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एक बार नारद ने कृष्ण से पूछा की “माया” क्या होती है आखिर इस “माया” का संसार में क्या अर्थ है, तो कृष्णा बोले ” हे नारद इसे आपको समझना नहीं बल्कि महसूस करना चाहिए, आइये हम अपने रथ पर सवार हो कर आगे जंगल का भ्रमड करने के लिए चलते है”

घने जंगल में पहुंचने के बाद एक स्थान पर कृष्ण रथ को रोकते है और नारद से कहते है ” हे नारद मुझे प्यास लग रही है, आप भी प्यासे प्रतीत हो रहे है, मुझे पेड़ों के उस पर नदी के बहने की आवाज़ आ रही है, पानी की कल कल से मेरी प्यास बढती जा रही है, लेकिन में अब इतना थक चूका हु की में चल कर नदी से पानी नहीं ला सकता. आप कृपया ऐसा करे की आप भी अपनी प्यास को नदी के पास जाकर शांत करे और वापस आते समय थोड़ा जल मेरे लिए भी लेते आये, लेकिन पानी पी लेने से पहले स्नान अवश्य कर लेना ”

नारद ने नदी की और प्रस्थान किया पर जितना नदी का जितना पास होने का अनुमान कृष्ण ने लगाया था वो नदी काफी दूर थी और वहा तक नारद पहुंचते पहुंचते स्नान करने की बात भूल गए, और जैसे ही उन्होंने नदी का पानी पिया वैसे ही वो एक अति सुन्दर स्त्री के रूप में परिवर्तित हो गए और वो भूल गए की वो कभी एक पुरुष थे.

तभी वहाँ से गुजरने वाले किसी राहगीर पुरुष ने नारी रूप नारद को देखा तो सुंदरता पर मोहित हो गया और नारद से विवाह करने की जिद करने लगा. नारद उसकी खुशामद से इतने खुश हुए की उन्होंने विवाह करने की स्वीकृति दे डाली और वैवाहिक जीवन व्यतीत करने लगे और उन दोनों ने यहाँ साठ संतानो को जन्म दिया
लेकिन तभी वहाँ पर महामारी फ़ैल गयी जिसमे नारद के सारे पुत्र अवं पति म्रत्यु को प्राप्त हो गए. नारद को इस घटना से बहुत दुःख हुआ और वो अपना जीवन समाप्त करने की सोचने लगे, लेकिन ज्यादा कुछ सोच पाते उन्हें बहुत तेज़ी सी भूख लगने लगी, और वो जीवन समाप्त करने की बात भूलकर, भूख को समाप्त करने की सोचने लगे.
नारद रुपी स्त्री ने ऊपर देखा तो उनको पास के वृक्ष पर पके हुए आम दिखाई दिए उन्होंने उन आम तक पहुंचने का बहुत प्रयास किया पर वो काफी ऊँचे लगे हुए थे. तो उन्होंने अपने पति एवं पुत्रों की लाशो को घसीट कर सीडिया बना ली और उन पर चढ़ कर आम को तोड़ लिए और जैसे ही खाने चले वैसे ही वहाँ पर एक ब्राह्मण देव प्रकट हुए और बोले की ” हे देवी इन आमो को खाने से पहले स्नान कर लो क्युकी आप मृत देहो को छूने के कारन दूषित हो गयी है,”

नारद स्नान करने के लिए नदी में घुसे पर एक हाथ में उन्होंने आम को पकड़ रख था. और उस हाथ को पानी के ऊपर ही रखा . क्युकी उन्हें डर था की पानी का तेज़ बहाव कही आम को न बहा ले जाये. लेकिन जब वो पानी के बाहर आये तो एक बार फिर से वो पुरुष के रूप में परिवर्तित हो चुके थे. लेकिन जो हाथ उन्होंने पानी के ऊपर रखा हुआ था उसमे अभी भी चूड़िया और आम था जिसे उन्होंने स्त्री होने के समय पहन और पकड़ रख था.

और अचानक ही उन्हें वो सब याद आ गया जो स्त्री रहते हुए उनके साथ घटित हुआ था. और जो ब्राह्मण देव प्रकट हुए थे वो वास्तव में श्री कृष्ण थे. जिन्होंने नारद को माया का अर्थ समझाने के लिए एक माया रची थी.
अब श्री कृष्ण ने नारद से पूछा की ” हे नारद आपने माया का एक रूप महसूस किया, आपको क्या समझ आया ?”
नारद बोले कैसे मेने औरत बनकर एक पुरुष को अपनी और आकर्षित करने का आनंद उठाया, कैसे मेने वैवाहिक जीवन का आनंद लिया, कैसे मेने संतान की चाहत का आनंद लिया, और कैसे मेने अपने पति और संतान की म्रत्यु का दुःख झेला, और उसी दुःख को भूलकर कैसे में अपनी भूख को शांत करने की चेष्टा करने लगा . यही माया है जो इच्छा की संतुष्टि के लिए मति भ्रम कर देता है, सब कुछ भूल जाने को विवश कर देती है सिवाय आत्म-तुष्टि के ”

नारद को अब सब कुछ मिल चूका था. उन्होंने अपना नारी वाला हाथ जिसमे आम पकड़ा हुआ था, पानी में डुबो दिया तो फिर से पुरुष के हाथ जैसा हो गया और वो आम एक तम्बूरे में परिवर्तित हो गया. जिसे नारद हमेशा हमेशा के लिए साथ रखने लगे.

यह प्रसंग शिक्षा के महत्त्व से बहुत महत्वपूर्ण है क्युकी यहाँ आपको दो बातें जानने को मिलेगी, पहला की माया क्या है और दूसरा की नारद के पास तम्बूरा कैसे आया. तो चलिए पड़ते है इस हफ्ते की शिक्षाप्रद कहानी हिंदीहैहम.कॉम के साथ .

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