डिप्रेशन क्या है ? कैसे पहचाने और Depression से बाहर निकलें?

क्या आपको ये लगता है की आप जो भी काम करते है उसमे सिर्फ और सिर्फ निराशा ही हाथ लगाती है?, क्या भाग्य आपका साथ नहीं दे रहा?, क्या आपका भगवान आपसे रूठा हुआ है? आदि आदि बातें आप सोचते है और आप हर छोटी मोटी बात को बहुत ही सीरियस लेते है? तो इसमें आपके भाग्य से ज्यादा आप दोषी हो सकते है ? जानना चाहेंगे कैसे? वो ऐसे की हो सकता है आप डिप्रेशन की बिमारी से झूझ रहे हो ? तो चलिए आज हम पता करते है की डिप्रेशन क्या है ?

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डिप्रेशन (Depression ) क्या है ?
यह हर जीव के अंदर पाया जाने वाला भाव है. जिससे दुनिया की लगभग 10% आबादी प्रभावित हैं। बिलकुल मनुष्य में ये भाव बहुत ही जल्दी आता है क्युकी मनुष्य का मस्तिस्क बहुत विकसित होता है. तनाव हर इंसान के अंदर थोड़े न थोड़े समय के लिए आता जाता रहता है, पर अगर किसी के मस्तिस्क में ये बस जाये तो ये बहुत ही भयानक बिमारी का रूप ले लेती है जिसमे मनुस्य अपनी या किसी और की जान तक ले लेता है.

 

डिप्रेशन का मतलब सिर्फ उदास होना नहीं होता :

डिप्रेशन और उदासी को एक नहीं समझना चाहिए, उदासी आपको हो सकती है मान लो आपकी नौकरी छूट जाये, बिज़नेस में नुकसान हो जाये, किसी का एक्सीडेंट या हॉस्पिटल का बिल ज्यादा हो जाये, कोई आपसे दूर हो जाये आदि आदि घटनाओं पर. बिलकुल आप ऐसे मौको पर खुश तो होंगे नहीं इंसान का भाव है जो ख़ुशी में खुश और दुखी में दुःख व्यक्त करता है. पर …

मान लो आप किसी एक कारण से उदास हो गए .और जब आने वाले दिनों में ख़ुशी के कितने भी कारण आये आप तब भी उदास ही रहते है इसका सीधा सा मतलब है “की ज़िंदगी आपकी आगे निकल गयी और आप उसी समय चक्र में फसे रह गए. आप अपने आप को उसी दिन, तारिख और टाइम में पड़े पड़े दुखी करते रहते है?” आखिर क्यों? और कब तक? क्या वो समय आपको नहीं छोड़ रहा या आप उस बुरे समय को नहीं छोड़ना चाहते? ये आपको जरूर सोचना चाहिए. नहीं तो वो बुरा समय आपको निगल लेगा.

आप सिर्फ एक बात के बारे में उदास महसूस नहीं करते, आप हर चीज को लेकर उदास महसूस करते हैं। और आपके इस मूड से बाहर आने के प्रयत्न के बाबजूद, वो भावना आपका पीछा नहीं छोड़ती। वास्तव में, आप डिप्रेशन महसूस करते हैं और आपको उसका कारण भी पता नहीं होता। डिप्रेशन का मतलब महज़ दुखी या उदास होना नहीं होता. लेकिन जब इसके साथ ना-उम्मीदी, नींद न आना, भूख न लगना, चिड़चिड़ापन आदि जैसी समस्याएं भी जुड़ जाएं, तो समझिये मामाला ‘खतरे के निशान’ से ऊपर उठ चुका है और अब आपको एक डॉक्टर दोस्त या परिवार की जरुरत है.

डिप्रेशन के लक्षण जानिए और उसे दूर करिए?
वैसे तो हर इन्सान को कोई न कोई तनाव होता ही है, पर कोई तनाव अगर आपके मन में वस जाये या वही तनाव आपको बदलने लगे तो इसके भयानक परिणाम सामने आने लगते है.

डिप्रेशन के कुछ सामान्य लक्षण इस तरह है.

1. हर बात पर मन में चिड़चिड़ापन रहना ..मतलब आपको लगता है सब बुरा ही बुरा है.
2. किसी भी काम में मन न लगना
3. ज़िंदगी और भविष्य के प्रति नाउम्मीद हो जाना मतलब खुद को बेकार समझने लगना,
4. खुद को बेकार समझने लगना,
5. किसी अनजाने डर के काऱण धीरे-धीरे बोलना या बोलना बंद कर देना.
6. खान-पान में बदलाव ( ज़रूरत से ज्यादा/कम भूख लगना) क्युकी आप खाते समय कुछ सोच रहे होते है.
7. सोने के समय में बदलाव ( ज़रूरत से ज्यादा/कम नींद आना),
8. शरीर में ऊर्जा के स्तर में कमी, घबराहट महसूस करना,
9. ध्यान लगाने, फैसले लेने, सोच-विचार करने में अड़चन महसूस करना,
10. आत्महत्या को ही हर समस्या का समाधान समझना.
11.वजन में अस्थिरता
12.शारीरिक लक्षण, जैसे दर्द या सिरदर्द

डिप्रेशन (Depression) में क्या करे ?

