जानिये कुश्ती / दंगल या द्वंद्वयुद्ध का इतिहास, खेल और नियम

हमारे भारत देश में अनेक प्रकार के खेल खेले जाते है| जिनके अपने अलग-अलग महत्व और लाभ है| खेल चाहे कोई भी हो ,वह हमें आनन्द प्रदान करता है| खेल के जरिए हम अपना मनोरंजन भी कर सकते है और साथ में अपना शरीर भी स्वस्थ रख सकते है| तथा खेल के माध्यम से रूपये भी कमाये जा सकते है| लेकिन ये खेल की योग्यता पर निर्भर करता है कि इससे रूपये कमाये जा सकते है कि नहीं| कुछ खेल ऐसे होते है जो लोगों को अपनी तरफ बहुत ज्यादा आकर्षित करते है जैसे क्रिकेट ,फुटबाल और हाँकी इन खेलों को लोग घंटो तक बैठे देखते रहते है| और इन खेलों को खेलने वाले खिलाडियों को पैसा भी बहुत मिलता है| आज हम आपको एक ऐसे ही खेल के बारे में बताने जा रहे है जो कि प्राचीनकाल से खेला जा रहा है उसका नाम है कुश्ती|
कुश्ती या दंगल बहुत ही मनोरंजक खेल होता है जो कि दो लोगों के बीच में खेला जाता है| इसमें एक को जीत मिलती है तो दुसरे को हार| आप लोगों ने देखा होगा कि गांव के लोग कुश्ती का खेल बहुत ज्यादा पसंद करते है| जब भी गांव में कुश्ती का खेल आयोजित होता है तो लोगों की भीड़ लग जाती है| और जीतने वाले खिलाडी को देखने वाले लोग बहुत सारा पैसा भी देते है| कुश्ती खेलने वाले खिलाडियों का शरीर स्वस्थ और सुडोल होता है ,वे नियमित रूप से व्यायाम और कठोर परिश्रम करते है|
कुश्ती का इतिहास -: अगर हम कुश्ती के इतिहास के बारे में बात करे और यह सोचे कि कुश्ती का आरंभ कहाँ से और कैसे हुआ होगा तो हम यह सोच सकते है कि कुश्ती का आरंभ उस युग में हुआ होगा| जब मनुष्य शास्त्र का उपयोग नहीं जानता होगा| और वह आपस में बिना शस्त्र के ही अपनी ताकत के दम पर लड़ता होगा| इस प्रकार के युद्ध को द्वंद्वयुद्ध / मल्लयुद्ध कहते थे ये केवल शारीरिक बल के सहारे ही लड़ा जाता था|
भारत में कुश्ती अर्थात द्वन्द्युद्ध का उल्लेख हमारे भारतीय पुराणों में भी मिलता है जैसे महाभारत में भीम और दुर्योधन का युद्ध, जरासंध और भीम का युद्ध, एवं रामायण में बाली और सुग्रीव का युद्ध. इस प्रकार मल्लयुद्ध के दांव-पेंचों से ही धीरे-धीरे कुश्ती का विकास हुआ होगा.

कुश्ती के दांव-पेंच –: वैसे तो कुश्ती के अनेक दांव होते है लेकिन इनमे से हम आपको कुछ दांव-पेंचों के बारे में बताने जा रहे है जो इस प्रकार है –

•कलाजंग दांव – ये भारत का सबसे पुराना दांव है इसमें एक पहलवान अपने विरोधी पहलवान को उसके पेट के बल अपने कंधे पर उठा लेता है फिर पीठ के बल पटक देता है|

जांघिया दांव – जैसा कि हम जानते है कुश्ती करते समय जांघिया पहनना जरुरी होता है| जिसे हम लंगोट भी कहते है| इस जांघिया से एक दांव भी जुड़ा है जिसे जांघिया दांव कहते है| इसमें पहलवान एक दुसरे का जांघिया पकड़ लेते है और जो भी पहलवान पहले अपने विरोधी को पैर उठाकर पटक देता है वो जीत जाता है|

टंगी दांव -: इस दांव में एक पहलवान अपने विरोधी पहलवान को टांग में दबा लेता है इस दांव का फायदा हमेशा बड़े पहलवान को ही मिलता है| और इस दांव से बड़े-बड़े पहलवान चित हो जाते है|

निकाल दांव -: इस दांव में एक पहलवान अचानक अपने विरोधी पहलवान की टांगो में से निकल जाता है और उसे कंधो से उठाकर जमीन पर पटक देता है| एक बड़े और भारी पहलवान के विरुध इस दांव को लगाना काफी कठिन होता है| ये दांव गांव में काफी पसंद किया जाता है|

सांडीतोड़ दांव -: सांडीतोड़ का मतलब होता है हाथ मरोड़ देना| इसमें एक पहलवान अपने विरोधी पहलवान का हाथ मरोड़ देता है|

बगलडूब दांव -: इस दांव में एक पहलवान अपने विरोधी पहलवान के बगल से निकल जाता है|

कुश्ती के वर्ग -: कुश्ती को कई श्रेणी या वर्ग में बांटा गया है जो इस प्रकार है –
• फ्लाई वेट
• फेदर वेट
• लाईट वेट
• मिडिल वेट
• लाईट हेवी वेट
• हेवी वेट
• बैंटेम वेट

कुश्ती के पहलवान की डाइट -: जो पहलवान कुश्ती लड़ते है| वे अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखते है तथा पौष्टिक आहार का सेवन करते है| नियमित व्यायाम और नियमित रूप से ही कुश्ती का अभ्यास करते है| वे अपनी डाइट में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखते है –
• वे दूध ,घी और बादाम का नियमित रूप से सेवन करते है|
• अधिक शक्तिशाली बनने के लिए कुछ पहलवान मांस और अंडो का सेवन भी करते है|
• सुबह उठकर नियमित रूप से कुश्ती का अभ्यास करते है|
• हरी साग-सब्जी का अधिक सेवन करते है|

कुश्ती लड़ने वाले भारतीय पहलवान -:
• गामा पहलवान
• खाशाबा जाधव
• मारुती माने
• दारा सिंह
• गुरु हनुमान
• सतपाल सिंह
• सुशील कुमार
• हरिश्चन्द्र बिराजदार
• योगेश्वर दत्त
इसके अलावा भी कुश्ती के बारे में बहुत सी महत्त्वपूर्ण जानकारिया है जो हम आपको अपने अगले लेख में बतायेंगे|

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Originally posted 2018-03-12 13:13:27.

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