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कंप्यूटर से तो आप सब परिचित ही होंगे ,क्योंकि आज के समय में बच्चे हो ,या बड़े सभी लोग इसका इस्तमाल कर रहे है| कंप्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रोनिक यंत्र है जो बड़ी से बड़ी गणना को कुछ ही सेकण्ड में कर सकता है| और कंप्यूटर से हम हर प्रकार की जानकारी भी प्राप्त कर सकते है| लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि आखिर कंप्यूटर आया कैसे ,इसका निर्माण कैसे किया गया ,और इसे लाने वाला कौन था| इन सभी बातों की जानकारी हम आपको इस लेख के माध्यम से देने जा रहे है|

कंप्यूटर का विकास –

कंप्यूटर का इतिहास तीन हजार वर्ष पुराना है उस समय गिनतारे का उपयोग अंकगणितीय कार्यो के लिए होता था| जिसे आज हम रोमन गिनतारा कहते है उसका उपयोग 2400 ईसा पूर्व के प्रारम्भ में बेबीलोनिआ में हुआ था| गिनतारे को Abacus भी कहते है| ये तारों का एक फ्रेम होता हैं ,इन तारो में पकी हुई मिट्टी के गोले पिरोये रहते हैं| प्रारंभ में Abacus को व्यापारी गणना करने के लिए उपयोग में लाया करते थे यह अंको को जोड़ने, घटाने के काम आता था|

                             

इसके बाद अंको की गणना के लिए 17 वी शताब्दी में फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल ने एक यांत्रिक अंकीय गणना यंत्र सन् 1645 में विकसित किया| इस मशीन को एंडिंग मशीन कहते थे, क्योकि यह केवल जोड़ या घटाव कर सकती थी| यह मशीन घड़ी और ओडोमीटर के सिध्दांत पर कार्य करती थी|  उसमें कई दाँतेयुक्त चकरियाँ लगी होती थी जो घूमती रहती थी चक्रियों के दाँतो पर 0 से 9  तक के अंक छपे रहते थे प्रत्येक चक्री का एक स्थानीय मान होता था जैसे –इकाई, दहाई, सैकड़ा आदि इसमें एक चक्री के घूमने के बाद दूसरी चक्री घूमती थी|

इसके बाद यांत्रिक अंकीय गणना यंत्र को ओर अधिक विकसित किया गया और सन् 1801 में फ्रांसीसी बुनकर  जोसेफ जेकार्ड  ने कपड़े बुनने के ऐसे लूम  का अविष्कार किया जो कपड़ो में डिजाईन  या पैटर्न को कार्डबोर्ड के छिद्रयुक्त पंचकार्डो से नियंत्रित करता था|  इस लूम  की विशेषता यह थी  की यह कपडे के पैटर्न  को कार्डबोर्ड के छिद्र युक्त पंचकार्ड से नियंत्रित करता था| और पंचकार्ड पर चित्रों की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति द्वारा धागों को निर्देशित किया जाता थ| लेकिन इस यंत्र में भी बहुत सारी कमियाँ थी|

लेकिन जेकार्ड  लूम के इस यंत्र में भी बहुत सारी कमियाँ थी| इसलिए ओर अन्य यांत्रिक अंकीय गणना यंत्र को विकसित किया गया तथा अंत में 19 वी शताब्दी  में चार्ल्स बैबेज ने सन् 1822 में एक मशीन का निर्माण किया जिसका खर्च ब्रिटिश सरकार ने दिया| इस मशीन का नाम डिफरेंस इंजिन रखा गया, इस मशीन में गियर और साफ्ट लगे हुए थे| यह मशीन भाप से चलती थी|  सन् 1833 में चार्ल्स बैबेज ने डिफरेंस इंजिन का विकसित रूप एनालिटिकल इंजिन तैयार किया जो बहुत ही शक्तिशाली मशीन थी| चार्ल्स  बैवेज का कम्प्यूटर के विकास में बहुत बड़ा योगदान रहा हैं| चार्ल्स बैवेज का एनालिटिकल इंजिन आधुनिक कम्प्यूटर का आधार बना और इसी कारण चार्ल्स बैवेज को कंप्यूटर का जनक कहा जाता हैं| चार्ल्स बैबेज ने 1837  में स्वचालित कंप्यूटर को बनाने की कल्पना की लेकिन पैसे की कमी होने के कारण वे उसे पूरा नहीं कर पाये थे|

कंप्यूटर का आविष्कार कब, कैसे और कहाँ किसने किया

इस प्रकार कई सारी कठिनाइयों और चरणों को पार करते हुए कंप्यूटर का जन्म हुआ| और इसके जन्मदाता  चार्ल्स बैबेज बने|

 

 

 

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