अब अगर आप डिप्रेशन (Depression ) या किसी बुरे समय में फसे हुए है तो आप :

  • ज्यादा से ज्यादा बात करे दोस्तों से और फॅमिली से, और उन्हें आप बताये की आप कहा फसे हुए है. हो सकता है वो आपको इग्नोर करे या न समझे पर इसका बुरा न माने बल्कि ये सोचे की आपने अपने मन का बोझ हल्का कर लिया.
  • डिप्रेशन दूसरी मानसिक और शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकता है। अपने अनुभवों को चिकित्सक से बांटना महत्वपूर्ण है। आपका सामान्य चिकित्सक आपको किसी मनोरोग विशेषज्ञ से मिलने की सलाह दे सकता है, जो आपका बेहतर इलाज कर सके।
  • किसी मित्र या परिवार के सदस्य को डॉक्टर से मिलने जाते हुए साथ ले जाएँ। वो आपको डॉक्टर को बताने की बातों की याद दिलाने में मदद कर सकते है, और डॉक्टर की कही बातें आपको याद दिलाने में भी मदद कर सकते है।
  • यदि आपके डॉक्टर ने डिप्रेशन के लिए आपको दवाये दी हों, तो बताये गए समय और मात्रा में दवायें लें। डॉक्टर से बात करे बिना दवाये लेना बंद न करें।
    चिकित्सक जाने की इच्छा न होने पर भी जाएँ। प्रभावी इलाज के लिए नियमित उपस्तिथि बहुत महत्वपूर्ण है।
  • रोज सकारात्मक कल्पनायें करने का अभ्यास करें, क्लिनिकल भाषा में इसे कॉग्निटिव बिहेवियरल थैरेपी (cognitive behavioral therapy) कहते है, और यह डिप्रेशन के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली सबसे आम थैरेपी है
  • शारीरिक गतिविधियाँ डिप्रेशन के लक्षणों को कम करतीं हैं। इसलिए व्यायाम करें.
  • अगर जरूरी हो तो अपने दायित्वों को कम करें। खुद का ध्यान रखने के लिए समय निकालें।
  • सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत महत्वपूर्ण है। अगर आपको नींद आने में परेशानी हो तो अपने डॉक्टर से बात करें।
  • शराब, निकोटीन या अवैध ड्रग्स का दुरूपयोग डिप्रेशन के जोखिम को बढ़ाता है। दीर्घकाल में ये डिप्रेशन को और ख़राब स्थिति में पंहुचा देंगे। यदि आपको यह छोड़ने में मदद की आवश्यकता हो, तो किसी स्थानीय नशा मुक्ति केंद्र से संपर्क करें।
  • बेहतर सम्पूर्ण स्वास्थ्य और मूड में सुधार के लिए फलों, सब्जियों, मछली, हलके मीट और साबुत अनाज से भरपूर आहार का आनंद लें।

जरुरी सलाह :
अगर आपको आत्महत्या के विचार आ रहें है, तो तुरंत किसी को बुलाएँ। आपात कालीन नंबर पर या निकट के अस्पताल में फ़ोन करें। एक बीमारी है ये किसी को भी सकती है

यहाँ श्रीकृष्ण जी का एक उपदेश जरूर ध्यान रखे जो उन्होंने अर्जुन को दिया था:
अर्जुन ने उदास होकर अपने गांडीव व् गदा को रथ के किनारे पर रखकर उदास हो कर बैठ गया उसको ये चिंता खाये जा रही थी की जिनकी वो गोद में पला बड़ा हुआ है उनको सिर्फ राज्य के लिए कैसे मारे. उसको सही गलत कुछ भी सूझ नहीं रहा था. वो चिंता के सागर (डिप्रेशन ) में डूबता जा रहा था.
तब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाया और कहा की हे कौन्तेय! अगर तुम युद्ध में मारे गए तो स्वर्ग भोगोगे और यदि जीवित बचे तो धरती का राज्य भोगोगे, पर हे! अर्जुन अगर तुम भाग गए यहाँ से तो कुछ भी नहीं मिलेगा और इतिहास तुम्हारी आने वाली पीडियो को धिक्कारेगा. इसलिए खड़े हो जाओ और युद्ध करो जिसमे जीतकर भी जीत है और हारकर भी जीत है. 

हमारे दादा दादी बताते थे की “चिंता मरे हुए इंसान को जलाती है जबकि चिंता जिन्दा इंसान को जला डालती है”

 

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