Rawana temple in india

ऐसे १० मंदिर जहा भगवान् को छोड़कर अन्य की होती है पूजा

आपके मन में जब मंदिर का ख्याल होता होगा तब आप उसे किसी न किसी देवी या देवता से जरूर जोड़कर देखते होंगे, लेकिन अगर कोई आपसे कहे की ऐसे भी मंदिर है जहा किसी देवी या देवता या भगवान् की नहीं बल्कि अन्य की पूजा होती है तो आप चौक जायेंगे. बिलकुल आज हम हिंदू पौराणिक कथाओं के भगवानो की नहीं बल्कि उनके अलग अलग लोगो के मंदिरो के बारे में बताएँगे.

हिन्दू पौराणिक ग्रन्थ बहुत ही विशाल है, ऐसे बहुत कम हिन्दू मिलेंगे जिन्होंने सारे ग्रन्थ, पुराण, पड़े होंगे. जीवन बीत जायेगा उनको पड़ने में और उनको समझने में. खैर चलिए हम नज़र दिलाते है ऐसे १० मंदिरो पर जहा ब्रह्मा, विष्णु, महेश या दैवीय नहीं है.
1. शकुनि मंदिर
केरल के कोल्लम में स्थित एक मंदिर में बाकायदा शकुनी की पूजा होती है। इस मंदिर का नाम है, मायम्कोट्टू मलंचारुवु मलनाड। परंपरा के अनुसार, इस मंदिर में शकुनी को नारियल, रेशम और ताड़ी (ताड़ के रस से बनी एक स्थानीय शराब ‘तोड्डी’) चढ़ाई जाती है। कहते हैं रक्तरंजित महाभारत युद्ध से जो ठहराव आया उसके बाद शकुनी ने विदग्ध मन को शांत करने और मोक्ष पाने के लिए भगवान शिव की तपस्या की थी। अपनी तपस्या के लिए उसने जिस स्थान को चुना था, वह स्थान ही आज कोल्लम का पवित्रेश्वरम है। शकुनी ने युद्ध के लिए कौरवों को उकसाया था, जो युद्ध होने का तात्कालिक कारण बना। कहते हैं यदि शकुनि न होते तो शायद महाभारत का युद्ध नहीं होता, तब शायद भारतवर्ष की कहानी कुछ और ही होती।

shakuni temple in india
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2. दुर्योधन मंदिर
दुर्योधन मंदिर एक प्रसिद्ध पवित्र स्थल है जो मोरी के नजदीक जखोल में स्थित है। यह उत्तराखंड में स्थित सभी मंदिरों में सबसे बड़ा है। यह मंदिर हिंदू महाकाव्य महाभारत के पौराणिक पात्र दुर्योधन को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण सौर गाँव के निवासियों ने करवाया था। इसके अलावा ओसला, गंगर, दात्मिरकन में भी कौरवों को समर्पित मंदिर हैं। स्थानीय निवासी कौरवों एवं पांडवों को अपना पूर्वज मानते हैं। दुर्योधन के मंदिर भारत में और भी कई जगह है जैसे Poruvazhy Peruviruthy Malanada मंदिर.

duryodhana temple in india
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3. हिडिंबा मंदिर

हिमाचल प्रदेश के मनाली शहर से कुछ ऊपर ढूंगरी नाम के स्थान में हिंडिबा देवी का मंदिर है। एक तो हिडिंबा जो राक्षसी थी और उसका मंदिर बना हुआ है। मनाली में ही नहीं, पूरे कुल्लू में हिडिंबा की पूजा होती है। मंदिर के अंदर काठ पर उकेरी गई देवी देवताओं की मूर्तियां है।

प्रवेश द्वार काठ नक्काशी का शानदार नमूना है। ये मंदिर भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित है। अप्रैल-मई में माता हिडिंबा मंदिर परिसर में छोटा दशहरा का मेला लगता है। यहां जाने के लिए चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। हिमाचल का ये एक ऐसा मंदिर है जहां बलि चढ़ाई जाती है। मंदिर परिसर में लटके जानवरों के सिंग इसकी गवाही देते हैं। यहां पर लोग आज भी अपना खून प्रसाद के तौर पर चढ़ाते हैं।

Hidimba temple in india
Hidimba temple in india

4. कर्ण का मंदिर
उत्‍तरकाशी में बना ये मंदिर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। ये मंदिर लकड़ियों से बना हुआ है। इस मंदिर की खासियत है कि इसमें पांडवों के 6 छोटें मंदिर भी बने हुए हैं। उत्तराखंड के सीमांत जनपद मोरी ब्लॉक के 24 गांव ऐसे हैं जहां लोग दानवीर कर्ण की पूजा करते हैं, वहीं भीम के पुत्र घटोत्कच की मौत पर खुशी भी मनाते हैं।

