जानिये भगवान शिव के स्वरूप श्री  केदारनाथ मंदिर के बारे में

केदारनाथ ज्योर्तिलिंग 12 ज्योर्तिलिंगो में से पांचवे नंबर का पवित्र ज्योर्तिलिंग है| केदारनाथ ज्योर्तिलिंग उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है तथा रुद्रप्रयाग हिमालय पर्वत के गढ़वाल क्षेत्र में आता है| सभी 12 ज्योर्तिलिंगो में से यह सबसे ऊँचा ज्योर्तिलिंग है| इस ज्योर्तिलिंग के मंदिर के पास में मन्दाकिनी नदी बहती है| यह तीर्थस्थल चारधाम के अंतर्गत आता है क्योंकि उत्तराखंड में गंगोत्री ,यमनोत्री ,केदारनाथ व बद्रीनाथ चारों धाम पाए

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का इतिहास व महत्व (Mallikarjuna Jyotirlinga)

मल्लिकार्जुन ज्योर्तिलिंग दुसरे नंबर का ज्योर्तिलिंग है| कोटिरुद्र्संहिता में मल्लिकार्जुन का अर्थ (मल्लिका का मतलब पार्वती तथा अर्जुन का मतलब शिव) पार्वती-शिव बताया गया है| कहा जाता है कि इस ज्योर्तिलिंग के दर्शन करने वालों के सभी कष्ट दूर हो जाते है और उन्हें अश्वमेध यज्ञ का पूण्य मिलता है| इस ज्योर्तिलिंग की पूजा-अर्चना करने वाले लोगों को शिव के साथ-साथ माँ पार्वती का भी आशीर्वाद मिलता है| मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कहां

जाने पहले ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ मंदिर के बारे में (Know About Somnath Temple, India)

जाने पहले ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ मंदिर के बारे में (Know About Somnath Temple, India) जैसा कि हम जानते है भगवान भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंग है| जो कि देश के अलग-अलग भागों पर पाये जाते है| इनमे से जो पहला ज्योतिर्लिंग है उसका नाम सोमनाथ ज्योतिर्लिंग है| आज हम आपको सोमनाथ मंदिर में स्थित इसी ज्योतिर्लिंग का इतिहास बताने जा रहे है| इसके इतिहास के साथ हम आपको ये भी बतायेंगे

जाने ! अग्रसेन की बावली (Agrasen ki Baoli ) भूमिगत ऐतिहासिक स्मारक के बारे में

अग्रसेन की बावली (Agrasen ki Baoli ) एक ऐतिहासिक संरचना है जो कि आज भी अच्छी स्थिति में है| इसका निर्माण जल संरक्षण के लिए किया गया था ताकि जल की कमी को पूरा किया जा सके| इसे भारत सरकार द्वारा अवशेष अधिनियम 1958 के अंतर्गत संरक्षण प्रदान किया गया है| इस बावली का निर्माण 14वी शताब्दी में अग्रवाल समाज के वंशज महाराज अग्रसेन ने करवाया था इसलिए इस बावली

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग के अदृभुत और अनमोल सुविचार

स्टीफन विलियम हॉकिंग ये नाम आप पहले से ही जानते होंगे और आने वाली पीढियां इन्हें कभी भुला नहीं पायेगी. क्युकी स्टीफन विलियम हॉकिंग ने दुनिया को अपने कई शोधों से बार बार चौंकाया। स्टीफन का जन्म 8 जनवरी 1942 को इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में हुआ था। बचपन से स्टीफन ने सोच लिया था कि वह अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहते थे। महज 21 वर्ष की उम्र में एक दिन जब

भारत के हलवाई जो खौलते तेल में हाथो से तलते है पकोड़े या मछली को - अजब गजब

भारत में जो अजब गजब कहानियां सुनने को मिलती है वो शायद ही आपको दुनिया में मिले. आज हम आपको भारत के ऐसे हलवाईयो से मिलवाएगे जो अपने हाथो से गर्म तेल में पकोड़ा या मछली फ्री बना लेते है. हुई न हैरानी, तो चलिए जानते है इनके बारे में. इलाहाबाद के रामबाबू हलवाई : उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में ऐसे ही एक अजब-गजब हलवाई हैं, जिनका नाम राम बाबू

भारत की प्रथम महिला रिकॉर्डिंग गायक (On Record Singer)- गौहर जान

बिलकुल आज हम फिर से एक पहेली या एक पहले के अंतर्गत – एक ऐसी सख्स्यित से मिलवाले जा रहे है जो आपके ज्ञानकोष को तो बढेयेगा ही साथ ही साथ आपको 19वी शताव्दी के इतिहास की सैर भी कराएगा. आज हम बात कर रहे है भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की पहेली मतलब प्रथम महिला रिकॉर्डिंग सिंगर गौहर जान के बारे में. जिन्हें समय के साथ साथ भारत की फिल्म या

हमारे भविष्य पर अंतरिक्ष मलबे का बढ़ता खतरा - अंतरिक्ष में प्रदूषण

विज्ञान की प्रगति के साथ एक के बाद एक देश अंतरिक्ष में अपने उपग्रह भेजने लगे हैं. इसके साथ ही वहां कूड़ा कचरा भी बढ़ने लगा है. अब यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कचरे को साफ करने की अपील की है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 10 सेंटीमीटर से बड़े 29,000 टुकड़े पृथ्वी का चक्कर काट रहे हैं. ये टुकड़े 25,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार

जानिये मोर पंख के चमत्कारी महत्व, प्रयोग और लाभ

मोर एक बहुत ही सुन्दर पक्षी हैं और भारत में इसे राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया है| इसके शिकार पर रोक लगाई गई हैं ,लेकिन इसके वाबजूद भी कोई इसका शिकार करता हैं तो उस पर क़ानूनी कारवाई की जाती हैं और दोषी होने पर सजा भी मिलती हैं| लेकिन क्या आप जानते है कि इस सुन्दर पक्षी के जो पंख होते है वे हमारे लिए कितने उपयोगी और महत्वपूर्ण

जंगल में बने इस मंदिर में देवी मां की सेविकाएं नहलाती हैं भक्‍तों को

जतमई धाम, छत्तीसगढ़ : जतमाई छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक जंगलो के बीच घिरा हुआ पर्यटन स्थल है जतमई धाम गरियाबंद में रायपुर से 85 किमी की दूरी पर स्थित है। जो की प्रकृति के गोद में बसा हुआ है। यह स्‍थल जंगल के बीचों-बीच बना है। जतमाई अपने कल कल करते प्राकृतिक सदाबहार झरनों के लिए प्रसिद्ध है, जतमाई गरियाबंद जिले में प्रकृति की गोद में