बच्चो की सेहत का ऋतु के अनुसार कैसे रखे ख्याल

छोटे बच्चो की प्रतिरोधक क्षमता बड़ो की तरह पूरी विकसित नहीं होती है | जिसके कारण वे जल्दी ही बीमारियों से ग्रस्त हो जाते है | लेकिन अगर हम कुछ खास बातो का ध्यान रखे तो इन्हें बीमारियों से बचाया भी जा सकता है |

अब हम आप को ऋतु के हिसाब से बच्चो की सेहत का ख्याल कैसे रखे ये बतायेगे | जो कि निम्नानुसार है –

बरसात का मौसम  -:

सबसे पहले बात करते है हम बरसात के मौसम कि  ,यूं तो बच्चों के लिए बारिश का मौसम और मानसून खूब सारी मस्ती लेकर आता है, लेकिन इस मौसम में बीमारियां भी काफी बढ़ती हैं. इस मौसम में बच्चों की सेहत का खास तौर पर ख्याल रखना होता है. बारिश का सीजन में बच्चे कई सारी बीमारियों को न्यौता देते हैं, ऐसे में वो बीमार ना हो जाएं इसलिए कुछ विशेष बातोँ ख्याल रखें

जैसे –

  • बरसात में पानी की वजह से कई सारी बीमारिया होती है| इसलिए बच्चो को हमेशा उबला हुआ या फिल्टर का ही पानी पिलाये |
  • बाजार से आने वाली सब्जी और फलों को हमेशा साफ पानी में धोकर ही उपयोग में लाये |
  • बच्चो को बारिस के पानी में भींगने न दे अगर वे भीग जाएं तो तुरंत उन्हें साफ पानी से नहालाएं| ताकि उन्हें बारिस से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सके |
  • अगर बच्चा बीमार हो जाये तो उसे तुरंत डाँक्टर के पास के कर जाये |
  • बच्चो को खुला और बासी खाना न दे क्योकि खुले खाने पर मक्खी बैठती है जो बाहर से बहुत सारी गंदगी लेकर आती है और खाने को दूषित कर देती है | और बासी खाने में बहुत सारे कीटाणु होते है जो हमे नग्न आँखों से दिखाई तो नही देते है पर बासी खाने में उपस्थित होते है | और जो कई प्रकार की बीमारी फैलाते है |
  • बरसात में अपने बच्चो को बाजार में मिलने वाली चीजे जैसे – चाट , पानी-पुरी आदि को नही खाने देना चाहिए |
  • और अपने घर को साफ सुथरा रखना चाहिए |

सर्दी का मौसम  -:

सर्दी के मौसम  का सबसे ज्यादा असर पड़ता है छोटे बच्चों पर। सर्दी, जुकाम और गले में इंफेक्शन छोटे बच्चों को ये परेशानियां सबसे ज्यादा होती हैं। और कई बार तो हल्का बुखार बढ़कर निमोनिया का रुप भी ले लेता है। ऐसे में सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता जाता है | हम आपको कुछ ऐसे उपाय बतायेगे जिससे आप अपने बच्चों को इन बीमारियों से बचा सकते हैं।

जैसे –

  • बच्चो को गर्म कपडे पहनाकर अवश्य रखे |
  • अक्सर ठंड से बचाने के लिए बच्चों को हीटर और ब्लोअर से गर्म कमरे में रखा जाता है। लेकिन ये आदत बच्चों के लिए अक्सर बीमारी की वजह बन जाती है। कमरे का तापमान हमेशा सामान्य होना चाहिए। अधिक गर्म वातावरण से अगर बच्चा सामान्य तापमान में जाता है तो उसे तुरंत सर्दी असर करती है।
  • बच्चों को रोज रोज नहलाये नही बल्कि हर दूसरे दिन गर्म पानी में सॉफ्ट एंटीबैक्टीरियल लिक्विड डालकर उसमें नर्म तौलिया भिगोकर उनका शरीर साफ कर दें। और दुसरे कपड़े पहना दे ऐसा करने से वे स्वस्थ रहते है |
  • बच्चो को थोड़ी देर धुप में भी बैठना चाहिए क्योकि धुप से विटामिन डी मिलती है जो सेहत के लिए काफी अच्छी होती है |
  • बच्चो को फ्रिज का पानी नही पिलाना चाहिए क्योकि फ्रिज के पानी से भी बच्चे बीमार हो जाते है |
  • बच्चो को जो कुछ भी खिलाये उसे हल्का गर्म करके ही खिलाये |
  • अक्सर हम देखते है कि बहुत से लोग ठंडी की वजह से अपने घर के बिस्तर कई – कई हफ्तों तक धोते नही है पर ऐसा नही करना चाहिए हमे अपने घर के बिस्तर की साफ –सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए क्योकि गंदे बिस्तर पर सोने से भी बच्चे बीमार हो सकते है |

गर्मी का मौसम -:

गर्मी के मौसम का असर वैसे तो सभी पर होता है पर सबसे ज्यादा बच्चो पर पड़ता है क्योकि बच्चे धुप की परवाह किये बिना कही पर भी चले जाते है और बीमार पड़ जाते है | इसलिए माता पिता को अपने बच्चो को गर्मी से होने वाली खतरनाक बीमारियों से बचना जरुरी होता है इसके लिए उन्हें कुछ विशेष बातो का ध्यान रखना होता है |

जैसे -:

  • बच्चो को सूती और हल्के रंग के कपडे पहनाये |
  • बच्चो को अगर धुप में ले जाये तो उन्हें सनस्क्रीन लोशन जरुर लगाये | ताकि उनकी त्वचा पर कोई हानिकारक प्रभाव न पड़े |
  • बच्चो को अधिक से अधिक पानी पीने को कहे |
  • बच्चो को ज्यादा तली चीजे न खिलाये और न ही बाजार की चीजो का सेवन करने दे |
  • बच्चे अगर धुप से खेल कर घर पर आये तो उन्हें तुरंत ही ठंडा पानी न पीने दे और न ही पंखा या कुलर की हवा में बैठने दे |
  • गर्मी में मच्छर से सम्बंधित अनेक प्रकार की बीमारिया होती है इसलिए अपने बच्चो को मच्छरों से बचाए | इसके लिए हम मच्छरदानी या मच्छर भागने की अनेक दवाइयों का उपयोग कर सकते है |
  • बच्चो को रोज नहलाये जरुर क्योकि गर्मी में रोज स्नान करने से भी आधी बीमारिया दूर हो जाती है और शरीर स्वस्थ रहता है |

अगर हम इन सभी बातो का ध्यान रखे तो हम अपने बच्चो को हर मौसम में बीमार होने से बचा सकते है | और उन्हें स्वस्थ रख सकते है |