बुजुर्गों के प्रति हमारा कर्तव्य, उनका महत्व एवं देखभाल – हमारा समाज

क्या आप जानते है की हर बुजुर्ग आपका आने वाला कल है? यदि नहीं तो इतिहास के पन्ने पलट लीजिये. या अपने घर या किसी के भी घर में इस बारे में जाँच पड़ताल कीजिये की जो व्यक्ति अपने माता पिता या दादा दादी का जितना सम्मान करता है आगे चलकर उसे वही मिलता है या नहीं. चलो मान लिया नहीं मिला एक बार के लिए. लेकिन उनसे संपर्क में रहकर आपने जो भी जिन्दगी में सीखा है क्या वो आपको कोई सिखा सकता है, खैर इस मामले में जितना भी बोला जाये वो हमेशा बहुत कम होता है. इसलिए पहले ये कहानी पढ़ते है. ताकि समझ में आ जाये की हम क्या क्या और कैसे सीखते है. जो असल में हर किसी को समझ आता नहीं है.

चलिए जानते है बड़े बुजुर्गों का महत्व इस छोटी सी कहानी के द्वारा :

एक बुज़ुर्ग महिला से एक युवती ने एक सवाल पूछा की आपको तो जिंदगी का बहुत अनुभव है क्या आप हमें कुछ शिक्षा या नसीहत दे सकती है ?

बुजुर्ग महिला कुछ अपनी जिंदगी की उदेडबुन में थी. और तमतमाकर अजीब सा उत्तर दिया – “तूने कभी बर्तन धोये हैं?”
तो उस युवती ने हैरान होकर जवाब दिया – “जी बिलकुल धोये हैं और रोज़ धोती हु.”
फिर बुजुर्ग महिला ने सवाल किया की “तो क्या सीखा?”
उस युवती ने कहा – “इसमें सीखने वाली बात क्या है?”
बुज़ुर्ग ने महिला ने जवाब दिया – “बर्तन को बाहर से कम, अन्दर से ज़्यादा धोना पड़ता है बेटी”
उस युवती को तुरंत समझ आ गया की उसे क्या शिक्षा मिली है.

क्या आपको भी समझ आया की उस बुजुर्ग महिला ने उस युवती को गुस्से में भी क्या समझाना चाहा अगर नहीं तो चलिए हम बता देते है. उस बुजुर्ग महिला का तात्पर्य था की – “हम सभी शरीर को धोने में लगे हुए है मन को कब धोएंगे?” क्युकी जिस दिन हर इन्सान ने अपना मन धो लिया ये धरती स्वर्ग बन जाएगी.

बुजुर्गो की देखभाल कैसे करे

जीवन की दो अवस्था ऐसी  होती है, जिसमे हम दूसरों पर निर्भर रहते है| वे अवस्था है – बाल्यावस्था और वृद्धावस्‍था| जब हम बालक होते है| तब कई कामों के लिए हम अपने माता-पिता पर निर्भर होते है| उसी प्रकार जब हम वृद्धावस्‍था में आते है तब हम अपने बच्चों पर निर्भर होने लगते है| वृद्धावस्‍था उम्र का वो आखिरी पड़ाव होता है ,जब व्यक्ति को अनेक शारीरिक और मानसिक समस्याएं होने लगती है| और कुछ लोग को तो इस अवस्था में अकेलापन सताने लगता है| क्योंकि जब इनके बच्चे बड़े हो जाते है और उनकी शादी हो जाती है| तो वे अपनी ही दुनिया में मगन रहने लगते है| और अपने बुजुर्ग माता-पिता पर ध्यान नहीं दे पाते है| और कुछ लोग तो ऐसे भी होते है जो जानबूझ कर अपने बुजुर्गो की देखभाल नहीं करते है| और उन्हें उनके अंतिम पड़ाव पर अकेला छोड़ देते है| लेकिन वे लोग ये नहीं जानते है कि एक दिन उन्हें भी इस अवस्था से गुजरना होगा| और जैसे आज वे अपने बुजुर्ग माता-पिता को अकेला और लाचार छोड़ रहे है| वैसे एक दिन उनके बच्चे भी उन्हें इसी तरह छोड़ देंगे| क्योंकि मनुष्य को अपने कर्मो का फल इसी दुनिया में भोगना पड़ता है| वो जैसा करता है ,उसे आगे चलकर उसका वैसा ही फल मिलाता है| इसलिए हमें हमेशा अपने बुजुर्गो की देखभाल करना चाहिए| लेकिन हमें हमारे बुजुर्गो की देखभाल कैसे करना चाहिए ये हम आपको इन टिप्स के माध्यम से बताने जा रहे है –

  • सबसे पहले तो हमें बुजुर्गो के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए|
  • उनके लिए समय निकलना चाहिए ताकि उन्हें अकेलापन महसूस न हो|
  • उनकी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि बुढ़ापे में भूख लगना कम हो जाती है जिसके कारण अनेक बीमारिया घेरने लगती है| इसलिए इनके खानपान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए|
  • बुजुर्गो को प्रतिदिन योग और व्यायाम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए जिससे वे शारीरक और मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ रह सके|
  • अपनी समस्याए उसके साथ शेयर करना चाहिए और उसका हल उनसे पूछना चाहिए ताकि उन्हें ये लगे कि घर में उनका एक विशेष स्थान है|
  • उन्हें मान सम्मान देना चाहिए और कुछ भी ऐसा नहीं बोलना चाहिए जिससे उनके मन को ठेस लगे|
  • अगर आपके घर के बच्चे उनके साथ गलत व्यवहार कर रहे है तो उन्हें भी ऐसा करने से रोकना चाहिए|
  • उनके साथ बैठकर कभी-कभी खाना भी खाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उन्हें अपनेपन का एहसास होता है|
  • उन्हें स्वेच्छा से काम करने के लिए प्रेरित करे| क्योंकि जो लोग स्वेच्छा से कार्य करते है वे सेहतमंद और खुश रहते है|
  • हमें बुजुर्गो के अनुभवों को ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि इनके अनुभव ज्ञान का खजाना होते है| जो हर परेशानी से हमें बाहर निकाल लेते है|
  • हमें उनके जीवन में ज्यादा रोकटोक नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उनकी मानसिक स्थिति भी खराब हो सकती है| इसलिए जब तक उनके हाथ-पाव चले तब तक उन्हें उनके काम स्वयं करने देना चाहिए|
  • उनकी हर प्रकार की जरुरत का हमें ध्यान रखना चाहिए|
  • अगर उन्हें किसी भी प्रकार की बीमारी हो तो डांक्टर को तुरंत दिखाना चाहिए| उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करना उनके स्वस्थ से लिए हानिकारक हो सकता है|
  • और अपने जीवन की हर खुशी में उन्हें शामिल करना चाहिए|
  • उनके गुस्सा होने पर भी उनके साथ गलत व्यवहार कभी भी नहीं करना चाहिए|

 

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