के पत्तों जैसी गंध आती है| मई से दिसम्बर तक के समय इसमें पुष्पों के उपरान्त छोटे छोटे कुछ गोलाई लिए भूरे रंग के, चिकने तथा चमकदार फल लगते हैं| बीज भूरे या काले रंग के एक और तीन धार वाले, दूसरी और ढाल वाले होते हैं| बीज के दोनों और सफ़ेद रंग की झाईं दिखाई पड़ती है| शंखपुष्पी का पौधा तीन रंग के फूलों वाला होता हैं – लाल, सफेद और नीले| इसमें से सफेद रंग के फूलों वाला पौधा औषधि के रूप में सबसे अच्छा माना जाता हैं| और इसी का प्रयोग सबसे ज्यादा आयुर्वेदिक दवाइयों को बनाने में किया जाता हैं|
शंखपुष्पी के लाभ -:
• शंखपुष्पी सबसे ज्यादा स्मारण शक्ति को तेज करने में लाभदायक होती हैं| इसका महीन पिसा हुआ चूर्ण , एक-एक चम्मच सुबह- शाम , मीठे दूध के साथ या मिश्री की चाशनी के साथ सेवन करना चाहिए| ऐसा करने से दिमागी ताकत बढ़ती हैं|
• तनाव या अनिद्राजन्य उच्च रक्तचाप जैसी परिस्थितियों में शंखपुष्पी बहुत ही लाभकारी होती हैं|
• शंखपुष्पी तनाव को दूर करने में भी बहुत उपयोगी होता है ,क्योंकि इसके रसायन तनाव का शमन करके मस्तिष्क की उत्तेज़ना शांत करते है और दुष्प्रभाव रहित निद्रा लाते है|
• कुछ बच्चे बड़े हो जाने पर भी सोते हुए बिस्तर में पेशाब करने की आदत नहीं छोड़ते है , ऐसे बच्चों को आधा चम्मच शंखपुष्पी चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह शाम चटा कर ऊपर से ठंडा दूध या पानी पिलाना चाहिए| यह प्रयोग लगातार एक महीनें तक करना चाहिए ऐसा करने से उसकी ये आदत छुट जाती है|
• इस चूर्ण के सेवन से सभी प्रकार के मूत्र सम्बन्धी (प्रमेह रोग), खांसी, श्वांस रोग, पीलिया, बवासीर आदि में आराम मिल जाता है|
• शंखपुष्पी का महीन चूर्ण एक चम्मच और पीसी हुई काली मिर्च आधी चम्मच दोनों को मिला कर पानी के साथ देने से शुक्रमेह रोग ठीक होता है|
• ताजा शंखपुष्पी के जड़, तना, फल, फूल और पत्ते का रस 4 चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम रोजाना सेवन करने से कुछ महीनों में मिर्गी का रोग दूर हो जाता है|
• शंखपुष्पी के पत्तों को चबाकर उसका रस चूसने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है तथा आवाज साफ निकलने लगती है|
• शंखपुष्पी को तेल में पकाकर उस तेल को रोजाना बालों मे लगाने से बाल बढ़ जाते हैं|
• एक चम्मच शंखपुष्पी का चूर्ण रोजाना तीन बार पानी के साथ कुछ दिन तक सेवन करने से बवासीर का रोग ठीक हो जाता है|
• शंखपुष्पी के सेवन से हिस्टीरिया रोग में लाभ होता है|
• रोजाना सुबह और शाम को 3 से 6 ग्राम शंखपुष्पी की जड़ का सेवन करने से कब्ज या पेट की गैस भी दूर हो जाती है|
• शंखपुष्पी के रस का सुबह-शाम सेवन करने से कमजोरी दूर हो जाती है|
• यह नुरोटोक्सिकित्य का स्तर नियंत्रित करता है| ये न केवल एक तनाव से छुटकारा दिलाता है बल्कि एक एंटी डिप्रेसेंट की तरह काम करता है|
• शंखपुष्पी से हाइपरथायरोईडिसम का इलाज भी हो जाता है| तथा ये थायराइड हार्मोन का निर्माण करके शरीर की चयापचय की दर को नियंत्रित करता है|
• मलेरिया होने पर शंखपुष्पी की जड़ का चूर्ण अति लाभकारी होता है
जैसा कि हम जानते है शंखपुष्पी के फायदे बहुत सारे है और इसके दुष्प्रभाव भी कम होते है|

लेकिन इसके कुछ नुकसान भी होते है| इसलिए जब भी शंखपुष्पी का सेवन करे तो इन बातो का विशेष ध्यान रखे|
• गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए|
• तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए|
• चिकित्सक की सलाह से ही इसका सेवन करना चाहिए|
• स्तनपान करने वाली महिलाओं को भी इसका सेवन चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए|

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

Average rating 2.5 / 5. Vote count: 10

No votes so far! Be the first to rate this post.

As you found this post useful...

Follow us on social media!

We are sorry that this post was not useful for you!

Let us improve this post!

Tell us how we can improve this post?