शंखपुष्पी के चमत्कारिक गुण, लाभ और नुकसान

शंखपुष्पी का आयुर्वेद में अपना एक अलग और विशेष स्थान हैं क्योंकि शंखपुष्पी शांतिदायक और बुद्धिवर्धक वनस्पति होती हैं| यह मानसिक रोगों को दूर करने , मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करने वाली उत्तम औषधि है| ज्वर तथा अनिद्रा रोग में इसका प्रयोग बहुत लाभदायक होता है शंखपुष्पी के इन सभी गुणों के कारण आयुर्वेद में उसे एक औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है|
शंखपुष्पी को संस्कृत में शंखपुष्पी, क्षीरपुष्पी, शंखमालिनी आदि कहते हैं| और इसका वैज्ञानिक नाम कोनोवुल्लूस प्लूरिकालिस हैं| शंखपुष्पी पर शंख के समान आकृति वाले सफ़ेद रंग के पुष्प आते है, इसी कारण इसे शंखपुष्पी कहा जाता हैं| इसे क्षीर पुष्पी (दूध के समान श्वेत रंग के पुष्प लगने के कारण), मांगल्य कुसुमा (जिसके दर्शन करने से सदैव मंगल हो) भी कहा जाता है| इसके अलावा भी इसे अनेक प्रकार के नामों से पुकारा जाता हैं|
शंखपुष्पी इस प्रकार की वनस्पति हैं जो भारत के समस्त पथरीली भूमि वाले जंगलों में पायी जाती है| यह वर्षा ऋतू में अपनी जड़ से पुनः उगने लगती है और शरद ऋतू में द्रवीभूत भूमि में घास के साथ फैल जाती है| इसके तने प्रायः एक से डेढ़ फ़ीट की लम्बाई तक फैलते हैं| इसकी जड़ अंगुली जितनी मोटी, और 1 से 2 इंच तक लम्बी होती है और ये सिरे पर चौड़ी व् नीचे संकरी होती जाती है| इसकी छाल मोटी होती है, जो बाहर से भूरे रंग की व् खुरदुरी होती है| अंदर की छाल और काष्ठ के बीच से दूध जैसा एक स्त्राव निकलता है जिसकी गंध ताजे तेल जैसी दाहक व् चरपरी जैसी होती है| इसका तना व् उसकी अग्रशाखाएं सूतली जैसी पतली और सफ़ेद रोम कूपों से भरी रहती हैं| इसके पत्ते आधे से एक इंच लम्बे, चौथाई इंच चौड़े, तीन शिराओं युक्त गहरे हरे रंग के होते हैं| इसकी पत्तियों को मसलने पर मूली के पत्तों जैसी गंध आती है| मई से दिसम्बर तक के समय इसमें पुष्पों के उपरान्त छोटे छोटे कुछ गोलाई लिए भूरे रंग के, चिकने तथा चमकदार फल लगते हैं| बीज भूरे या काले रंग के एक और तीन धार वाले, दूसरी और ढाल वाले होते हैं| बीज के दोनों और सफ़ेद रंग की झाईं दिखाई पड़ती है| शंखपुष्पी का पौधा तीन रंग के फूलों वाला होता हैं – लाल, सफेद और नीले| इसमें से सफेद रंग के फूलों वाला पौधा औषधि के रूप में सबसे अच्छा माना जाता हैं| और इसी का प्रयोग सबसे ज्यादा आयुर्वेदिक दवाइयों को बनाने में किया जाता हैं|
शंखपुष्पी के लाभ -:
• शंखपुष्पी सबसे ज्यादा स्मारण शक्ति को तेज करने में लाभदायक होती हैं| इसका महीन पिसा हुआ चूर्ण , एक-एक चम्मच सुबह- शाम , मीठे दूध के साथ या मिश्री की चाशनी के साथ सेवन करना चाहिए| ऐसा करने से दिमागी ताकत बढ़ती हैं|
• तनाव या अनिद्राजन्य उच्च रक्तचाप जैसी परिस्थितियों में शंखपुष्पी बहुत ही लाभकारी होती हैं|
• शंखपुष्पी तनाव को दूर करने में भी बहुत उपयोगी होता है ,क्योंकि इसके रसायन तनाव का शमन करके मस्तिष्क की उत्तेज़ना शांत करते है और दुष्प्रभाव रहित निद्रा लाते है|
• कुछ बच्चे बड़े हो जाने पर भी सोते हुए बिस्तर में पेशाब करने की आदत नहीं छोड़ते है , ऐसे बच्चों को आधा चम्मच शंखपुष्पी चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह शाम चटा कर ऊपर से ठंडा दूध या पानी पिलाना चाहिए| यह प्रयोग लगातार एक महीनें तक करना चाहिए ऐसा करने से उसकी ये आदत छुट जाती है|
• इस चूर्ण के सेवन से सभी प्रकार के मूत्र सम्बन्धी (प्रमेह रोग), खांसी, श्वांस रोग, पीलिया, बवासीर आदि में आराम मिल जाता है|
• शंखपुष्पी का महीन चूर्ण एक चम्मच और पीसी हुई काली मिर्च आधी चम्मच दोनों को मिला कर पानी के साथ देने से शुक्रमेह रोग ठीक होता है|
• ताजा शंखपुष्पी के जड़, तना, फल, फूल और पत्ते का रस 4 चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम रोजाना सेवन करने से कुछ महीनों में मिर्गी का रोग दूर हो जाता है|
• शंखपुष्पी के पत्तों को चबाकर उसका रस चूसने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है तथा आवाज साफ निकलने लगती है|
• शंखपुष्पी को तेल में पकाकर उस तेल को रोजाना बालों मे लगाने से बाल बढ़ जाते हैं|
• एक चम्मच शंखपुष्पी का चूर्ण रोजाना तीन बार पानी के साथ कुछ दिन तक सेवन करने से बवासीर का रोग ठीक हो जाता है|
• शंखपुष्पी के सेवन से हिस्टीरिया रोग में लाभ होता है|
• रोजाना सुबह और शाम को 3 से 6 ग्राम शंखपुष्पी की जड़ का सेवन करने से कब्ज या पेट की गैस भी दूर हो जाती है|
• शंखपुष्पी के रस का सुबह-शाम सेवन करने से कमजोरी दूर हो जाती है|
• यह नुरोटोक्सिकित्य का स्तर नियंत्रित करता है| ये न केवल एक तनाव से छुटकारा दिलाता है बल्कि एक एंटी डिप्रेसेंट की तरह काम करता है|
• शंखपुष्पी से हाइपरथायरोईडिसम का इलाज भी हो जाता है| तथा ये थायराइड हार्मोन का निर्माण करके शरीर की चयापचय की दर को नियंत्रित करता है|
• मलेरिया होने पर शंखपुष्पी की जड़ का चूर्ण अति लाभकारी होता है
जैसा कि हम जानते है शंखपुष्पी के फायदे बहुत सारे है और इसके दुष्प्रभाव भी कम होते है|

लेकिन इसके कुछ नुकसान भी होते है| इसलिए जब भी शंखपुष्पी का सेवन करे तो इन बातो का विशेष ध्यान रखे|
• गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए|
• तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए|
• चिकित्सक की सलाह से ही इसका सेवन करना चाहिए|
• स्तनपान करने वाली महिलाओं को भी इसका सेवन चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए|

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Originally posted 2018-01-01 17:00:43.

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