सावन के महीने में सोमवार का महत्व

सावन के महीने में सोमवार का महत्त्व

हम सब जानते है हमारे देश में मुख्यतः तीन प्रकार के मौसम होते है| और ये सभी मौसम 4-4 महीने के लिए आते है जैसे –

  1. गर्मी का मौसम
  2. ठण्ड का मौसम
  3. बरसात का मौसम

वैसे तो अपनी – अपनी जगह सभी मौसम का अपना एक अलग महत्त्व और सौंदर्य होता है लेकिन इन सभी में बरसात के मौसम का अपना एक अलग ही महत्त्व व सौन्दर्य है क्योंकि इसके आते ही चारों तरफ हरियाली ही हरियाली छा जाती है जो हमारे मन को एक अलग सी ही खुशी देती है जिसकी व्याख्या हम शब्दों में नहीं कर सकते है| और इसी मौसम के अंतर्गत आता है सावन का महीना ,सावन का नाम सुनते ही हमारे मन में सबसे पहला ख्याल आता है सावन सोमवार का ,जिसमे भगवान शिव की स्तुति की जाती है और व्रत रखा जाता है| लेकिन क्या आप जानते है कि सावन के महीने में सोमवार के व्रत का इतना महत्त्व क्यों होता है ,इस व्रत को कैसे करना चाहिए ताकि इस व्रत का पूरा लाभ मिल सके और भगवान शिव की कृपा हम पर हो जाये| आज हम इन्ही सब बातो की जानकारी आप को देने जा रहे है|

सावन सोमवार व्रत का इतिहास व कथा -:

सोमवार का दिन शिव भगवान का होता है उस दिन शिव की आराधना व व्रत करने से वे प्रसन्न होते है| लेकिन जब ये सोमवार का व्रत सावन के महीने में रखा जाता है तो इसका अपना एक अलग ही महत्त्व होता है क्योंकि सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है| इस महीने में जो भी सोमवार का व्रत रखते है उन पर शिव की विशेष कृपा होती है और उनकी सभी मनोकामनाओं को भगवान पूरा करते है| भगवान शिव को ये महीना इतना प्रिय क्यों है इसके पीछे एक कथा है –

जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के यह अपनी योगशक्ति के माध्यम अपने शरीर का त्याग कर दिया था| तब भगवान शिव बहुत ही क्रोधित हुए और उन्होंने समाधि ले ली थी| लेकिन माता सती ने हर जन्म में भगवान शिव को ही पति के रूप में पाने की प्रतिज्ञा ली थी| इसी वचन को पूरा करने के लिए माता सती ने हिमालय राज के घर रानी मैना के गर्भ से जन्म लिया और उनका नाम पार्वती रखा गया| कहा जाता है –“ माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए पुरे सावन के महीने में कठोर तप किया बिना कुछ खाए पीये ,तभी भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उनकी मनोकामना पूरी की ,और उनसे विवाह किया| “

तभी से ये सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और जो कोई भी इस महीने में सोमवार का व्रत रखता है तो उस पर शिव और पार्वती दोनों की ही कृपा होती है| तथा इसी कारण कुंवारी कन्या भी अच्छे वर के लिए इस व्रत को करती है ताकि उन्हें मन पसंद वर मिल सके|

वैसे धार्मिक मान्यता तो ये भी है कि सावन के महीने में ही भगवान शिव ने धरती पर आकर अपने ससुराल में विचरण किया था ,और उनके ससुराल में अभिषेक करके उनका स्वागत किया गया था इसलिए इस महीने में शिव भगवान के अभिषेक का विशेष महत्त्व होता है| कुछ लोगों का कहना तो ये भी है कि इसी महीने में महादेव ने समुद्र मंथन से निकलने वाले हलाहल विष को पीकर अपने कंठ में रखा था और इस विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवतओं ने भगवान शिव पर जल चढ़ाया था तभी से इस महीने में शिव भगवान का जल से अभिषेक करना शुभ माना गया है|

पूजा करने की विधि -:

वैसे सभी लोगों का सावन सोमवार का व्रत करने का अपना एक अलग तरीका होता है| कहते है- पूजा किसी भी तरीके से की जाये लेकिन सच्चे मन से करना चाहिए क्योंकि भगवान ये नहीं देखते है कि मेरी पूजा में किसने क्या ,और कितना चढ़ाया वे तो केवल ये देखते है कि पूजा करने वाले का भाव कैसा है ,उसका मन कितना सच्चा है और वे केवल आपकी भक्ति को देखकर ही प्रसन्न हो जाते है और आपकी सभी इच्छाओ की पूर्ति कर देते है| लेकिन फिर भी अगर किसी व्रत को सही तरीके से किया जाये तो उसका लाभ हमें ओर अधिक प्राप्त होता है| इसलिय आज हम आपको इस व्रत के करने का सही तरीका बताने जा रहे है जो इस प्रकार है –

सावन के पहले सोमवार को सुबह से ही उठ बैठे और पुरे घर की अच्छे से सफाई कर ले और स्नान कर ले| इसके बाद पूजा करने के लिए पूर्व दिशा में आसन डालकर बैठ जाये और शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए जरुरी सामग्री रख ले जैसे – दूध या दही  ,घी ,शक्कर ,शहद और गंगा जल| इसे पंचामृत भी कहते है| इसके अलावा शिवलिंग पर चढाने के लिए बेलपत्र ,सफेद फूल , सफेद वस्त्र ,धतूरा ,बेलफल ,भांग ,चंदन ,रोली ,चावल , प्रसाद आदि पूजा की थाली में रख ले और एक घी का दीपक भी जला कर रखे ,इसके अलावा एक तांबे के लोटे में जल भी रख ले|

अब सबसे पहले शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करेंगे उसके बाद शिवलिंग पर जल चढ़ाएंगे ,फिर चंदन और रोली से तिलक करेंगे ,उसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र ,बेलफल ,फूल ,भांग ,चावल और प्रसाद चढ़ाएंगे ,और घी  का दीपक जलाकर शिव चालीसा का पाठ करके शिव भगवान की आरती करेंगे| अगर आप चाहे तो 16 सोमवार की व्रत कथा का पाठ भी कर सकते है| इसके अलावा इस मंत्र का जाप भी कर सकते है –

ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्जवलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम !!

अब प्रसाद सभी को बांट दे और पूजा का समापन करे| और पुरे दिन शिव का ध्यान करे ताकि गलत विचार मन में न आये| शिव भगवान की दिन में 2 बार स्तुति करना चाहिए एक सुबह के समय और दूसरी शाम के समय| शाम को स्तुति करने के लिए आप स्नान कर ले , या फिर आप हाथ-मुंह धोकर भी आप पूजा कर सकते है| शाम को भी घी का दीपक जलाकर शिव भगवान की आरती करते है और ध्यान लगाते है, और उनसे अपनी मनोकामना को पूरा करने की विनती करते है| आप सावन सोमवार के व्रत में एक टाइम शाम के समय आरती करने के बाद खाना भी खा सकते है ,और अगर आप में शक्ति हो तो केवल फल खाकर भी व्रत कर सके है| इसी प्रकार सावन माह में आने वाले प्रत्येक सोमवार का व्रत रखा जाता है| ये व्रत आपकी सभी मनोकामनाओ को पूरा करता है और इस व्रत को करने वाले पर भगवान शिव की कृपा भी होती है|

 

 

 

 

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