आखिर यमुना काली क्यों है? – यमुना नदी की कहानी : Why Yamuna River is Black?

आज हम ये पता करेंगे की क्यों यमुना काली है . हमारे शास्त्रों में भी ये लिखा है की यमुना नदी काली है और गंगा नदी सफ़ेद है यमुना भी गंगा की तरह भारत की सबसे प्राचीन और पवित्र नदी मानी जाती है क्युकी द्वापरयुग में यमुना कृष्णा जन्म से लेकर द्वापरयुग के अंत तक यमुना का वर्णन होता रहा है. हमारे शास्त्रों के अनुसार यमुना सूर्य की पुत्री, यमराज की बहन, और कृष्णा की पत्नी है,भारत के लोगो के लिए यमुना सिर्फ एक नदी नहीं बल्कि माँ के सामान है, क्युकी यमुना ही वह की सांस्कृतिक धरोहर या विरासत है.

आखिर यमुना काली क्यों है?
आप भारत का कोई भी मंदिर देख ले वह यमराज और यमुना की मूर्ति या फोटो आपको काली ही मिलेगी आज हम इसके कुछ पौराणिक और वास्तविक कारण बताएँगे.

पहला कारण : (पौराणिक)
सूर्य की एक पत्नी छाया भी थी (परछाई) जिनका वास्तविक नाम संज्ञा देवी था. जो बहुत की काली थी, कहा जाता है की यमराज और यमुना सूर्य और छाया की ही संतान है इसलिए इनका वर्ण श्याम (काला) है. दीपावली के दूसरे दिन यम दिव्तीया को यमुना और यमराज का मिलन बताया गया है पुराणों के अनुसार यमुना अपने भाई यम से बड़ा स्नेह करती थी और इसलिए बहुत दिनों बात जब यमराज अपनी बहन से मिलने यमपुरी से पृथ्वीलोक पर आये तो यमुना ने उन्हें मथुरा नगरी स्थित विश्राम घाट पर बहुत ही स्वागत और आदर सत्कार किया फिर भोजन कराया.इससे प्रश्न होकर यमराज ने वरदान मांगने को कहा तो यमुना ने कहा की आप पापियों को यमपुरी में दंड देते हो, में चाहती हु की इसलोक के नर नारी यदि यमुना में स्नान करे तो यमलोक न जाये..यमराज ने सोचा ऐसे तो सारी व्यवस्था ही समाप्त हो जाएगी, लेकिन फिर उन्होंने कुछ सोचकर बहन यमुना जी को ये आस्वाशन दिया की जो भी भाई इस तिथि को अपनी अपनी बहन के यहाँ भोजन नहीं करेगा, उसे में बांधकर यमपुरी ले जायूँगा, और जो बहन के यहाँ भोजन करके यहाँ स्नान करेगा उसके पाप नष्ट हो जायेगे और वो यमपुरी जाने से बचेगा. इसलिए इसी दिन भाई बहन के लिए भाई द्वौज मनाया जाता है.

दूसरा कारण : (ऐतिहासिक) :
यमुना का उद्गम स्थान हिमालय के हिमाच्छादित श्रंग बंदरपुच्छ ऊँचाई 6200 मीटर से 7 से 8 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित कालिंद पर्वत है, जिसके नाम पर यमुना को कालिंदजा अथवा कालिंदी कहा जाता है।
पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन वृन्दावन में यमुना गोवर्धन के निकट प्रवाहित होती थी। जबकि वर्तमान में वह गोवर्धन से लगभग ४ मील दूर हो गई है। गोवर्धन के निकटवर्ती दो छोटे ग्राम ‘जमुनावती’ और परसौली है। वहाँ किसी काल में यमुना के प्रवाहित होने उल्लेख मिलते हैं। परासौली में यमुना को धारा प्रवाहित होने का प्रमाण स. १७१७ तक मिलता है।

