ज्योतिष

नक्षत्र कितने होते है और उनका चन्द्रमा के घटने और बढने से क्या सम्बन्ध है?

कहते है हिन्दू धर्म में, एक धर्म से बढ़कर मनुष्य के जीने की कला निहित है. हिन्दू धर्म में प्रकृति को ही सब कुछ माना गया है. नीचे आपको पता लगेगा इन निम्न बिंदुयो का. हिन्दू धर्म में कितने नक्षत्र होते है और वो क्या है ? नक्षत्रो का चन्द्रमा के घटने और बढने से क्या सम्बन्ध है ? कैसे चन्द्रमा हुए श्राप मुक्त ? शिव महापुराण की कहानी के अनुसार

कुंडली में राक्षस गण क्यों विशेष होता है अन्य गणों से?

इस दुनिया में बहुत इस ऐसी चीज़े है जिनकी बारे में मानव हर संभव प्रयास करने की कोशिश करता रहता है पर फिर भी बहुत सी ऐसी बातें है जिन्हें हम जानकार भी अनजान करते है. अगर आपकी कुंडली गण के सामने राक्षस लिखा हुआ है तो आपको घबराने की जरुरत नहीं बल्कि आप अन्य लोगो से स्पेशल हो सकते है. ज्योतिष के अनुसार कुंडली में कितने गण होते है?

Uttarayan and Dakshinayan

हिंदु पंचांग के अनुसार एक वर्ष में दो अयन होते हैं. अर्थात एक साल में दो बार सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है और यही परिवर्तन या अयन ‘उत्तरायण और दक्षिणायन’ कहा जाता है. कालगणना के अनुसार जब सूर्य मकर राशि से मिथुन राशि तक भ्रमण करता है, तब यह तक के समय को उत्तरायण कहते हैं. यह समय छ: माह का होता है. तत्पश्चात जब सूर्य कर्क राशि

जानिए 1051 स्वप्न विचार(Swapna Vichaar) या स्वप्न फल(Swapna Phal) का अर्थ

जानिए 1051 स्वप्न विचार(Swapna Vichar) या स्वप्न फल(Swapna Phal) का अर्थ स्वप्न और ज्योतिष (Dreams and astrology): ज्योतिष में चन्द्रमा को मनुष्य के मतिष्क को कारक माना जाता है. जिस जातक के लग्न में कमजोर ग्रह, दूषित ग्रह या शत्रु ग्रह हों, वे जातक कमजोर माने जाते है. ऐसे जोगो को सपने अधिक आते हैं और नज़र दोष, डर के ज्यादा शिकार होते है. ज्योतिष और स्वप्न एक दूसरे से काफी हद