क्या आप जानते है? करवाचौथ पर चाँद को छलनी से क्यों देखते है - Karva Chauth 2019

करवाचौथ का त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस बार करवाचौथ 17 अक्टूबर 2019 दिन गुरूवार को पड़ रहा है| करवाचौथ के दिन शादीशुदा महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती है ,तथा शाम को सोलह श्रृंगार करके ,पूजा और कथा कहकर रात को चाँद को छलनी से देखकर उसे अर्ध्य देकर व्रत खोलती हैं। लेकिन आपने कभी ये जानने कि कोशिश की है कि

एकलव्य की गुरुभक्ति और द्रोणाचार्य पर प्रश्न उठाकर कही हम दोनों का अपमान तो नहीं कर रहे?

आज कल आपने सोशल मीडिया या कुछ दोस्तों को इसी बात पर वाद विवाद करते देखा होगा. की गुरु द्रोणाचार्य ने एकलव्य के साथ गलत किया, जो कहानी इस प्रकार है : Ekalavya Story in Hindi : एकलव्य महाभारत का एक पात्र है। वह हिरण्य धनु नामक निषाद का पुत्र था, एकलव्य को आज महान धनुर्विद्या और महान गुरुभक्ति के रूप में देखा जाता है. पिता की मृत्यु के बाद

श्री मद भगवत गीता अब सऊदी अरब में अरबी भाषा में उपलव्ध है : अच्छी खबर

श्री मद भगवत गीता अब सऊदी अरब में अरबी भाषा में उपलव्ध है सऊदी अरब सरकार ने भगवत-गीता को अरबी में जारी किया है। वहां रहने वाले एक एक हिंदू प्रवासी ने कहा की ये हमारे लिए और इस दुनिया के सारे हिन्दुयो के लिए गर्व का क्षण है जो मोदी जी के मित्रता प्रयासों से मिला है। चाहे कोई भी मजहब या धर्म हो वो आपस में नफरत नहीं

आखिर यमुना काली क्यों है? - यमुना नदी की कहानी : Why Yamuna River is Black?

आज हम ये पता करेंगे की क्यों यमुना काली है . हमारे शास्त्रों में भी ये लिखा है की यमुना नदी काली है और गंगा नदी सफ़ेद है यमुना भी गंगा की तरह भारत की सबसे प्राचीन और पवित्र नदी मानी जाती है क्युकी द्वापरयुग में यमुना कृष्णा जन्म से लेकर द्वापरयुग के अंत तक यमुना का वर्णन होता रहा है. हमारे शास्त्रों के अनुसार यमुना सूर्य की पुत्री, यमराज

महाशिवरात्रि की पवित्र, प्राचीन महिमा और प्रामणिक कथा

पुराण में चार प्रकार के शिवरात्रि पूजन का वर्णन है। मासिक शिवरात्रि, प्रथम आदि शिवरात्रि, तथा महाशिवरात्रि। पुराण वर्णित अंतिम शिवरात्रि है-नित्य शिवरात्रि। वस्तुत: प्रत्येक रात्रि ही ‘शिवरात्रि’ है अगर हम उन परम कल्याणकारी आशुतोष भगवान में स्वयं को लीन कर दें तथा कल्याण मार्ग का अनुसरण करें, वही शिवरात्रि का सच्चा व्रत है। शिव की आराधना करने वाले उन्हें प्रसन्न करने के लिए भांग और धतूरा चढ़ाते हैं. इस

महादेव शिव जी के अर्द्धनारीश्वर अवतार की कथा – Shiv Ji Ardhnarishwar Story in Hindi

आपने अपने घर या जहा कही भी शिव जी और पारवती माँ की फोटो को एक साथ जुड़े हुए (अर्धनारेश्वर रूप ) देखा है तो जरूर सोचा होगा की इसके पीछे की कहानी क्या है. इस स्वरूप में संसार के विकास की कहानी छुपी है। शिव पुराण, नारद पुराण सहित दूसरे अन्य पुराण भी कहते हैं कि अगर शिव और माता पार्वती इस स्वरूप को धारण नहीं करते तो सृष्टि

जानिए शिवमहापुराण की महिमा आसान शब्दो में

शिव महापुराण एक ऐसा महान प्राचीन पुराण है जिसके सुनने और सुनाने से मनुष्य जन्मो के पापो से मुक्त हो जाता है, यह शिवपुराण ग्रन्थ चौबीस हजार श्लोको से युक्त है और इसकी सात हज़ार सहिंताएं है. आज हम आपको शिव महापुराण की महिमा के बारे में एक प्राचीन कहानी के द्वारा बताएँगे जिसे शिव महापुराण के माहात्म्य से लिया गया है. शिव महापुराण में सूत जी शिव महापुराण की

क्यों निर्वस्त्र स्नान नहीं करना चाहिए, श्रीकृष्ण ने बताया था

हिन्दू धर्म ग्रंथों में बहुत सी उपयोगी बातों का जिक्र किया गया है, उन्हीं में से कुछ खास बातें हम आपको बताने जा रहे हैं। हम में से अधिकांश व्यक्ति पूर्णत: निर्वस्त्र होकर स्नान करते हैं लेकिन श्रीकृष्ण के अनुसार ऐसा कदापि नहीं करना चाहिए। पद्मपुराण के अंतर्गत निर्वस्त्र होकर स्नान करने को निषेध कर्म माना गया है। अब ऐसा क्यों, ये जानने की कोशिश करते हैं पद्मपुराण के अनुसार

How to become a good wife in Hindi

अगर आपकी पत्नी में है ये चार गुण तो आप है दुनिआ के भाग्यशाली व्यक्ति हिंदू धर्म में पत्नी को पति की अर्धांगिनी भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है पत्नी पति के शरीर का आधा अंग होती है। आपने शिव जी और पारवती माँ का अर्धनारीश्वर रूप मंदिर में जरूर देखा होगा, जो बताते है की कैसे स्त्री और पुरुष एक दूसरे के पूरक है. कैसे प्रकर्ति इस सृष्टि

भारत का मंदिर जो दिन में दो बार गायब होता है : Shree Stambheshwar Mahadev

भारत का मंदिर (Shree Stambheshwar Mahadev) जो दिन में दो बार गायब होता है : अतुल्य भारत  India’s temple twice a day is missing : incredible India बिलकुल सही सुना आपने, वाकई एक मंदिर ऐसा भी है भारत में जो रोज़ समुंदर की लहरों में गायब हो जाता है और फिर दिखने लगता है. यह घटना प्रतिदिन सुबह और शाम को घटित होती है। यह मंदिर गुजरात के बड़ोदरा से 85