प्रागऐतिहासिक काल में यमुना मधुबन के समीप बहती थी, जहाँ उसके तट पर शत्रुध्न जी ने सर्वप्रथम मथुरा नगरी की स्थापना की थी। वाल्मीकि रामायण और विष्णु पुराण में इसका विवरण प्राप्त होता है। कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा केशव देव के निकट था। सत्रहवीं शताबदी में भारत आने वाले यूरोपीय विद्वान टेवर्नियर ने कटरा के समीप की भूमि को देख कर यह अनुमान लगा लिया था कि वहाँ किसी समय यमुना की धारा थी। इस संदर्भ में ग्राउज़ का मत है कि ऐतिहासिक काल में कटरा के समीप यमुना के प्रवाहित होने की संभावना कम है, किन्तु अत्यन्त प्राचीन काल में वहाँ यमुना अवश्य थी। इससे भी यह सिद्ध होता है कि कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा के समीप ही था।

तीसरा कारण : (वर्तमान)
यमुना नदी ज्यादातर भारत के शहरों से ही गुजरती है जिसमे दिल्ली सबसे बड़ा शहर है, उसके बाद अलीगढ, मथुरा, आगरा, फ़िरोज़ाबाद, इटावा, औरेया, जालौन, हमीरपुर, फतेहपुर, से होते हुए इलाहबाद में गंगा से मिल जाती है. वर्तमान समय में यमुना नदी सहारनपुर जिले के फैजाबाद गाँव के निकट मैदान में आने पर यह आगे 65 मील तक बढ़ती हुई हरियाणा के अम्बाला और करनाल जिलों को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जिलों से अलग करती है। इस भू-भाग में इसमें मस्कर्रा, कठ, हिंडन और सबी नामक नदियाँ मिलती हैं, जिनके कारण इसका आकार बहुत बढ़ जाता है। मैदान में आते ही इससे पूर्वी यमुना नहर और पश्चिमी नहर निकाली जाती हैं। ये दोनों नहरें यमुना से पानी लेकर इस भू-भाग की सैकड़ों मील धरती को हरा-भरा और उपज सम्पन्न बना देती हैं।
इसके ठीक तट पर बसा हुआ सबसे प्राचीन और पहला नगर दिल्ली है, जो भारत की राजधानी है। दिल्ली का वज़ीराबाद बैराज एक ऐसी जगह है जहाँ से नदी दिल्ली मे प्रवेश करती है और इसी जगह पर बना बैराज यमुना को आगे बढ़ने से रोक देता है. वज़ीराबाद के एक तरफ यमुना का पानी एकदम साफ़ और दूसरी ओर एक दम काला. इसी जगह से नदी का सारा पानी उठा लिया जाता है और जल शोधन संयत्र के लिए भेज दिया जाता है ताकि दिल्ली की जनता को पीने का पानी मिल सके. बस यहीं से इस नदी की बदहाली भी शुरु हो जाती है. दिल्ली के लाखों नर-नारियों की आवश्यकता की पूर्ति करते हुए और वहाँ की ढेरों गंदगी को बहाती हुई यह ओखला नामक स्थान पर पहुँचती है। यहाँ पर इस पर एक बड़ा बांध बांधा गया है जिससे नदी की धारा पूरी तरह नियंत्रित कर ली गयी है। इसी बांध से आगरा नहर निकलती है, जो हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सैकड़ों मील भूमि को सिंचित करती है।

अर्थात जिस शहर से यमुना माँ निकलती है उस शहर को हरा भरा बनाते हुए तथा उस शहर के पाप या गन्दगी अपने में समाहित करते हुए आगे निकल जाती है. ज्यादातर शहरों ने यमुना पर बांध बनाकर इसके वास्तविक जल को निकालकर उसमे नाले आदि का पानी छोड़ दिया जाता है. जिससे यमुना में वास्तविक जल की मात्रा कम और सीवर, नाले, फैक्ट्री आदि का काला पानी ज्यादा होता है जो की बहुत दुखद है इस बात को मानने से कोई भी इनकार नही कर सकता कि यमुना भारत की सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में से एक है. लेकिन इससे आप यमुना नदी को काला कह सकते है.