देवरा गांव में कर्ण का मंदिर है। इसके आस पास के गांवों में कर्ण के सारथी शल्य महाराज, कर्ण के गण पोखू देवता, कर्ण की गुरुमाता रेणुका देवी के मंदिर हैं। कर्ण मंदिर समिति के अध्यक्ष राजमोहन ¨सह रांगड़ बताते हैं कि पंचगाई व ¨सगतूर पट्टी के 24 गांव में केवल कर्ण महाराज की पूजा होती है। यहां के ग्रामीणों के कुलदेवता और इष्ट देवता कर्ण ही हैं। महाभारत में घटोत्कच की मौत की खुशी में यहां ग्रामीण हर साल ¨हडोड़ा मेले का आयोजन करते हैं। यह मेला मकर संक्रांति के अगले दिन होता है।

देवरा, पोखरी, गुराड़ी, गैंच्वाण गांव, दणमाण गांव, सुस्यांण गांव, हल्टवाड़, पासा, कुंदरा, लुदराला, नानाई, रामाल गांव, डोभाल गांव, ¨वगसारी, लिवाड़ी, फिताड़ी, जखोल, पर्वत, कोटगांव, नैटवाड़ सहित 24 गांव के ग्रामीण इष्ट देवता कर्ण की पूजा करते हैं।

karna-temple-india

5. वाल्‍मिकी मंदिर
वाल्‍मिकी जी के कई मंदिर भारत देश में बने हए हैं लेकिन ये मंदिर इसलिए खास है क्‍योंकि लाहौर में बना ऐसा मंदिर है जहां आज भी पूजा होती है।

और भी एक मंदिर है महर्षि वाल्मीकि की जीव समाधी पर बना एक छोटा सा मंदिर तिरुवन्मियूर, चेन्नई में स्थित है। थिरुवन्मियूर का नाम थिरु-वाल्मीकि-ऊर से पड़ा। तमिल नाडु के १८ सिद्धो में से वाल्मीकि एक है। कई लोग ऐसा मानते है के ये वही है जिन्होंने रामायण लिखी है।

महर्षि वाल्मीकि बाल्मीकि संप्रदाय के महा गुरु है। इनकी जयंती उत्तर भारत के कई मंदिरो में मनाई जाती है।

Valmiki temple in india
6. द्रौपती मंदिर
ये मंदिर 800 साल पुराना है जिसका नाम Dharmaraya Swamy Temple है। ये भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है जो बैंगलोर में स्‍थित है।

Draupadi temple in india

7. जटायू मंदिर

दंडकारण्य, आंध्र प्रदेश में मौजूद है रामायण के एक अहम पात्र गिद्धराज जटायु का मंदिर। जब सीता का अपहरण कर रावण पुष्पक विमान से लंका जा रहा था, तो सबसे पहले जटायु ने ही रावण से लोहा लिया था।
स्थानीय मान्यता के मुताबिक दंडकारण्य में के आकाश में ही रावण और जटायु का युद्ध हुआ था और जटायु के कुछ अंग दंडकारण्य में आ गिरे थे।
और भी एक मंदिर है जटायू मंदिर,  जो नासिक से 65 किलोमीटर दूर Tatet नाम की जगह पर स्‍थित है। कहा जाता है कि यही वो स्‍थान है जहां पर जटायू ने अपनी आखिरी सांसे ली थी और भगवान राम ने उसका सारा क्रिया-कर्म किया था। इस मंदिर के पास में एक नदी भी है जिसके पानी का लेवल पूरे साल एक समान ही रहता है। बता दें कि Thiruputkuzhi में भी एक जटायू मंदिर है।

Jatayu temple in india

8. गंधारी मंदिर
गांधारी कौरवों की माता थी, मैसूर में गांधारी का मंदिर स्थित है। 2008 में इस मंदिर की स्थापना की गई थी। एक रिपोर्ट अनुसार, इस मंदिर का निर्माण करने में करीब 2.5 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

gandhari temple in india
9. रावण मंदिर

यकीन नहीं होता कि रावण के इतने मंदिर हैं भारत में, आप भी पढ़िए यहाँ तीन मुख्य मंदिर को उल्लेख किया जा रहा है

मध्य प्रदेश के विदिशा का रावणगांव के मंदिर को देखिए। यहां रावण की पूजा और उसके नाम की आरती भी होती है। मान्यता है रावण कान्यकुब्ज ब्राह्मण था और गांववासी मानते हैं कि वह रावण के वंशज हैं इसलिए रावण बाबा की पूजा करते हैं।

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में स्थित दशानन मंदिर। इस मंदिर में दशानन रावण की पूजा होती है। मंदिर की खूबी है कि इसका द्वार सिर्फ नवरात्र में खुलता है इसके बाद पूरे एक साल के लिए इसका द्वार बंद हो जाता है। इसलिए नवरात्र में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

आंध्रप्रदेश के काकिनाडा में है यह रावण मंदिर। मंदिर के द्वार पर ही आपको दस सिरों वाला रावण खड़ा दिखेगा। इस मंदिर रावण के अराध्य भगवान शिव भी विराजमान हैं।

Rawana temple in india

10. भीष्‍म मंदिर
अलाहाबाद में भीष्‍म पितामाह का मंदिर है। पूरे देश में ये अनोखा मंदिर है क्‍योंकि भीष्‍म पितामाह का और कोई मंदिर भारत में स्‍थित नहीं है।

Bhishm temple in india