कुंडली में राक्षस गण क्यों विशेष होता है अन्य गणों से?

इस दुनिया में बहुत इस ऐसी चीज़े है जिनकी बारे में मानव हर संभव प्रयास करने की कोशिश करता रहता है पर फिर भी बहुत सी ऐसी बातें है जिन्हें हम जानकार भी अनजान करते है. अगर आपकी कुंडली गण के सामने राक्षस लिखा हुआ है तो आपको घबराने की जरुरत नहीं बल्कि आप अन्य लोगो से स्पेशल हो सकते है.

ज्योतिष के अनुसार कुंडली में कितने गण होते है?
ज्योतिष शास्त्र में जन्म के समय मौजूद नक्षत्रों की भूमिका बहुत बड़ी होती है। आप किस ग्रह के अंतर्गत जन्में हैं, किस राशि के अधीन आते हैं और आपके जन्म का नक्षत्र क्या था, ये बात आपके पूरे जीवन की रूप रेखा खींच देती है। जन्म नक्षत्र ही मानुष के गण का निर्धारण करता है.गण ३ प्रकार के ही होते है गण का निर्धारण बच्चे के जन्म नक्षत्र के अनुसार होता है. ये ३ गण है , देव गण, मानव गण, और राक्षस गण.

गणों की क्या खूबियां है?
देवगण : जिस मनुष्य की कुंडली में देव गण है वह दानी, बुद्धिमान, कम खाने वाला और कोमल हृदय का होता है। ऐसे व्यक्ति के विचार बहुत उत्तम होते हैं, वह अपने से पहले दूसरों का हित सोचता है।
मनुष्य गण : जिस मनुष्य की कुंडली में मनुष्य गण है वह धनवान होने के साथ ही धनुर्विद्या के अच्छे जानकार होते हैं। उनके नेत्र बड़े-बड़े होते हैं साथ ही वह समाज में काफी सम्मान पाते हैं और लोग उसकी बात को ऊपर रखकर चलते हैं।
राक्षण गण : लेकिन आपका गण अगर राक्षस है तो आपको राक्षस नाम से डरने के जरूर नहीं है क्योंकि आप दोनों गणों के लोगो में विशेष खुबिया रखते है. उन खूबियों को आप निचे पड़ सकते है.

गण को कैसे पता करे?
इसके लिए अगर आपको अपनी जन्म समय, तारिख, और जगह याद है तो ऑनलाइन कुंडली निकल सकते है जिसमे आपको गण दिया रहता है, या आपको जन्म नक्षत्र पता है तब भी आप पता कर सकते है की आप राक्षस गण से या नहीं. गण के आधार पर मनुष्य का स्वभाव और उसका चरित्र भी बताया गया है।

किस नक्षत्र में जन्में लोग राक्षण गण के माने जाते हैं?
अश्लेषा, विशाखा, कृत्तिका, मघा, ज्येष्ठा, मूल, धनिष्ठा, शतभिषा नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग राक्षण गण के अधीन माने जाते हैं।

राक्षस गण की क्या खुबिया है?
हमारे आसपास भिन्न-भिन्न तरह की शक्तियां मौजूद होती हैं, उनमें से कुछ नकारात्मक होती हैं तो कुछ सकारात्मक। ज्योतिष विद्या के अनुसार जिन लोगों का संबंध राक्षस गण से होता है वह अपने आसपास मौजूद नकारात्मक शक्तियों को पहचान लेते हैं। उन्हें बुरी शक्तियों का आभास अपेक्षाकृत जल्दी हो जाता है। राक्षस गण के जातकों की छठी इन्द्री यानि कि सिक्स्थ सेंस ज्यादा बेहतर तरीके से कार्य करता है और वो इतनी क्षमता भी रखते हैं कि जब उनके सामने हालात नकारात्मक होते हैं तो वे भयभीत होने की बजाय उन हालातों का सामना करते हैं। राक्षस गण के जातक साहसी और मजबूत इच्छाशक्ति वाले होते हैं, उनके जीने का तरीका स्वच्छंद होता है। तो अगर आपको भी लगता है कि आपके भीतर भी राक्षस गण जैसे गुण या विशेषताएं मौजूद हैं तो एक बार किसी अच्छे ज्योतिष से अपनी कुंडली जरूर चेक करवा लें।

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Originally posted 2017-01-07 10:49:55.

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